April 22, 2026 2:52 pm

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पंजाब में भूजल संकट पर संसद में गूंजा मुद्दा, केंद्र ने जल संरक्षण के लिए 32,000 करोड़ का बजट किया आवंटित

नई दिल्ली। पंजाब में गिरते भूजल स्तर और बढ़ते जल प्रदूषण का मुद्दा सोमवार को संसद में जोर-शोर से उठा। राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने राज्य में गहराते जल संकट को ‘वॉटर इमरजेंसी’ करार देते हुए केंद्र सरकार से विशेष योजना लागू करने की मांग की। इस पर जवाब देते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने बताया कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए जल संरक्षण और डार्क ज़ोन के पुनरुद्धार के लिए 32,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। यह राशि वीबी-जीरामजी (पूर्व में मनरेगा) योजना के तहत खर्च की जाएगी।

पंजाब में ‘वॉटर इमरजेंसी’ की स्थिति

संसद में प्रश्नकाल के दौरान सांसद सतनाम सिंह संधू ने कहा कि पंजाब गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य के 23 में से 19 जिले ग्राउंडवॉटर के अत्यधिक दोहन के कारण डार्क ज़ोन में शामिल हो चुके हैं। पंजाब में पानी निकालने की दर 156.36 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो देश में सबसे अधिक है, जबकि राष्ट्रीय औसत करीब 60 प्रतिशत है।

संधू ने यह भी कहा कि सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब के 62.5 प्रतिशत भूजल सैंपलों में यूरेनियम की मात्रा सुरक्षित सीमा से अधिक पाई गई है, जिससे कैंसर सहित गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं।

2039 तक और गहराएगा संकट

संधू ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की मॉनिटरिंग कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि यदि मौजूदा स्थिति जारी रही तो 2039 तक पंजाब का भूजल स्तर 300 मीटर से नीचे जा सकता है, जिससे राज्य के जल स्रोत लगभग समाप्त होने का खतरा पैदा हो जाएगा।

हर घर जल योजना से पानी की सप्लाई सुनिश्चित

सांसद संधू ने कहा कि हर घर जल योजना के 100 प्रतिशत पूरा होने से पंजाब के हर घर में पाइपलाइन से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित हुई है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए पूछा कि क्या पंजाब को अटल भूजल योजना में शामिल किया जा सकता है या डार्क ज़ोन को पुनर्जीवित करने के लिए कोई विशेष योजना लागू की जाएगी।

अटल भूजल योजना बंद, अब वीबी-जीरामजी से होगा काम

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने बताया कि अटल भूजल योजना अब समाप्त हो चुकी है, लेकिन प्रधानमंत्री के निर्देश पर वीबी-जीरामजी योजना के तहत बड़े पैमाने पर जल संरक्षण कार्य किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पहले अटल भूजल योजना का बजट 6,000 करोड़ रुपये था, जबकि अब जल संरक्षण के लिए 32,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

डार्क ज़ोन को प्राथमिकता

पाटिल ने बताया कि इस योजना के तहत जल संकट वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।

65% फंड डार्क ज़ोन और क्रिटिकल ब्लॉकों के लिए

40% फंड सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों के लिए

30% फंड अन्य क्षेत्रों के लिए निर्धारित है।

इन फंड्स से जल संरक्षण, जल संचयन और जल पुनर्भरण से जुड़े प्रोजेक्ट बनाए जाएंगे।

जनभागीदारी से बन रहे जल संरक्षण ढांचे

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की अपील की थी। इसी के तहत देशभर में लोगों की भागीदारी से अब तक 44 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं बनाई जा चुकी हैं और 1 करोड़ संरचनाएं बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने बताया कि “कर्मभूमि से मातृभूमि” पहल के जरिए एनआरआई और प्रवासी भारतीयों को भी अपने गांवों में जल संरक्षण कार्यों में योगदान देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब में भूजल संकट और प्रदूषण को देखते हुए आने वाले वर्षों में जल प्रबंधन और खेती के पैटर्न में बड़े बदलाव करना बेहद जरूरी होगा।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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