देशभर के 400 से अधिक रूमेटोलॉजिस्ट हुए शामिल, नए इलाज और जटिल केस स्टडी पर हुई चर्चा
सिकंदराबाद: देश और दुनिया में जोड़ों, हड्डियों, मांसपेशियों, टेंडन, लिगामेंट्स और कनेक्टिव टिशू से जुड़ी सूजन और ऑटोइम्यून बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। गठिया, ऑस्टियोआर्थराइटिस, ल्यूपस जैसी रूमेटोलॉजिकल बीमारियां आज बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी हैं।
इन्हीं बीमारियों के आधुनिक इलाज और जटिल मामलों पर चर्चा के लिए सिकंदराबाद स्थित KIMS हॉस्पिटल्स में 3 से 4 मार्च तक दो दिवसीय क्लिनिकल रूमेटोलॉजी कॉन्फ्रेंस 2026 (CRC2026) का आयोजन किया गया। इस राष्ट्रीय स्तर की कॉन्फ्रेंस में देशभर से 400 से अधिक रूमेटोलॉजिस्ट शामिल हुए।
नए इलाज पर अपडेट रहने की जरूरत: डॉ. बोलिनेनी भास्कर राव
कॉन्फ्रेंस के दौरान KIMS हॉस्पिटल्स के चेयरमैन डॉ. बोलिनेनी भास्कर राव ने कहा कि रूमेटोलॉजी के क्षेत्र में लगातार नए इलाज और थैरेपी सामने आ रही हैं। ऐसे में डॉक्टरों का अपडेट रहना बेहद जरूरी है, ताकि मरीजों को बेहतर और प्रभावी इलाज मिल सके।
उन्होंने सभी रूमेटोलॉजिस्ट से अपील की कि वे सतर्क रहें, नई जानकारी हासिल करें और आधुनिक उपचार पद्धतियों के जरिए मरीजों को राहत देने का प्रयास करें।
केस-बेस्ड डिस्कशन रही कॉन्फ्रेंस की खासियत
CRC2026 की खास बात यह रही कि यह कॉन्फ्रेंस अनुभवी रूमेटोलॉजिस्ट द्वारा ट्रीट किए गए सबसे जटिल मामलों पर आधारित थी। केस-दर-केस चर्चा के जरिए प्रतिभागियों को यह समझने का मौका मिला कि कठिन रूमेटिक बीमारियों को कैसे मैनेज किया जाए।
इससे युवा और अनुभवी डॉक्टरों दोनों को अपनी प्रैक्टिस में मददगार जानकारियां मिलीं।
इन विशेषज्ञों की रही मौजूदगी
कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन कई प्रतिष्ठित चिकित्सकों और अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ, जिनमें शामिल रहे—
डॉ. बी. भास्कर राव (CMD, KIMS हॉस्पिटल्स)
डॉ. संबित साहू, मेडिकल डायरेक्टर, KIMS हॉस्पिटल्स
डॉ. बी. श्रीनिवास, उप महानिदेशक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
डॉ. विनोद, प्रेसिडेंट-इलेक्ट, इंडियन रूमेटोलॉजी एसोसिएशन (IRA)
डॉ. सरथ चंद्र मौली, क्लिनिकल डायरेक्टर, रूमेटोलॉजी विभाग
डॉ. डी. राजकिरण, डायरेक्टर, हैदराबाद रूमेटोलॉजी सेंटर
किन बीमारियों पर हुई चर्चा
कॉन्फ्रेंस का नेतृत्व ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. सरथ चंद्र मौली वीरवल्ली और साइंटिफिक चेयर डॉ. विनोद रविंद्रन ने किया। इसमें इन प्रमुख विषयों पर सत्र आयोजित किए गए—
रूमेटाइड आर्थराइटिस
ल्यूपस
एंकिलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस
सोरियाटिक आर्थराइटिस
गाउट
वैस्कुलाइटिस
बचपन का आर्थराइटिस
दुर्लभ रूमेटिक बीमारियां
ट्रेनी डॉक्टरों के लिए रूमेटोलॉजी क्विज का भी आयोजन किया गया, जिससे युवा रूमेटोलॉजिस्ट को अपने ज्ञान को परखने का मंच मिला।
रूमेटोलॉजी के लिए अहम प्लेटफॉर्म बना CRC2026
डॉ. सरथ चंद्र मौली वीरवल्ली ने कहा कि CRC2026 की सफलता और डॉक्टरों की उत्साहपूर्ण भागीदारी से वे बेहद खुश हैं। इस कॉन्फ्रेंस ने ज्ञान साझा करने, जटिल मामलों पर चर्चा करने और रूमेटिक बीमारियों की समझ को और बेहतर बनाने का अवसर दिया है।
उन्होंने बताया कि CRC के अगले संस्करण की तैयारी भी शुरू कर दी गई है, जो भविष्य में भी रूमेटोलॉजी के क्षेत्र में प्रोफेशनल डेवलपमेंट और ज्ञान-विस्तार का अहम मंच बना रहेगा।
❓ रूमेटोलॉजिस्ट क्या होता है?
रूमेटोलॉजिस्ट एक ऐसा इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉक्टर होता है, जिसने रूमेटोलॉजी में विशेष ट्रेनिंग ली होती है। यह चिकित्सा शाखा जोड़ों, हड्डियों, मांसपेशियों और ऑटोइम्यून बीमारियों के डायग्नोसिस और इलाज पर फोकस करती है। रूमेटोलॉजिस्ट लंबे समय तक रहने वाली सूजन और जोड़ों के दर्द को कंट्रोल करने में मदद करते हैं।
डिस्क्लेमर:
यह खबर केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी तरह के इलाज या सलाह को अपनाने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।











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