हाईकोर्ट में लंबित मामले पर प्रशासन को फटकार, 3000 बीघा जमीन वन विभाग के कब्जे में होने का दावा
मोरनी/पंचकूला, 28 मार्च 2026: हरियाणा के एकमात्र हिल स्टेशन मोरनी क्षेत्र में जमींदारों को उनकी पैतृक जमीनों का मालिकाना हक दिलाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ती नजर आ रही है। शिवालिक विकास मंच के प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय बंसल एडवोकेट ने दावा किया है कि संगठन पिछले करीब 25 वर्षों से इस मुद्दे को लेकर प्रशासनिक, सरकारी और न्यायिक स्तर पर लगातार संघर्ष कर रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
विजय बंसल ने कहा कि मोरनी क्षेत्र के हजारों लोग पीढ़ियों से जिन जमीनों पर खेती-बाड़ी और निवास कर रहे हैं, उन्हें आज तक कानूनी मालिकाना हक नहीं मिला है। इस कारण वे न केवल सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं, बल्कि हमेशा असुरक्षा की भावना में जीवन जीने को मजबूर हैं।
हाईकोर्ट में जनहित याचिका, प्रशासन को फटकार
उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में शिवालिक विकास मंच ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। हाल ही में कोर्ट ने मामले को लंबित रखने पर वन विभाग और प्रशासन को फटकार भी लगाई, जिसके बाद सरकार और प्रशासन हरकत में आया।
बंसल ने कहा कि जब तक मोरनी के लोगों को उनका हक नहीं मिल जाता, तब तक मंच अपना संघर्ष जारी रखेगा।
3000 बीघा जमीन वन विभाग के कब्जे में होने का दावा
विजय बंसल के अनुसार, पटवारियों द्वारा किए गए सर्वे में सामने आया है कि लगभग 3000 बीघा जमीन, जो स्थानीय किसानों की है, वह वन विभाग के कब्जे में है। उन्होंने कहा कि सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी से यह भी सामने आया कि सर्वे पर करीब 1.60 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन जमीन का स्पष्ट निर्धारण अब तक नहीं हो पाया।
उन्होंने बताया कि मोरनी क्षेत्र की करीब 6000 एकड़ जमीन का पुनः बंदोबस्त होना था, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते यह प्रक्रिया अधूरी रह गई।
1987 की रिपोर्ट पर अब तक कार्रवाई नहीं
विजय बंसल ने कहा कि तत्कालीन सरकार ने 1987 में कमिश्नर टीडी जोगपाल की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की थी, जिसने किसानों को मालिकाना हक देने की सिफारिश की थी। इस रिपोर्ट में ग्रामीणों को जंगल से लकड़ी, पानी, रास्ता, पशु चराई और पूजा स्थल जैसे छह अधिकार देने की बात भी शामिल थी।
बंसल ने मांग की कि इसी रिपोर्ट के आधार पर सरकार तुरंत कार्रवाई कर मोरनी के जमींदारों को उनका अधिकार दे।
पलायन को मजबूर हो रहे ग्रामीण
बंसल ने दावा किया कि जमीन का मालिकाना हक न मिलने और प्रशासनिक अड़चनों के कारण मोरनी के करीब 25-30 प्रतिशत लोग क्षेत्र छोड़कर अन्य शहरों और कस्बों में पलायन कर चुके हैं। इससे क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर भी नकारात्मक असर पड़ा है।
अवैध निर्माण और नोटिसों का जिक्र
उन्होंने बताया कि प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न विभागों द्वारा अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। जिला नगर एवं ग्राम योजना विभाग ने 139, वन विभाग ने 59 और लोक निर्माण विभाग ने 109 नोटिस जारी किए हैं।
हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि जब तक जमीन का बंदोबस्त पूरा नहीं हो जाता, तब तक बिना अनुमति कोई निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा।
प्रॉपर्टी डीलरों से सावधान रहने की अपील
विजय बंसल ने आरोप लगाया कि कुछ प्रॉपर्टी डीलर और उनके एजेंट लोगों को गुमराह कर रहे हैं और संगठन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं और एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ें।
30 वर्षों से सक्रिय है शिवालिक विकास मंच
बंसल ने बताया कि शिवालिक विकास मंच एक गैर-सरकारी संगठन है, जो पिछले लगभग 30 वर्षों से पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर जिलों के लोगों के हितों के लिए कार्य कर रहा है। संगठन अब तक 67 से अधिक जनहित याचिकाएं दायर कर चुका है और किसानों को फसल नुकसान मुआवजा, शिवालिक विकास बोर्ड का पुनर्गठन जैसी कई उपलब्धियां दिला चुका है।
सरकार से क्या है मांग
विजय बंसल ने अंत में सरकार से मांग की कि:
1987 की रिपोर्ट को लागू किया जाए
मोरनी के जमींदारों को जमीन का मालिकाना हक दिया जाए
ग्रामीणों को जंगल से जुड़े छह पारंपरिक अधिकार बहाल किए जाएं
उन्होंने कहा कि यह केवल जमीन का मुद्दा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य और अस्तित्व से जुड़ा सवाल है, जिस पर सरकार को जल्द ठोस निर्णय लेना चाहिए।












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