17 महीनों में 97% शिकायतों का निपटारा; करोड़ों रुपये लौटवाए,
अंतरराज्यीय गिरोहों का किया पर्दाफाश
रमेश गोयत
पंचकूला, 10 जून। विदेश भेजने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले फर्जी इमिग्रेशन एजेंटों और धोखाधड़ी के नेटवर्क के खिलाफ पंचकूला पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। पुलिस की एंटी इमिग्रेशन फ्रॉड यूनिट ने पिछले 17 महीनों में न केवल सैकड़ों शिकायतों का समाधान किया, बल्कि करोड़ों रुपये की ठगी की रकम पीड़ितों को वापस दिलवाकर फर्जी एजेंटों के पूरे नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। पुलिस के अनुसार लगातार कार्रवाई, छापेमारी और कानूनी शिकंजे के कारण कई फर्जी एजेंट पंचकूला छोड़कर भागने को मजबूर हो गए हैं।
पंचकूला पुलिस की एंटी इमिग्रेशन फ्रॉड यूनिट के प्रभारी इंस्पेक्टर योगविंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान यूनिट को कुल 239 शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जो औसतन लगभग 20 शिकायतें प्रतिमाह बनती हैं। इनमें से सभी शिकायतों का सफलतापूर्वक निपटारा कर दिया गया। वहीं वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों (जनवरी से मई) में 54 शिकायतें प्राप्त हुईं, जो औसतन लगभग 11 शिकायतें प्रतिमाह हैं। इनमें से 46 शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है। आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि पुलिस की लगातार कार्रवाई और जागरूकता अभियानों के कारण ऐसे मामलों में लगातार कमी आ रही है।
3.41 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस दिलवाए
डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता ने बताया कि पुलिस का उद्देश्य केवल आरोपियों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि पीड़ितों को उनका धन वापस दिलाना भी है। इसी दिशा में बड़ी सफलता हासिल करते हुए वर्ष 2025 में जांच के दौरान लगभग 2.40 करोड़ रुपये शिकायतकर्ताओं को वापस दिलवाए गए। वहीं वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों में ही करीब 1.01 करोड़ रुपये की राशि वापस करवाई जा चुकी है। इस प्रकार 17 महीनों में कुल 3.41 करोड़ रुपये की रकम पीड़ितों तक पहुंचाई गई।
इसके अतिरिक्त आरोपियों की गिरफ्तारी के दौरान वर्ष 2025 में लगभग 1.76 करोड़ रुपये नकद और 850 ग्राम सोने के आभूषण बरामद किए गए। वर्ष 2026 में अब तक 54.44 लाख रुपये की नकद रिकवरी की जा चुकी है। इस तरह पुलिस ने कुल 2.30 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी और बड़ी मात्रा में सोने के आभूषण भी बरामद किए हैं।
मामलों में आई भारी गिरावट
पुलिस आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में कुल 45 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई थी, जो औसतन लगभग चार मामले प्रतिमाह बनते हैं। जबकि वर्ष 2026 में अब तक केवल 10 मामले दर्ज हुए हैं, जो औसतन दो मामले प्रतिमाह हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष समान अवधि के दौरान ऐसे मामलों में करीब 50 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। पुलिस का मानना है कि यह कमी सख्त कार्रवाई, लगातार निगरानी और आमजन में बढ़ी जागरूकता का परिणाम है।
100 से अधिक आरोपी गिरफ्तार, अंतरराज्यीय नेटवर्क ध्वस्त
एंटी इमिग्रेशन फ्रॉड यूनिट ने वर्ष 2025 में 63 और वर्ष 2026 में अब तक 37 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस प्रकार कुल 100 से अधिक आरोपी पुलिस के शिकंजे में आ चुके हैं। गिरफ्तार आरोपियों में कई ऐसे शातिर अपराधी शामिल हैं जो वर्षों से विभिन्न राज्यों में लोगों को विदेश भेजने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी कर रहे थे।
पुलिस ने जांच को केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रखा, बल्कि आरोपियों की गतिविधियों और संपर्कों की गहराई से जांच करते हुए पूरे नेटवर्क का खुलासा किया। इसी दौरान एक ऐसे आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया जिसके खिलाफ विभिन्न स्थानों पर 49 शिकायतें दर्ज थीं।
दिल्ली, पंजाब समेत कई राज्यों तक फैला था जाल
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई गिरोह दिल्ली, पंजाब और अन्य राज्यों में सक्रिय थे। ये गिरोह बिना लाइसेंस और बिना किसी वैध अनुमति के लोगों को विदेश में नौकरी, वर्क परमिट और स्थायी निवास का झूठा सपना दिखाकर लाखों रुपये ऐंठ रहे थे। पुलिस ने अंतरराज्यीय स्तर पर कार्रवाई करते हुए कई प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया और फर्जी इमिग्रेशन कारोबार से जुड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया।
लाइसेंसधारी एजेंसियों से ही करें संपर्क : डीसीपी
डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने कहा कि फर्जी इमिग्रेशन कारोबार के खिलाफ अभियान भविष्य में भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा। विदेश भेजने के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी करने वाले किसी भी व्यक्ति या एजेंसी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि विदेश जाने के लिए केवल लाइसेंसधारी और अधिकृत एजेंसियों से ही संपर्क करें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि या एजेंट की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर लोगों को ठगी का शिकार होने से बचाया जा सके।













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