चंडीगढ़ सहकारी बैंक के एमडी IAS व PCS अधिकारी RCS
रमेश गोयत
चंडीगढ़ | 06 जून 2026। चंडीगढ़ के सहकारिता क्षेत्र, विशेषकर चंडीगढ़ स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (CSCB) और सहकारिता विभाग के प्रशासनिक ढांचे को लेकर इन दिनों कई गंभीर प्रशासनिक विसंगतियों, पदस्थापना विवादों और संचालन संबंधी सवालों पर चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों एवं विभागीय जानकारी के आधार पर कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनमें प्रोटोकॉल, अधिकार क्षेत्र और प्रशासनिक संरचना को लेकर असमंजस की स्थिति बताई जा रही है
प्रशासनिक संरचना और पदस्थापना पर सवाल
सूत्रों के अनुसार चंडीगढ़ सहकारी बैंक में हाल ही में अनुराधा चगति (CCS) एवं कार्तिकेय (IAS) की तैनाती को लेकर प्रशासनिक स्तर पर चर्चा बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर सहकारिता विभाग के सर्वोच्च प्रशासनिक प्राधिकारी माने जाने वाले रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ (RCS) के पद पर एक PCS अधिकारी की तैनाती को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
विभागीय व्यवस्था के अनुसार RCS को सहकारिता विभाग की शीर्ष प्रशासनिक/नियामक संस्था माना जाता है, जिसके अंतर्गत बैंक के प्रबंध निदेशक (MD) के निर्णयों पर अपील भी सुनी जाती है। ऐसे में वरिष्ठता और पदक्रम (hierarchy) को लेकर असंतुलन की स्थिति पर चर्चा हो रही है।

जूनियर–सीनियर प्रोटोकॉल को लेकर असंतोष
सूत्रों का कहना है कि चंडीगढ़ प्रशासन में कई मामलों में IAS, PCS और HCS अधिकारियों के बीच स्पष्ट प्रोटोकॉल व्यवस्था का पालन पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। आरोप है कि कुछ परिस्थितियों में वरिष्ठ अधिकारियों को कनिष्ठ अधिकारियों के अधीन कार्य करना पड़ रहा है, जिससे प्रशासनिक असंतोष की स्थिति बन रही है।
यह भी चर्चा में है कि इस असंतुलन के चलते कुछ HCS अधिकारियों को समय से पहले ही अपनी तैनाती छोड़नी पड़ी।
सहकारिता विभाग में कानूनी ढांचे को लेकर भ्रम
जानकारी के अनुसार चंडीगढ़ के सहकारिता विभाग में अब तक पंजाब सहकारी सोसाइटी अधिनियम लागू बताया जाता है। इसी कारण कई प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं में असमानता और भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
इसी ढांचे के कारण बैंकिंग और सहकारिता प्रशासन के बीच अधिकारों की स्पष्ट रेखा तय नहीं होने के आरोप भी सामने आए हैं।
RCS की भूमिका और अधिकार क्षेत्र पर चर्चा
सहकारी ढांचे में RCS कार्यालय को सर्वोच्च अपीलीय प्राधिकरण माना जाता है, जहां बैंक के प्रबंध निदेशक (MD) के निर्णयों के खिलाफ अपील दायर की जाती है।
हालांकि प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस व्यवस्था में भी स्पष्ट समन्वय की कमी देखी जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि कई मामलों में सहायक रजिस्ट्रार स्तर पर अत्यधिक शक्तियों के केंद्रीकरण से निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
पूर्व प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव पर सवाल
सूत्रों का कहना है कि पहले RCS का प्रभार जिला उपायुक्त (DC) के पास होता था, जिसे बाद में प्रशासनिक निर्णय के तहत बदला गया। इस बदलाव को लेकर भी प्रशासनिक हलकों में अलग-अलग मत सामने आते रहे हैं।
इसी बदलाव को वर्तमान में प्रशासनिक असंतुलन और संरचनात्मक जटिलताओं का एक कारण बताया जा रहा है।
बैंक प्रशासन और पूर्व एमडी से जुड़ी स्थिति
सूत्रों के अनुसार हाल ही में बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक (MD) ने पद छोड़ दिया, जिसके पीछे प्रशासनिक असंतुलन और वरिष्ठता विवाद को एक कारण बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पूर्व एमडी ने बेक की कई समस्याओं बारे आरसीएस को भी लिखत में शिकायत की हुई है। जिसमे बैक के कुछ डायरेक्टर भी बैक लोन में डिफाल्टर बताए जा रहे है, जिस प्रोजेक्ट के लिए लोन लिए वह मौके पर ही नही है।
यह भी चर्चा में है कि पूर्व एमडी, RCS पद की वरिष्ठता संरचना से असंतुष्ट थीं, जिसके कारण उन्होंने कार्यभार से हटने का निर्णय लिया।

चंडीगढ़ स्टेट कोऑपरेटिव बैंक की वर्तमान स्थिति
बैंक प्रशासन के जीएम हरदीप सिंह की जानकारी के अनुसार वर्तमान में बैंक संरचना इस प्रकार है—
चेयरमैन: झुजार सिंह बटेडी
निदेशक मंडल: कुल 12 निदेशक (जिनमें 2 प्रशासन द्वारा नामित)
शाखाएँ: 18
कुल कर्मचारी: 103
62 नियमित कर्मचारी
41 आउटसोर्स कर्मचारी (कुछ निदेशकों से जुड़े रिश्तेदार होने के आरोप चर्चा में)
वाहन: 4 (2 चालू, 2 निष्क्रिय)
स्वयं की इमारतें: 4 शाखाओं के पास स्वामित्व भवन
लोन, परियोजनाओं और डिफॉल्ट को लेकर आरोप
सूत्रों के अनुसार बैंक के कुछ निदेशकों पर ऋण डिफॉल्ट और संदिग्ध परियोजनाओं से जुड़े मामलों को लेकर भी शिकायतें दर्ज हैं। आरोप है कि जिन परियोजनाओं के लिए ऋण लिया गया, वे जमीनी स्तर पर मौजूद नहीं पाए गए या क्रियान्वित नहीं हुए।
इन मामलों की शिकायतें RCS कार्यालय को भी भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
आंतरिक विवाद और प्रशासनिक दबाव
सूत्रों का यह भी कहना है कि बैंक के भीतर भर्ती और नियुक्तियों को लेकर निदेशकों एवं अधिकारियों के बीच विवाद की स्थिति बनी रहती है, जिससे संस्थागत कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है।
चंडीगढ़ सहकारिता तंत्र में वर्तमान स्थिति प्रशासनिक संरचना, पदक्रम (hierarchy), कानूनी ढांचे और बैंकिंग संचालन के बीच समन्वय की कमी को उजागर करती है। हालांकि सभी मामलों की पुष्टि जांच एवं आधिकारिक रिपोर्ट पर निर्भर करती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियां सहकारिता प्रशासन में सुधार और स्पष्ट नीति निर्धारण की आवश्यकता को दर्शाती हैं।












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