रमेश गोयत
चंडीगढ़, 14 जून। हरियाणा के तेजी से बढ़ते शहरीकरण और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के हरियाणा कैडर में 11 नए पदों की वृद्धि को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही राज्य में आईएएस अधिकारियों की कुल अधिकृत संख्या 215 से बढ़कर 226 हो गई है। करीब साढ़े सात साल बाद हुए इस बदलाव को हरियाणा के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता हेमंत कुमार ने बताया कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (कैडर संख्या निर्धारण) सातवां संशोधन विनियम, 2026 के तहत राजपत्र अधिसूचना जारी कर संशोधित कैडर संख्या लागू की है। इससे पहले दिसंबर 2018 में आईएएस कैडर की संख्या 205 से बढ़ाकर 215 की गई थी।
साढ़े सात साल बाद बढ़ी आईएएस कैडर की संख्या
हेमंत कुमार के अनुसार वर्ष 2018 के बाद पहली बार हरियाणा आईएएस कैडर में वृद्धि की गई है। नए संशोधन के बाद राज्य में आईएएस अधिकारियों की कुल अधिकृत संख्या 226 हो गई है, जो पहले 215 थी। यह वृद्धि राज्य की बढ़ती प्रशासनिक आवश्यकताओं और नए शहरी क्षेत्रों के विकास को ध्यान में रखकर की गई है।
महानगर विकास प्राधिकरणों के लिए बनाए गए पांच नए आईएएस पद
नए संशोधन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, सोनीपत और हिसार महानगर विकास प्राधिकरणों के लिए पांच समर्पित आईएएस पदों का सृजन है। इन सभी प्राधिकरणों में अब मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद पर आईएएस अधिकारी तैनात किए जाएंगे।
नए पदों में शामिल हैं—
गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण के सीईओ
फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण के सीईओ
पंचकूला महानगर विकास प्राधिकरण के सीईओ
सोनीपत महानगर विकास प्राधिकरण के सीईओ
हिसार महानगर विकास प्राधिकरण के सीईओ
यह कदम हरियाणा के तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों में योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और समन्वय को सुनिश्चित करेगा।
वरिष्ठ प्रशासनिक पदों की संख्या भी बढ़ी
संशोधित कैडर नियमों के तहत राज्य सरकार के अधीन वरिष्ठ पदों की संख्या 117 से बढ़ाकर 123 कर दी गई है। इसके साथ ही प्रतिनियुक्ति और आरक्षित श्रेणियों में भी वृद्धि दर्ज की गई है।
कैडर संरचना : 2018 बनाम 2026
श्रेणी
2018
2026
वृद्धि
वरिष्ठ पद
117
123
+6
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति रिजर्व
46
49
+3
राज्य प्रतिनियुक्ति रिजर्व
29
30
+1
प्रशिक्षण रिजर्व
4
4
कोई बदलाव नहीं
अवकाश एवं कनिष्ठ रिजर्व
19
20
+1
पदोन्नति कोटा
65
68
+3
सीधी भर्ती
150
158
+8
कुल कैडर संख्या
215
226
+11
प्रशासनिक प्राथमिकताओं में बदलाव का संकेत
नए ढांचे में सरकार ने पारंपरिक वरिष्ठ पदों की संख्या कम करते हुए विशेषीकृत और परियोजना आधारित पदों पर अधिक जोर दिया है।
वित्तीय आयुक्त एवं प्रधान सचिव स्तर के पद 12 से घटाकर 10 कर दिए गए हैं, जबकि सरकारी सचिवों के पद 9 से घटकर 7 रह गए हैं। दूसरी ओर महानिदेशक/आयुक्त श्रेणी के पदों की संख्या 1 से बढ़ाकर 3 तथा निदेशक/परियोजना निदेशक पदों की संख्या 1 से बढ़ाकर 5 कर दी गई है।
इससे स्पष्ट है कि सरकार प्रशासनिक संरचना को अधिक परिणामोन्मुख और विशेषज्ञता आधारित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
जिला प्रशासन को मिला अतिरिक्त बल
हरियाणा में दिसंबर 2025 में हांसी को 23वां राजस्व जिला घोषित किए जाने के बाद उपायुक्त (डीसी) पदों की संख्या 22 से बढ़ाकर 23 कर दी गई है।
इसके अलावा अतिरिक्त उपायुक्त-सह-सीईओ, जिला ग्रामीण विकास प्राधिकरण एवं अतिरिक्त कलेक्टर पदों की संख्या भी 7 से बढ़ाकर 8 कर दी गई है। इससे जिलों में विकास योजनाओं की निगरानी और प्रशासनिक कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।
नए विभागों को मिला स्वतंत्र प्रतिनिधित्व
संशोधित ढांचे में कई विभागों का पुनर्गठन भी किया गया है। आतिथ्य और पर्यटन, जो पहले संयुक्त रूप से संचालित होते थे, अब अलग-अलग निदेशक स्तर के पदों के तहत काम करेंगे।
इसी प्रकार सामाजिक न्याय एवं कल्याण से जुड़े कार्यों को व्यापक सामाजिक सशक्तिकरण ढांचे के तहत पुनर्संगठित किया गया है। शहरी विकास से जुड़े संस्थानों को भी स्वतंत्र प्रशासनिक प्रतिनिधित्व दिया गया है।
सीधी भर्ती के अवसर बढ़े, पदोन्नति कोटा में सीमित वृद्धि
संशोधित नियमों के अनुसार आईएएस में सीधी भर्ती के पद 150 से बढ़कर 158 हो गए हैं, जबकि पदोन्नति कोटा केवल 65 से बढ़कर 68 हुआ है।
हेमंत कुमार ने बताया कि इससे यूपीएससी के माध्यम से आईएएस सेवा में आने वाले अभ्यर्थियों के लिए अवसर बढ़ेंगे। वहीं राज्य में प्रशासनिक पदों पर अधिकारियों की उपलब्धता बेहतर होने से रिक्तियों का दबाव भी कम होगा।
बदलते हरियाणा की जरूरतों के अनुरूप नया ढांचा
विशेषज्ञों का मानना है कि हरियाणा के बढ़ते शहरी विस्तार, नई विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक चुनौतियों को देखते हुए आईएएस कैडर में किया गया यह विस्तार समय की आवश्यकता थी। नए पदों के सृजन से शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी।












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