पंचकूला, 8 अप्रैल। हरियाणा के बहुचर्चित पंचकूला नगर निगम एफडी फ्रॉड मामले में जांच तेज हो गई है। सेक्टर-11 स्थित Kotak Mahindra Bank के तत्कालीन मैनेजर पुष्पेंद्र सिंह ने बुधवार को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के समक्ष सरेंडर कर दिया। सरेंडर के समय उनके साथ वकीलों की टीम भी मौजूद रही। दूसरी ओर, मामले में पहले से गिरफ्तार नगर निगम के पूर्व सीनियर अकाउंट ऑफिसर विकास कौशिक को अदालत ने दो दिन के अतिरिक्त पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
आमने-सामने पूछताछ की तैयारी
एसीबी अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में अहम कदम उठाते हुए पुष्पेंद्र सिंह और विकास कौशिक को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि इस दौरान बैंकिंग प्रक्रिया, तकनीकी खामियों और करोड़ों रुपये के लेन-देन से जुड़े कई महत्वपूर्ण राज सामने आ सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि घोटाले की रकम किन-किन खातों में ट्रांसफर हुई और किन लोगों को इसका लाभ मिला।
फर्जी खातों से करोड़ों का खेल
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से नगर निगम पंचकूला के नाम पर फर्जी बैंक खाते खोलकर इस घोटाले को अंजाम दिया।
मई 2020 में पहला फर्जी खाता (2015073031) खोला गया।
इस खाते के दस्तावेजों में विकास कौशिक ने नगर निगम के कमिश्नर और सीनियर अकाउंट ऑफिसर की मोहरें लगाईं। इन पर तत्कालीन आयुक्त सुमेधा कटारिया और सीनियर अकाउंट ऑफिसर सुशील कुमार के जाली हस्ताक्षर किए गए।
इसके बाद जून 2022 में दूसरा फर्जी खाता (2046279112) खोला गया।
इस बार भी दस्तावेजों में हेराफेरी करते हुए विकास कौशिक ने खुद को अधिकृत अधिकारी दिखाया और दूसरे सिग्नेचर में नगर निगम के डीएमसी की फर्जी मोहर लगाई गई। इस मोहर पर तत्कालीन डीएमसी दीपक सूरी के जाली हस्ताक्षर किए गए।
बैंकिंग सिस्टम की खामियां भी जांच के दायरे में
इस मामले ने बैंकिंग प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एसीबी यह जांच कर रही है कि इतनी बड़ी वित्तीय हेराफेरी बिना आंतरिक जांच और सत्यापन के कैसे संभव हुई। बैंक के अंदरूनी सिस्टम, केवाईसी प्रक्रिया और दस्तावेज सत्यापन में हुई लापरवाही भी जांच के घेरे में है।
बड़े व्यापारियों और बिल्डर्स तक पहुंच सकती है जांच
एसीबी अधिकारियों का मानना है कि यह घोटाला सिर्फ दो लोगों तक सीमित नहीं है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि इसमें कुछ बड़े व्यापारी और बिल्डर्स भी शामिल हो सकते हैं। रिमांड के दौरान पैसों के ट्रेल को खंगालते हुए इन लोगों की भूमिका सामने आ सकती है।
आगे क्या?
जांच एजेंसी दोनों आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही है और डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन और दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां तथा बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
यह मामला न सिर्फ नगर निगम की कार्यप्रणाली बल्कि बैंकिंग सिस्टम की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।











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