सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने मास्टर प्लान 2031 में संशोधन से पहले जन-सुनवाई की उठाई आवाज
चंडीगढ़, 3 मार्च 2026। संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ में प्रस्तावित अवसंरचनात्मक परियोजनाओं को लेकर नागरिकों में चिंता गहराने लगी है। विशेष रूप से Punjab and Haryana High Court के संभावित बड़े विस्तार और मास्टर प्लान 2031 में संशोधनों को लेकर सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने पारदर्शी एवं व्यापक जन-परामर्श की मांग की है।
सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन, जो शहर के जागरूक वरिष्ठ नागरिकों एवं निवासियों का प्रतिनिधित्व करती है, ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि चंडीगढ़ केवल एक सामान्य शहर नहीं, बल्कि सुविचारित शहरी नियोजन, विशिष्ट स्थापत्य और अंतरराष्ट्रीय पहचान वाला नगर है। ऐसे में किसी भी प्रकार का संस्थागत विस्तार विरासत संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और वैधानिक नियोजन मानकों के अनुरूप ही किया जाना चाहिए।
एफ.ए.आर. वृद्धि और ऊँची इमारतों पर चिंता
एसोसिएशन ने औद्योगिक क्षेत्र में बढ़े हुए एफ.ए.आर., सेक्टर-53 में संभावित ऊँची इमारतों के निर्माण तथा निजी ठेकेदार आधारित विकास मॉडल पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बिना पारदर्शी प्रक्रिया और सार्वजनिक भागीदारी के ऐसे निर्णय शहर की मूल संरचना और पहचान को प्रभावित कर सकते हैं।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि यदि मास्टर प्लान 2031 में संशोधन पर विचार किया जा रहा है, तो व्यापक जन-सुनवाई अनिवार्य की जानी चाहिए, ताकि शहर के मूल हितधारकों — यानी निवासियों — की राय को औपचारिक रूप से दर्ज किया जा सके।
“प्लान C” के रूप में वैकल्पिक प्रस्ताव
सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने एक संतुलित विकल्प के रूप में “प्लान C” प्रस्तुत किया है। इसके तहत सुझाव दिया गया है कि चूंकि उच्च न्यायालय पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों की सेवा करता है, इसलिए दोनों राज्यों में लगभग 15–20 न्यायाधीशों वाली स्थानीय पीठ (लोकल बेंच) स्थापित की जा सकती है। इससे चंडीगढ़ पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सकेगा।
एसोसिएशन के अनुसार:
चंडीगढ़ में उच्च न्यायालय के मूल संवैधानिक एवं प्रशासनिक कार्य पूर्ववत जारी रहें।
वर्तमान नियोजन मानकों से हटकर किसी भी प्रकार की ऊँची इमारत की अनुमति न दी जाए।
एफ.ए.आर. में अंधाधुंध वृद्धि के बजाय आंतरिक पुनर्संरचना और उपलब्ध स्थान का बेहतर उपयोग किया जाए।
मास्टर प्लान 2031 में संशोधन से पूर्व औपचारिक जन-परामर्श प्रक्रिया शुरू की जाए।
विकास बनाम विरासत नहीं, संतुलन जरूरी
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि वह विकास के विरोध में नहीं है, बल्कि संतुलित, सहभागी और दीर्घकालिक दृष्टिकोण वाले विकास की पक्षधर है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि “चंडीगढ़ के निवासी अपने नगर के भविष्य को लेकर मौन दर्शक नहीं रह सकते। प्रशासन और संबंधित प्राधिकरणों को शीघ्र पारदर्शी परामर्श प्रक्रिया आरंभ करनी चाहिए।”
सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने शहर के दीर्घकालिक हित में सभी पक्षों को साथ लेकर निर्णय लेने की अपील की है।











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