बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
चंडीगढ़, 10 जून। चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 (CMP-2031) में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर शहर के वरिष्ठ नागरिकों के संगठन सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन (SIA) ने कड़ा विरोध जताया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष आर.के. गर्ग ने मुख्य वास्तुकार-सह-अध्यक्ष, स्क्रीनिंग समिति, चंडीगढ़ प्रशासन को विस्तृत आपत्तियां और सुझाव भेजते हुए मांग की है कि प्रस्तावित संशोधनों पर पुनर्विचार किया जाए तथा व्यापक सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की जाए।
एसोसिएशन ने अपनी आपत्तियों में कहा है कि 22 मई 2026 की ड्राफ्ट अधिसूचना और 29 मई 2026 के परिशिष्ट के माध्यम से प्रस्तावित संशोधन चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 की मूल अवधारणा, नियोजन दर्शन और वैधानिक ढांचे के विपरीत प्रतीत होते हैं। संगठन का कहना है कि CMP-2031 केवल एक प्रशासनिक दस्तावेज नहीं, बल्कि चंडीगढ़ की नियोजित शहरी पहचान, सतत विकास और संस्थागत नियोजन व्यवस्था को सुरक्षित रखने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
हाई-राइज विकास पर जताई चिंता
एसोसिएशन ने कहा कि चंडीगढ़ को मूल रूप से निम्न-ऊंचाई (लो-राइज) और निम्न-घनत्व (लो-डेंसिटी) शहर के रूप में विकसित किया गया था। ऐसे में परिधीय क्षेत्रों में हाई-राइज भवनों, घनत्व वृद्धि और औद्योगिक भूखंडों के विखंडन की अनुमति देना शहर की मूल योजना और चरित्र को प्रभावित करेगा। संगठन का मत है कि यदि शहर की मूल दृष्टि में बदलाव प्रस्तावित है तो इसके लिए पूरे मास्टर प्लान की व्यापक समीक्षा होनी चाहिए, न कि खंडित संशोधनों के जरिए बड़े परिवर्तन किए जाएं।
तकनीकी अध्ययन और पारदर्शिता का अभाव
एसआईए ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित संशोधनों से पहले यातायात अध्ययन, जल आपूर्ति क्षमता, सीवरेज भार, पार्किंग व्यवस्था, पर्यावरणीय प्रभाव, शहरी बुनियादी ढांचे की क्षमता और आपदा प्रतिरोधक क्षमता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर कोई सार्वजनिक और विश्वसनीय अध्ययन सामने नहीं रखा गया है। संगठन ने कहा कि ऐसे दूरगामी निर्णय बिना वैज्ञानिक विश्लेषण और सार्वजनिक जवाबदेही के नहीं लिए जाने चाहिए।
ली कॉर्बुज़िए की विरासत पर खतरे की आशंका
आपत्तियों में यह भी कहा गया कि चंडीगढ़ की अंतरराष्ट्रीय पहचान उसकी विशिष्ट स्थापत्य शैली और नियोजित शहरी संरचना के कारण है, जिसे प्रसिद्ध वास्तुकार ली कॉर्बुज़िए और उनकी टीम ने विकसित किया था। शहर की नियंत्रित स्काईलाइन, खुले क्षेत्र और सेक्टर आधारित योजना इसकी विशेषता हैं। एसोसिएशन का कहना है कि बहुमंजिला इमारतों और ऊंचे निर्माणों को बढ़ावा देने से शहर की दृश्यात्मक एकरूपता और मूल स्थापत्य विरासत प्रभावित हो सकती है।
बुनियादी ढांचे पर बढ़ेगा दबाव
संगठन ने चेतावनी दी कि बढ़ती आबादी और ऊर्ध्वाधर विकास से सड़कों, पार्किंग, जलापूर्ति, सीवरेज, वर्षा जल निकासी और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। यदि पहले से पर्याप्त बुनियादी ढांचा विस्तार नहीं किया गया तो शहर की जीवन गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
औद्योगिक भूखंडों के विखंडन का विरोध
29 मई 2026 के परिशिष्ट के तहत औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 और फेज-2 में बड़े औद्योगिक भूखंडों के विखंडन की अनुमति पर भी एसोसिएशन ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि इससे अनियंत्रित व्यावसायीकरण, भूमि उपयोग में अव्यवस्था और औद्योगिक नियोजन अनुशासन कमजोर पड़ सकता है। एक बार ऐसे परिवर्तन लागू हो जाने के बाद उन्हें वापस लेना बेहद कठिन होगा।
सार्वजनिक सुनवाई की मांग
एसआईए ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाले संशोधनों को केवल औपचारिक जन-परामर्श तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। शहर के नागरिकों, शहरी नियोजकों, स्थापत्य विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों और अन्य हितधारकों को अपने विचार रखने का वास्तविक अवसर मिलना चाहिए।
प्रशासन से की ये प्रमुख मांगें
एसोसिएशन ने चंडीगढ़ प्रशासन से मांग की है कि परिधीय क्षेत्रों में हाई-राइज विकास और औद्योगिक भूखंडों के विखंडन संबंधी प्रस्ताव वापस लेकर पुनर्विचार किया जाए। साथ ही किसी भी मौलिक बदलाव से पहले व्यापक तकनीकी, पर्यावरणीय और बुनियादी ढांचा अध्ययन कराया जाए तथा सभी संबंधित रिपोर्टें सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराई जाएं।
एसआईए ने अपने प्रतिनिधियों को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देने की भी मांग की है। संगठन का कहना है कि चंडीगढ़ केवल एक शहर नहीं बल्कि राष्ट्रीय महत्व की नियोजन विरासत है, इसलिए इसकी मूल स्थापत्य दृष्टि और नियोजन दर्शन को बिना व्यापक जन-सहमति और वैज्ञानिक आधार के परिवर्तित नहीं किया जाना चाहिए।
एसोसिएशन अध्यक्ष आर.के. गर्ग ने कहा कि चंडीगढ़ की विशिष्ट पहचान और विरासत को सुरक्षित रखना सभी नागरिकों और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी है तथा विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।













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