ट्रायल कोर्ट को दिए नए सिरे से सुनवाई के निर्देश, एडवोकेट मेनका गुप्ता की दलीलों से मिली राहत
बाबूगिरी ब्यूरो
चंडीगढ़, 30 मार्च: चेक बाउंस मामले में आरोपी को बड़ी राहत देते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 20% राशि अंतरिम मुआवजे के रूप में जमा कराने के आदेश को रद्द कर दिया है। यह आदेश निचली अदालत द्वारा दिया गया था, जिसे हाईकोर्ट ने अनुचित ठहराते हुए निरस्त कर दिया।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अमन चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि 20% राशि जमा कराना हर मामले में अनिवार्य नहीं है, बल्कि यह अदालत के विवेक पर निर्भर करता है।
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुईं एडवोकेट मेनका गुप्ता ने दलील दी कि उनके मुवक्किल की आर्थिक स्थिति कमजोर है, ऐसे में इतनी बड़ी राशि जमा कर पाना संभव नहीं है। अदालत ने इस तर्क को गंभीरता से लेते हुए निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया।
हाईकोर्ट ने साथ ही ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिए हैं कि वह मामले पर नए सिरे से विचार करे और सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए उचित फैसला सुनाए। फिलहाल, अंतरिम आदेश को बरकरार रखा गया है।
इस फैसले को चेक बाउंस मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर आरोपियों को राहत मिलने की उम्मीद है।











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