विजय बंसल ने केंद्र और हरियाणा सरकार को भेजा ज्ञापन
रमेश गोयत
पंचकूला/पिंजौर, 6 जून 2026। शिवालिक विकास मंच के प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय बंसल एडवोकेट ने एचएमटी पिंजौर में वर्षों से बंद पड़े टेक्निकल ट्रेनिंग सेंटर को पुनः शुरू कर उसे तकनीकी विश्वविद्यालय (टेक्निकल यूनिवर्सिटी) का दर्जा देने की मांग उठाई है। इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी, केंद्रीय भारी उद्योग विभाग के सचिव, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तथा हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (तकनीकी शिक्षा) को ज्ञापन भेजा है।
विजय बंसल ने कहा कि पिंजौर स्थित एचएमटी परिसर में वर्ष 1963 में लगभग पांच एकड़ भूमि पर टेक्निकल ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना की गई थी। शुरुआती दौर में यहां एचएमटी के कर्मचारियों और अधिकारियों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाता था, लेकिन वर्ष 1971 में इस केंद्र को आम विद्यार्थियों के लिए भी खोल दिया गया। इसके बाद यह संस्थान तकनीकी शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया था।
उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण केंद्र में अप्रेंटिसशिप एक्ट-1961 के तहत विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाता था, जिसके प्रमाणपत्र को देश और विदेश में मान्यता प्राप्त थी। यहां आईटीआई उत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए एक वर्षीय तथा अन्य विद्यार्थियों के लिए तीन वर्षीय मैकेनिकल फिटर और अन्य तकनीकी पाठ्यक्रम संचालित किए जाते थे। इस संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त कर हजारों युवाओं ने विभिन्न सरकारी और निजी क्षेत्रों में रोजगार हासिल किया।

विजय बंसल ने कहा कि वर्ष 2013 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान शिवालिक विकास मंच के प्रयासों से तत्कालीन केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी के माध्यम से इस ट्रेनिंग सेंटर के आधुनिकीकरण के लिए दो करोड़ रुपये की अनुदान राशि मंजूर करवाई गई थी। इस राशि से आधुनिक मशीनें, प्रशिक्षण हॉल और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित की गई थीं, जिससे संस्थान को उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र के रूप में तैयार किया गया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में केंद्र सरकार द्वारा एचएमटी ट्रैक्टर प्लांट को बंद करने का निर्णय लिए जाने के बाद इस ट्रेनिंग सेंटर को भी धीरे-धीरे बंद कर दिया गया। वर्तमान में यहां की अत्याधुनिक मशीनरी उपयोग के अभाव में जंग खा रही है। जबकि यह प्रशिक्षण केंद्र एचएमटी मशीन टूल्स के अधीन संचालित होता था और इसका ट्रैक्टर प्लांट से प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।
विजय बंसल ने बताया कि वर्ष 2005 में एचएमटी प्रबंधन ने इस ट्रेनिंग सेंटर को विश्वविद्यालय स्तर का संस्थान बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। इसके लिए तकनीकी शिक्षा विभाग से भी मंजूरी मांगी गई थी, लेकिन विभाग ने पहले केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय से स्वीकृति लेने की बात कही थी। इसके बाद यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस संस्थान को तकनीकी विश्वविद्यालय का दर्जा देती है तो नई यूनिवर्सिटी स्थापित करने के लिए न तो करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ेंगे और न ही भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता होगी। एचएमटी परिसर में पहले से ही विश्वविद्यालय स्तर का बुनियादी ढांचा, आधुनिक मशीनरी, भवन और प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध हैं।
विजय बंसल ने दावा किया कि यहां स्थापित सीएनसी जैसी अत्याधुनिक मशीनें आज भी तकनीकी शिक्षा के लिए उपयोगी हैं और कई संस्थानों में ऐसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा एचएमटी पिंजौर रेलवे और सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है तथा राजधानी चंडीगढ़ के निकट स्थित है, जिससे यह तकनीकी शिक्षा के लिए आदर्श स्थान बन सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि यहां तकनीकी विश्वविद्यालय स्थापित किया जाता है तो इससे हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत के युवाओं को उच्च स्तरीय तकनीकी शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे। सरकार को केवल इसे तकनीकी विश्वविद्यालय का दर्जा देने की घोषणा करनी होगी, क्योंकि आवश्यक आधारभूत ढांचा पहले से ही मौजूद है।













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