प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं फिर से शुरू, डॉक्टर बोले—न्याय के लिए अदालत जाएंगे
करनाल: हरियाणा के करनाल में डॉक्टरों और पुलिस के बीच हुए विवाद ने पिछले दो दिनों से पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच रखा था। इस मामले में अब प्रशासन की ओर से बड़ी कार्रवाई सामने आई है। करनाल के उपायुक्त उत्तम सिंह और डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद घरौंडा थाने में तैनात छह और पुलिस कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है।
इससे पहले घरौंडा थाना प्रभारी दीपक कुमार को भी निलंबित किया जा चुका था। इस तरह अब तक इस पूरे विवाद में कुल सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ सस्पेंशन की कार्रवाई की जा चुकी है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया है, जिससे प्रदेश के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं धीरे-धीरे सामान्य होने लगी हैं।
डॉक्टरों ने समाप्त की हड़ताल, ओपीडी सेवाएं फिर शुरू
डॉक्टरों ने प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अपनी हड़ताल वापस लेने का फैसला किया है। पिछले दो दिनों से प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं बंद थीं, जिसके कारण मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
हरियाणा के विभिन्न जिलों में डॉक्टरों ने विरोध के रूप में ओपीडी सेवाएं रोक दी थीं। मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा था और कई जगहों पर केवल आपातकालीन सेवाएं ही चल रही थीं।
अब हड़ताल समाप्त होने के बाद डॉक्टरों ने घोषणा की है कि प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं दोबारा शुरू कर दी जाएंगी, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से चल सकें।
डॉक्टरों ने जताई नाराज़गी
हालांकि डॉक्टरों ने हड़ताल समाप्त कर दी है, लेकिन वे पुलिस प्रशासन की कार्रवाई से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखाई दिए। प्रेसवार्ता के दौरान डॉक्टरों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें प्रशासन की कार्रवाई अभी भी अधूरी और अपेक्षाकृत हल्की लगती है।
डॉक्टरों का कहना है कि जिस तरह से यह घटना हुई, उसके मद्देनजर पुलिस कर्मियों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए थी। उनका मानना है कि यदि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में भी इस तरह की घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।
डॉक्टरों ने यह भी कहा कि मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है, और इस मामले में उदाहरण पेश करने वाली कार्रवाई की जरूरत थी।
न्याय के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाएंगे डॉक्टर
डॉक्टरों ने साफ कर दिया है कि वे इस मामले को यहीं खत्म नहीं मानते। डॉक्टर प्रशांत से जुड़े इस विवाद को लेकर अब डॉक्टर न्यायालय का सहारा लेने की तैयारी कर रहे हैं।
डॉक्टरों के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे जल्द ही अदालत में याचिका दायर करेंगे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे। उनका कहना है कि न्यायिक हस्तक्षेप से ही इस मामले में पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित हो पाएगी।
पूरे प्रदेश में पड़ा था असर
करनाल से शुरू हुआ यह विवाद बहुत तेजी से पूरे हरियाणा में फैल गया था। डॉक्टरों के समर्थन में प्रदेश भर के अस्पतालों में विरोध प्रदर्शन हुए और कई जिलों में ओपीडी सेवाएं बंद कर दी गईं।
इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा और हजारों मरीजों को इलाज के लिए परेशानी उठानी पड़ी। कई अस्पतालों में मरीजों को केवल आपातकालीन सेवाओं तक सीमित रहना पड़ा।
अब जब डॉक्टरों ने हड़ताल समाप्त कर दी है, तो प्रदेश के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं फिर से सामान्य होने लगी हैं। मरीजों को भी राहत मिली है और अस्पताल प्रशासन ने ओपीडी सेवाओं को पूरी तरह बहाल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।










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