June 15, 2026 4:55 pm

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HARYANA NEWS: शिशु मृत्यु दर में हरियाणा राष्ट्रीय औसत के बराबर, पंजाब से अधिक तेज सुधार दर्ज

राज्य ने पांच वर्षों में शिशु मृत्यु दर में 14 प्रतिशत की कमी की; नवजात एवं मातृ देखभाल अवसंरचना को किया जा रहा सुदृढ़
 
बाबूगिरी हिंदी न्यूज़
चंडीगढ़, 6 जून। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) रिपोर्ट 2024 के अनुसार, हरियाणा ने बाल स्वास्थ्य परिणामों में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है, जिसमें राज्य की शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) घटकर प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 24 मृत्यु रह गई है।

यह उपलब्धि हरियाणा को राष्ट्रीय औसत के बराबर स्थापित करती है और राज्यभर में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में हुए निरंतर सुधार को दर्शाती है।

यह जानकारी साझा करते हुए हरियाणा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि राज्य मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं में केंद्रित हस्तक्षेपों के माध्यम से प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों में लगातार सुधार कर रहा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा का प्रदर्शन स्वास्थ्य अवसंरचना और सामुदायिक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतर निवेश की प्रभावशीलता को प्रदर्शित करता है।

नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले पांच वर्षों में हरियाणा की शिशु मृत्यु दर 28 से घटकर 24 हो गई है, जो लगभग 14 प्रतिशत की कमी को दर्शाती है। इसी अवधि में पंजाब की शिशु मृत्यु दर 18 से घटकर 16 हुई है, जो लगभग 11 प्रतिशत सुधार है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि अधिक और सघन आबादी को सेवाएं प्रदान करने से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद हरियाणा ने कमी की अधिक तेज गति हासिल की है।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि हरियाणा अब शिशु मृत्यु दर के मामले में राष्ट्रीय औसत तक पहुंच गया है और शिशु मृत्यु में कमी लाने की दिशा में लगातार प्रगति कर रहा है।

उन्होंने कहा कि यद्यपि अक्सर छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ तुलना की जाती है, फिर भी राज्य के आकार, जनसंख्या घनत्व और स्वास्थ्य सेवा वितरण से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए हरियाणा की उपलब्धियां महत्वपूर्ण हैं।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि हरियाणा का प्रदर्शन कई बड़े राज्यों की तुलना में अनुकूल है, जहां शिशु मृत्यु दर अभी भी काफी अधिक है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में शिशु मृत्यु दर लगभग 35 है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह दर प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर लगभग 36 है।

इस सुधार का श्रेय हरियाणा सरकार द्वारा नवजात एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए उठाए गए अनेक कदमों को दिया गया है। इनमें स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट्स (एसएनसीयू), न्यूबॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट्स (एनबीएसयू), न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर्स (एनआरसी), न्यूबॉर्न बेबी केयर कॉर्नर्स (एनबीसीसी), कंगारू मदर केयर (केएमसी) सुविधाएं, हाइब्रिड एचडीयू-आईसीयू यूनिट्स, कॉम्प्रिहेंसिव लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर्स (सीएलएमसी), लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट्स (एलएमयू), जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम तथा होम-बेस्ड न्यूबॉर्न केयर सेवाओं का विस्तार शामिल है।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि संस्थागत प्रसव में सुधार, बेहतर नवजात देखभाल और सुदृढ़ स्वास्थ्य अवसंरचना के कारण राज्य में नवजात एवं शिशु मृत्यु दर में निरंतर कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रसव पूर्व देखभाल सेवाओं में और सुधार, सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने तथा सरकारी अस्पतालों में नवजात गहन चिकित्सा सुविधाओं के उन्नयन पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

प्रगति को और गति देने के लिए हरियाणा राज्यभर में अतिरिक्त एसएनसीयू, एनबीएसयू, एनआरसी और लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट्स स्थापित करने की योजना बना रहा है। मौजूदा एसएनसीयू को भी मातृ एवं नवजात देखभाल इकाइयों (एमएनसीयू) में उन्नत किया जा रहा है, ताकि माताओं और नवजात शिशुओं को एक ही छत के नीचे एकीकृत देखभाल प्रदान की जा सके।

हालांकि कुछ ग्रामीण क्षेत्रों और पूर्वी हरियाणा के कुछ हिस्सों में शिशु मृत्यु दर अब भी चुनौती बनी हुई है, डॉ. मिश्रा ने कहा कि राज्य की दीर्घकालिक प्रगति की दिशा उत्साहजनक बनी हुई है।

पिछले एक दशक में हरियाणा ने अपनी शिशु मृत्यु दर को प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 41 से घटाकर 24 कर लिया है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच में हुए निरंतर सुधार को दर्शाता है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर सुदृढ़ करने तथा जमीनी स्तर पर केंद्रित क्रियान्वयन के माध्यम से हरियाणा आने वाले वर्षों में और बेहतर परिणाम हासिल करेगा तथा यह सुनिश्चित करेगा कि अधिक से अधिक बच्चे जीवित रहें और अपना पहला जन्मदिन मना सकें।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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