August 5, 2026 11:30 am

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PANCHKULA NEWS: पंचकूला नगर निगम की 200 करोड़ की जमीन पर नया बवाल, सरकार ने खोली विवादित फाइल

72 बीघा जमीन मामले में पूर्व डीसी के फैसले पर उठे सवाल, नगर निगम के पुराने पत्र फिर चर्चा में

नगर निगम ने पहले ही उठाए थे अधिकार क्षेत्र पर सवाल, अब उच्च स्तर पर पहुंचा मामला
बाबूगिरी हिन्दी न्यूज़
पंचकूला, 8 जून। पंचकूला की बहुचर्चित करीब 72 बीघा शामलात भूमि से जुड़ा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। लगभग 200 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की इस भूमि को लेकर हरियाणा सरकार ने मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली है। शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) विभाग, हरियाणा ने जिला उपायुक्त और नगर निगम आयुक्त से पूरे मामले की तथ्यात्मक जानकारी मांगी है।
जानकारी के अनुसार, सरकार के पास पहुंची एक शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन उपायुक्त डॉ. सुशील सारवान ने वर्ष 2024 में पोलो होटल्स प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में शामलात भूमि संबंधी मामला तय किया था, जबकि संबंधित भूमि पर निर्णय लेने का अधिकार क्षेत्र उनके पास नहीं था। शिकायत में दावा किया गया है कि विवादित भूमि का बाजार मूल्य 200 करोड़ रुपये से अधिक है।
यूएलबी विभाग द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि यह शिकायत हरियाणा सरकार के वित्तायुक्त एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग) तक पहुंची थी। विभाग ने पहले भी जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन रिपोर्ट प्राप्त नहीं होने पर दोबारा पत्र जारी कर मामले की स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।

नगर निगम ने पहले ही जताई थी आपत्ति
इस पूरे विवाद में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि तत्कालीन नगर निगम आयुक्त सचिन गुप्ता ने 5 मार्च 2024 को शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक को भेजे पत्र में स्पष्ट रूप से कहा था कि विवादित शामलात भूमि नगर निगम पंचकूला की सीमा के भीतर स्थित है। ऐसे में कलेक्टर सह-उपायुक्त की अदालत को इस मामले की सुनवाई का अधिकार क्षेत्र प्राप्त नहीं था।
नगर निगम ने अपने पत्र में कहा था कि हरियाणा में पंजाब कानून नहीं बल्कि हरियाणा ग्राम साझा भूमि अधिनियम लागू है। साथ ही चौकी गांव को वर्ष 2010 में नगर निगम सीमा में शामिल किया जा चुका है। इसलिए इस भूमि विवाद की सुनवाई कलेक्टर की अदालत द्वारा नहीं की जा सकती थी।

हाईकोर्ट और वित्तायुक्त के फैसलों का भी दिया गया हवाला
नगर निगम ने अपने पक्ष में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चर्चित मामले ‘अमर सिंह बनाम आयुक्त रोहतक मंडल’ तथा वित्तायुक्त की अदालत द्वारा दिए गए ‘सोमनाथ एवं अन्य बनाम ग्राम पंचायत नाग्गल’ फैसले का भी हवाला दिया था। इन निर्णयों में स्पष्ट किया गया था कि नगर निगम सीमा में आने वाली भूमि से जुड़े ऐसे मामलों की सुनवाई कलेक्टर द्वारा नहीं की जा सकती।
पत्र के अनुसार पोलो होटल्स प्राइवेट लिमिटेड ने पंजाब विलेज कॉमन लैंड्स (रेगुलेशन) एक्ट के तहत 72 बीघा भूमि पर स्वामित्व और कब्जे का दावा करते हुए याचिका दायर की थी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख
नगर निगम ने अपने पत्र में 7 अप्रैल 2022 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए ‘हरियाणा राज्य बनाम जय सिंह’ मामले का भी उल्लेख किया था। इस फैसले में कहा गया था कि शामलात भूमि का विभाजन या उसकी मूल प्रकृति में बदलाव नहीं किया जा सकता तथा पंचायत भूमि को मूल मालिकों को वापस नहीं दिया जा सकता।
तत्कालीन निगम आयुक्त सचिन गुप्ता ने आरोप लगाया था कि कलेक्टर की अदालत ने नगर निगम द्वारा प्रस्तुत तथ्यों, कानूनी प्रावधानों और न्यायिक निर्णयों की अनदेखी करते हुए 16 जनवरी 2024 को पोलो होटल्स प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में फैसला सुनाया।
निगम ने रिकार्ड में बदलाव पर लगाई थी रोक
फैसले के बाद नगर निगम ने तहसीलदार पंचकूला को पत्र लिखकर राजस्व अभिलेखों में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं करने का अनुरोध किया था। निगम का कहना था कि उसने आदेश के खिलाफ अपील दायर कर दी है, इसलिए अंतिम निर्णय आने तक रिकार्ड में परिवर्तन न किया जाए।
इसके अलावा कलेक्टर अदालत में कथित रूप से दिए गए एक अनधिकृत बयान को लेकर भवन निरीक्षक से भी स्पष्टीकरण मांगा गया था।

सरकार के उच्च स्तर पर फिर खुली फाइल
ताजा घटनाक्रम से स्पष्ट है कि यह मामला एक बार फिर सरकार के उच्च स्तर तक पहुंच गया है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने जिला प्रशासन से मामले के सभी पहलुओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है तो यह पंचकूला के सबसे चर्चित भूमि विवादों में से एक साबित हो सकता है।

जजपा ने लगाए गंभीर आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग
इस बीच जननायक जनता पार्टी (जजपा) के पंचकूला जिला अध्यक्ष ओपी सिहाग ने भी मामले को लेकर प्रदेश सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम पंचकूला पहले ही करोड़ों रुपये के फंड घोटालों की चर्चाओं में रहा है और अब अरबों रुपये मूल्य की भूमि से जुड़ा विवाद सामने आने से स्थिति और गंभीर हो गई है।
सिहाग ने दावा किया कि नगर निगम की करीब 72 बीघा भूमि को कथित रूप से एक निजी होटल मालिक के नाम दर्ज किए जाने का मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। उनके अनुसार इस भूमि की अनुमानित बाजार कीमत करीब 250 करोड़ रुपये है।
उन्होंने कहा कि उपायुक्त जिले की सरकारी भूमि का संरक्षक होता है, लेकिन यदि नियमों के विपरीत कोई फैसला लिया गया है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
जजपा नेता ने मुख्यमंत्री से मांग की कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए तथा जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष पड़ताल की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो भूमि को पुनः नगर निगम पंचकूला के नाम दर्ज किया जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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