बाबूगिरी हिंदी न्यूज़
चंडीगढ़: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (यूएचबीवीएनएल) के अधीक्षण अभियंता गीतू राम तंवर को बड़ा झटका देते हुए सांप्रदायिक टिप्पणी मामले में उनकी दूसरी अग्रिम जमानत yाचिका खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जांच के दौरान सामने आई सामग्री से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि एक विशेष समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियां की गई थीं और याची उस बातचीत में सक्रिय रूप से शामिल था।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि समाज में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना बेहद जरूरी है और किसी भी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा इस तरह की कथित टिप्पणियां गंभीर मामला हैं। कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर अग्रिम जमानत दिए जाने से जांच प्रभावित हो सकती है।
जानकारी के अनुसार, गीतू राम तंवर के खिलाफ सोशल मीडिया अथवा एक ग्रुप बातचीत में कथित रूप से सांप्रदायिक और भड़काऊ टिप्पणियां करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि बातचीत के दौरान एक समुदाय विशेष के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका पैदा हुई।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और उनका किसी प्रकार से सांप्रदायिक तनाव फैलाने का इरादा नहीं था। वहीं राज्य पक्ष ने अदालत को बताया कि जांच में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और बातचीत के रिकॉर्ड सामने आए हैं, जिनसे आरोपी की सक्रिय भूमिका दिखाई देती है। राज्य सरकार ने यह भी कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी से पूछताछ आवश्यक है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने दूसरी अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड और जांच की वर्तमान स्थिति को देखते हुए इस चरण पर राहत देने का कोई आधार नहीं बनता। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच जारी रहेगी और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद जांच एजेंसियों के लिए आरोपी से पूछताछ का रास्ता साफ हो गया है। वहीं इस आदेश को सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर सांप्रदायिक एवं आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामलों में सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।













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