June 13, 2026 9:26 pm

June 13, 2026 9:26 pm

PANCHKULA NEWS: गंगासागर से अयोध्या धाम तक 11 दिवसीय धार्मिक यात्रा पूरी कर लौटे वरिष्ठ नागरिक

श्रद्धा और आध्यात्मिक अनुभवों से हुए भाव-विभोर
बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
पंचकूला/चंडीगढ़। सीनियर सिटीजन काउंसिल के सदस्यों ने भारत गौरव ट्रेन के माध्यम से आयोजित 11 दिवसीय धार्मिक यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर ली। गंगासागर, बैद्यनाथ धाम, काशी विश्वनाथ, गया जी, बोधगया, पुरी जगन्नाथ और अयोध्या धाम जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों के दर्शन कर श्रद्धालु गुरुवार रात करीब 9:30 बजे पंचकूला-चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन लौटे। यात्रा से लौटे वरिष्ठ नागरिकों ने इसे जीवन का अविस्मरणीय और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध अनुभव बताया।
सीनियर सिटीजन काउंसिल के मीडिया सदस्य सुनील मिनोचा ने बताया कि इस विशेष धार्मिक यात्रा में देश के विभिन्न राज्यों से 400 से अधिक वरिष्ठ नागरिक शामिल हुए थे, जबकि पंचकूला से लगभग 15 सदस्य इस यात्रा का हिस्सा बने। सभी श्रद्धालु सुरक्षित और सुखद अनुभवों के साथ वापस लौटे।
उन्होंने बताया कि धार्मिक यात्राओं में समय की पाबंदी, लगातार आवागमन और विभिन्न स्थलों तक पहुंचने की भागदौड़ जरूर रहती है, लेकिन यदि मन में श्रद्धा और प्रभु के प्रति अटूट विश्वास हो तो सारी कठिनाइयां सहज प्रतीत होती हैं। उन्होंने कहा कि दृढ़ निश्चय और भक्ति भाव के साथ यात्रा करने पर सभी तीर्थों के दर्शन सुगमता से हो जाते हैं।

पंचकूला के कई वरिष्ठ नागरिक रहे यात्रा का हिस्सा
इस यात्रा में पंचकूला से अश्विनी अरोड़ा, उषा अरोड़ा, सुरेंद्र सेठी, कमलेश सेठी, रमा वालिया, प्रभा भल्ला, निधि भल्ला, गोपाल कृष्ण गुप्ता, नीलम रानी, राजा जी सहित कई वरिष्ठ नागरिक शामिल रहे। यात्रियों ने बताया कि यात्रा के दौरान आपसी भाईचारा, भजन-कीर्तन और धार्मिक चर्चा ने पूरे माहौल को भक्तिमय बनाए रखा।

यात्रियों के लिए उत्कृष्ट व्यवस्थाएं
सुनील मिनोचा ने बताया कि भारत गौरव ट्रेन में वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया। प्रतिदिन अलग-अलग प्रकार का सुपाच्य और पौष्टिक भोजन आधुनिक रसोई में तैयार कर परोसा जाता था। ट्रेन और ठहराव स्थलों पर सुबह-शाम सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी।
उन्होंने बताया कि यात्रा में 90 वर्ष से अधिक आयु के श्रद्धालु भी शामिल थे। कुछ लोग अकेले यात्रा कर रहे थे, जबकि कुछ श्रद्धालु व्हीलचेयर की सहायता से अपने जीवनसाथी के साथ इस धार्मिक यात्रा का आनंद ले रहे थे। यह दृश्य सभी यात्रियों के लिए प्रेरणादायक रहा।

पुरी जगन्नाथ से शुरू हुई तीर्थ यात्रा
यात्रा का पहला प्रमुख पड़ाव पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर रहा, जहां श्रद्धालुओं ने दर्शन कर यात्रा का शुभारंभ किया। इसके बाद सभी यात्रियों को बसों के माध्यम से गंगासागर ले जाया गया।
गंगासागर के महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रचलित कहावत है— “सारे तीर्थ बार-बार, गंगासागर एक बार।” यहां पहुंचकर श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक शांति का अनुभव किया और पवित्र स्थल के दर्शन किए।

कालीघाट, बोधगया और गया जी में किया दर्शन-पूजन
गंगासागर से लौटने के बाद यात्रियों ने कोलकाता स्थित प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर में माता काली के दर्शन किए। इसके बाद यात्रा बोधगया पहुंची, जहां महात्मा बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। श्रद्धालुओं ने महाबोधि मंदिर और उस पवित्र पीपल वृक्ष का भी दर्शन किया जिसके नीचे भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया था।
गया जी में यात्रियों को फाल्गु नदी तट पर अपने पितरों की स्मृति में पूजा-अर्चना और पिंडदान करने का अवसर मिला। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीराम और माता सीता ने भी यहां अपने पूर्वजों के मोक्ष हेतु पूजा की थी।

बैद्यनाथ धाम और काशी विश्वनाथ में उमड़ी आस्था
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने झारखंड स्थित प्रसिद्ध बैद्यनाथ धाम में भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए। धार्मिक कथाओं के अनुसार रावण इस शिवलिंग को लंका ले जाना चाहता था, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका और यह पवित्र स्थल आज बैद्यनाथ धाम के रूप में स्थापित है।
इसके बाद श्रद्धालु वाराणसी पहुंचे, जहां उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए। गंगा नदी में स्नान करने के साथ-साथ घाटों के बीच स्टीमर यात्रा का भी आनंद लिया। श्रद्धालुओं ने बताया कि बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर मन अत्यंत प्रसन्न और कृतार्थ हो गया।

अयोध्या धाम की भव्यता ने किया मंत्रमुग्ध
यात्रा का अंतिम प्रमुख पड़ाव अयोध्या धाम रहा। यहां रामलला के दर्शन और भव्य राम मंदिर को देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। सुनील मिनोचा ने बताया कि लगभग तीन वर्ष पहले जब वे अयोध्या आए थे, तब मंदिर निर्माण कार्य चल रहा था और श्रद्धालुओं को धूल-मिट्टी से होकर गुजरना पड़ता था। उस समय बड़ी संख्या में कारीगर निर्माण कार्य में जुटे हुए थे।
उन्होंने कहा कि इतने कम समय में भव्य और विशाल राम मंदिर का निर्माण किसी चमत्कार से कम नहीं लगता। अयोध्या में श्रद्धालुओं ने पहले हनुमानगढ़ी जाकर दर्शन किए और फिर रामलला के दर्शन के लिए पहुंचे। यहां की धार्मिक परंपराओं और व्यवस्थाओं ने सभी को प्रभावित किया।

भजन-कीर्तन और नई मित्रताओं ने बनाया यादगार सफर
यात्रा के दौरान ट्रेन में नियमित रूप से भजन-कीर्तन, धार्मिक चर्चाएं और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित होती रहीं। विभिन्न राज्यों से आए वरिष्ठ नागरिकों के बीच नई मित्रताएं बनीं और आपसी अनुभवों का आदान-प्रदान हुआ।
सुनील मिनोचा ने कहा कि ऐसी यात्राएं केवल धार्मिक आस्था को ही नहीं बढ़ातीं, बल्कि जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता भी भरती हैं। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों से जीवन में सक्रिय रहने और समय-समय पर धार्मिक एवं सामाजिक यात्राओं में भाग लेने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि यात्रा की सबसे बड़ी सीख यही है कि जीवन में चलते-फिरते रहना चाहिए, क्योंकि यात्रा ही अनुभव, ज्ञान और आत्मिक शांति का सबसे बड़ा माध्यम है।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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