चंडीगढ़, 8 अप्रैल: चंडीगढ़ नगर निगम की हाउस मीटिंग बुधवार को उस समय पूरी तरह गरमा गई जब 116 करोड़ रुपये की कथित फर्जी एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) का मामला जोर-शोर से उठाया गया। कांग्रेस पार्षदों ने इस मुद्दे पर जमकर हंगामा किया और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। बैठक के दौरान कई बार नारेबाजी हुई, जिससे माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
कांग्रेस पार्षदों ने कहा कि इतनी बड़ी वित्तीय गड़बड़ी को किसी भी सूरत में दबाया नहीं जा सकता और पूरे मामले की सच्चाई जनता के सामने लाई जानी चाहिए।
वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
बैठक के दौरान कांग्रेस पार्षद सचिन गालव ने अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है, जबकि अकाउंट ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट रूप से सीबीआई जांच की मांग करते हुए सवाल उठाया कि निगरानी करने वाले बड़े अधिकारियों पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
अब तक दो कर्मचारियों पर ही कार्रवाई
निगम प्रशासन की ओर से अब तक केवल दो कर्मचारियों पर कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। इस पर पार्षदों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब पूरा वित्तीय सिस्टम वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में चलता है, तो उनकी जवाबदेही तय करना भी जरूरी है।
प्रशासन का जवाब—दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
सीनियर डिप्टी मेयर जस्मनप्रीत सिंह ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि पूरे प्रकरण की गहन जांच करवाई जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
भाजपा का व्हाइट पेपर, सियासी बयानबाजी तेज
वहीं भाजपा की ओर से इस पूरे मामले पर एक व्हाइट पेपर पेश किया गया, जिसमें तथ्यों और तारीखों के आधार पर अपनी स्थिति स्पष्ट की गई। पार्टी ने कहा कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
सेक्टर-45 तोड़फोड़ का मुद्दा भी गरमाया
बैठक के दौरान सेक्टर-45 में हाउसिंग बोर्ड द्वारा की जा रही तोड़फोड़ की कार्रवाई का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। खास बात यह रही कि इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा पार्षद एकजुट नजर आए। पार्षदों ने मौके पर जाकर विरोध करने और प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग करने का फैसला लिया।
मेयर सौरभ जोशी धरने पर बैठे
हंगामे के बीच मेयर सौरभ जोशी खुद धरने पर बैठ गए। उन्होंने साफ कहा कि जब तक हाउसिंग बोर्ड की कार्रवाई नहीं रोकी जाती, वह धरना समाप्त नहीं करेंगे।
पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके क्षेत्र में लोगों के घर तोड़े जा रहे हैं और पार्षदों को स्पष्ट करना चाहिए कि वे जनता के साथ हैं या नहीं।
इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों पर पक्षपात के आरोप भी लगे। इस पर मेयर ने कहा कि नगर निगम सभी के साथ खड़ा है और इस मुद्दे पर एक ऑल पार्टी कमेटी का गठन किया गया है, जो पूरे मामले की निगरानी करेगी।
कुल मिलाकर, 116 करोड़ की फर्जी एफडी और सेक्टर-45 तोड़फोड़ जैसे मुद्दों ने नगर निगम की बैठक को पूरी तरह राजनीतिक और टकरावपूर्ण बना दिया, जिससे आने वाले दिनों में इस मामले के और तूल पकड़ने के संकेत मिल रहे हैं।












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