बाबूगिरी हिंदी न्यूज़
चंडीगढ़। आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग ने यूटी इंजीनियरिंग विभाग में आरटीआई अपील की सुनवाई में हुई 13 महीने की देरी पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने बताया कि 24 अप्रैल 2025 को दायर की गई आरटीआई अपील की सुनवाई अब 1 जून 2026 को तय की गई है। उनका कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन इतनी लंबी देरी इसके मूल उद्देश्य को कमजोर करती है।
आरके गर्ग ने कहा कि जब जनहित से जुड़े मामलों और सूचना मांगने वाली अपीलों को लंबे समय तक लंबित रखा जाता है, तो उनकी प्रासंगिकता और प्रभाव धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है। इससे नागरिकों में निराशा बढ़ती है और प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा भी प्रभावित होता है।
उन्होंने यूटी इंजीनियरिंग विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि प्रक्रियात्मक देरी के कारण कई महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दे दब जाते हैं।
आरके गर्ग ने कहा कि “सूचना में देरी, पारदर्शिता से इनकार के समान है।” उनका मानना है कि आरटीआई मामलों की समयबद्ध सुनवाई सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है, ताकि आम नागरिकों का विश्वास बना रहे।













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