बाबूगिरी हिंदी न्यूज़
नई दिल्ली, 25 मई: अलका लांबा को दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 2024 में महिला आरक्षण मुद्दे पर जंतर-मंतर में हुए प्रदर्शन के दौरान निषेधाज्ञा उल्लंघन मामले में दोषी करार दिया है। एडिशनल चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार की अदालत ने मामले में सजा पर सुनवाई के लिए 5 जून की तारीख तय की है। कोर्ट ने 4 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
अदालत ने इससे पहले 14 जनवरी को अलका लांबा के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए थे। उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदर्शन से जुड़े वीडियो फुटेज का भी अवलोकन किया, जिसमें उन्हें पुलिस कार्रवाई में बाधा डालते और प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड पार करने के लिए प्रेरित करते हुए देखा गया।
यह मामला 29 जुलाई 2024 को जंतर-मंतर पर महिला कांग्रेस द्वारा महिला आरक्षण को लेकर आयोजित प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान अलका लांबा मुख्य वक्ता थीं। दिल्ली पुलिस ने उस दिन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर रखी थी।
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने टॉलस्टॉय मार्ग पर लगाए गए बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश की और संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया। आरोप है कि अलका लांबा और उनके समर्थकों ने पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की तथा सड़क जाम कर दी। पुलिस द्वारा कई बार चेतावनी देने और प्रदर्शन समाप्त करने की अपील के बावजूद प्रदर्शनकारी नहीं माने, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया।
घटना के बाद सब-इंस्पेक्टर अनीता सिंह की शिकायत पर अलका लांबा और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।













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