चंडीगढ़ के मेयर के ‘चपरासी ज्यादा पावरफुल हैं’ बयान पर नागरिकों की प्रतिक्रिया; जन सरोकारों से जुड़े आर.के. गर्ग बोले- प्रथम नागरिक के पद की गरिमा के अनुरूप नहीं ऐसी टिप्पणी
चंडीगढ़, 6 जून। चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर द्वारा हाल ही में ऋषिकेश में आयोजित एक बैठक के दौरान दिया गया बयान इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। मेयर के इस कथन कि “चपरासी उनसे ज्यादा पावरफुल हैं” पर अब शहर के विभिन्न वर्गों से प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। इसी क्रम में चंडीगढ़ निवासी एवं जन सरोकारों से जुड़े नागरिक आर.के. गर्ग ने मेयर के बयान को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे मेयर पद की गरिमा के विपरीत बताया है।
आर.के. गर्ग ने जारी अपने वक्तव्य में कहा कि चंडीगढ़ जैसे प्रतिष्ठित शहर के मेयर को लोकतांत्रिक व्यवस्था में “प्रथम नागरिक” का दर्जा प्राप्त है। ऐसे में यदि मेयर स्वयं सार्वजनिक मंच से यह कहें कि एक कनिष्ठ कर्मचारी उनसे अधिक शक्तिशाली है, तो यह न केवल पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है बल्कि प्रशासनिक नेतृत्व पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी शहर का मेयर केवल एक राजनीतिक पदाधिकारी नहीं होता, बल्कि वह नगर निगम की लोकतांत्रिक व्यवस्था का प्रमुख चेहरा होता है। जनता उससे शहर के विकास, समस्याओं के समाधान और प्रभावी नेतृत्व की अपेक्षा करती है। यदि कोई मेयर स्वयं को व्यवस्था में कमजोर और असहाय बताता है, तो इससे आम नागरिकों का संस्थाओं पर विश्वास भी प्रभावित होता है।
नेतृत्व क्षमता पर उठे सवाल
आर.के. गर्ग का कहना है कि यदि वास्तव में ऐसी स्थिति है कि कनिष्ठ कर्मचारी निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं, तो यह प्रशासनिक नेतृत्व की विफलता का संकेत है। वहीं यदि यह टिप्पणी केवल सुर्खियां बटोरने या चर्चा में बने रहने के उद्देश्य से की गई है, तो यह और भी दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि किसी सार्वजनिक मंच पर शहर की चुनौतियों, विकास योजनाओं और नागरिक सुविधाओं पर गंभीर चर्चा होने की अपेक्षा रहती है। लेकिन यदि वहां इस प्रकार की टिप्पणियां प्रमुखता से सामने आती हैं, तो इससे शहर की संस्थागत छवि को नुकसान पहुंचता है।
शहर के सामने कई गंभीर चुनौतियां
गर्ग ने कहा कि वर्तमान समय में चंडीगढ़ कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना कर रहा है। पार्किंग व्यवस्था, सफाई व्यवस्था, बढ़ता वित्तीय दबाव, संपत्ति कर से जुड़े विवाद, आधारभूत सुविधाओं का विस्तार और नगर निगम की आर्थिक स्थिति जैसे अनेक मुद्दे जनता के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
ऐसे समय में नागरिकों की अपेक्षा है कि नगर निगम का नेतृत्व इन समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए और सकारात्मक परिणाम सामने लाए। उन्होंने कहा कि शहर को बयानबाजी नहीं बल्कि प्रभावी प्रशासन और दूरदर्शी नेतृत्व की आवश्यकता है।
“शिकायत नहीं, समाधान का मंच है मेयर पद”
आर.के. गर्ग ने अपने बयान में कहा कि मेयर का पद केवल समस्याओं और शिकायतों को सार्वजनिक रूप से गिनाने का मंच नहीं है, बल्कि यह समाधान खोजने और प्रशासनिक तंत्र को दिशा देने की जिम्मेदारी का पद है। यदि किसी स्तर पर प्रशासनिक अड़चनें हैं तो उन्हें संस्थागत प्रक्रिया के माध्यम से दूर करने का प्रयास होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंचों पर अपने ही पद की सीमाओं का इस प्रकार उल्लेख करना अंततः नगर निगम और शहर दोनों की छवि को प्रभावित करता है।
नागरिकों की अपेक्षा: गरिमापूर्ण और जिम्मेदार नेतृत्व
गर्ग ने कहा कि चंडीगढ़ के नागरिक अपने प्रथम नागरिक से परिपक्वता, संतुलन और जिम्मेदार नेतृत्व की अपेक्षा रखते हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी पद का सम्मान केवल अधिकारों से नहीं, बल्कि उस पद पर बैठे व्यक्ति के आचरण, दृष्टिकोण और कार्यशैली से निर्धारित होता है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में शहर का प्रतिनिधित्व करते समय अधिक गंभीरता, जिम्मेदारी और संस्थागत गरिमा का ध्यान रखा जाएगा ताकि चंडीगढ़ की प्रतिष्ठा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख मजबूत बनी रहे।
(यह बयान चंडीगढ़ निवासी एवं जन सरोकारों से जुड़े नागरिक आर.के. गर्ग द्वारा जारी किया गया है।)













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