बाबूगिरी ब्यूरो
चंडीगढ़, 30 मार्च। पंजाब के हॉस्पिटैलिटी (खाद्य एवं पेय) क्षेत्र में बड़े स्तर पर टैक्स चोरी का खुलासा हुआ है। राज्य के वित्त, योजना, आबकारी एवं कर मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में करीब 200 करोड़ रुपये के टर्नओवर को छिपाने का मामला सामने आया है, जो आगे की जांच में बढ़कर 500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने राजस्व की सुरक्षा के लिए तकनीक-आधारित व्यापक अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत राज्यभर के ढाबों, रेस्टोरेंट्स, फास्ट-फूड आउटलेट्स, बेकरी, मिठाई की दुकानों और कैटरिंग सेवाओं सहित कुल 882 संस्थानों को जांच के दायरे में लाया गया है।
239 मामलों की जांच में 50 करोड़ का खुलासा, 2.02 करोड़ की वसूली
वित्त मंत्री ने बताया कि अब तक 239 मामलों की जांच पूरी की जा चुकी है, जिसमें लगभग 50 करोड़ रुपये के टर्नओवर को छिपाने का पता चला है। इस पर करीब 2.54 करोड़ रुपये का टैक्स बनता है, जिसमें से 2.02 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है, जबकि शेष राशि की वसूली जारी है।
उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और वित्त वर्ष 2023-24 तथा 2024-25 के डेटा को भी शामिल किया जा रहा है, जिससे यह घोटाला 500 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है।
बड़े स्तर पर आय छिपाने का संगठित पैटर्न उजागर
हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि जांच में आय कम दिखाने का एक व्यवस्थित और संगठित पैटर्न सामने आया है।
3 करदाताओं ने 2 करोड़ रुपये से अधिक का टर्नओवर छिपाया
6 करदाताओं ने 1 करोड़ रुपये से अधिक
18 करदाताओं ने 50 लाख रुपये से अधिक
26 करदाताओं ने 25 लाख रुपये से अधिक
91 करदाताओं ने 5 लाख रुपये से अधिक का टर्नओवर छिपाया
ढाबों से लेकर फास्ट-फूड चेन तक फैली टैक्स चोरी
जांच में यह भी सामने आया कि हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की जा रही थीं।
ढाबों द्वारा करीब 10 करोड़ रुपये की आय छिपाई गई
छोटे खाने-पीने के स्थान, चाय-कॉफी बार: लगभग 8 करोड़ रुपये
पिज्जा और फास्ट-फूड आउटलेट्स: 6 करोड़ रुपये से अधिक
वित्त मंत्री ने कहा कि नकद और हाइब्रिड (कैश + डिजिटल) भुगतान वाले व्यवसायों में इस तरह की गड़बड़ी ज्यादा देखने को मिली है।
मोहाली, जालंधर और लुधियाना बने टैक्स चोरी के केंद्र
जिलावार जांच में प्रमुख शहरी केंद्र टैक्स चोरी के हॉटस्पॉट के रूप में सामने आए हैं।
मोहाली: 8.16 करोड़ रुपये
जालंधर: 6.72 करोड़ रुपये
लुधियाना: 5.48 करोड़ रुपये
इसके अलावा पटियाला (3.83 करोड़ रुपये) और अमृतसर (0.99 करोड़ रुपये) में भी अनियमितताएं पाई गईं, हालांकि इनकी मात्रा अपेक्षाकृत कम रही।
डेटा एनालिटिक्स और ‘बिल लाओ, इनाम पाओ’ योजना बनी अहम हथियार
हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि इस बड़े खुलासे के पीछे एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स, टैक्स इंटेलिजेंस यूनिट और स्टेट इन्वेस्टिगेशन एंड प्रिवेंटिव यूनिट (SIPU) की अहम भूमिका रही है।
साथ ही ‘बिल लाओ, इनाम पाओ’ योजना के जरिए भी कर चोरी के मामलों की पहचान करने में मदद मिली है। विभाग ने ऑनलाइन बिलिंग एप्लिकेशन और जीएसटी रिटर्न का तुलनात्मक विश्लेषण कर संदिग्ध मामलों को चिन्हित किया।
52 संस्थान क्लीन चिट, संतुलित कार्रवाई का दावा
वित्त मंत्री ने बताया कि जांच के दौरान 52 संस्थानों में कोई अनियमितता नहीं पाई गई, जो इस बात का संकेत है कि कार्रवाई पूरी तरह डेटा-आधारित और निष्पक्ष है।
अब यूपीआई और डिजिटल लेन-देन की भी होगी जांच
सरकार अब यूपीआई और अन्य डिजिटल भुगतान के रिकॉर्ड को भी जांच में शामिल कर रही है, जिससे घोषित टर्नओवर और वास्तविक आय के बीच अंतर का सटीक पता लगाया जा सके।
सरकार की सख्त चेतावनी
हरपाल सिंह चीमा ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
उन्होंने कहा कि भगवंत सिंह मान सरकार तकनीक, डेटा एनालिटिक्स और फील्ड स्तर की जांच के माध्यम से राजस्व की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
साथ ही यह भी कहा गया कि ईमानदारी से कर चुकाने वाले व्यापारियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई तय है।











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