April 12, 2026 3:08 pm

April 12, 2026 3:08 pm

DELHI: दिल्ली की 6 जिला अदालतों में आज लोक अदालत का आयोजन

ट्रैफिक चालान, चेक बाउंस और पारिवारिक विवादों का होगा त्वरित निपटारा

नई दिल्ली: दिल्ली में आम नागरिकों को सस्ता, सरल और शीघ्र न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आज लोक अदालत का आयोजन किया गया है। राजधानी की छह जिला अदालतों में आयोजित इस लोक अदालत के माध्यम से ट्रैफिक चालान, चेक बाउंस, पारिवारिक विवाद सहित विभिन्न मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया जाएगा।

इन अदालत परिसरों में लगाई गई लोक अदालत
आज लोक अदालत का आयोजन
हाउस कोर्ट
कड़कड़डूमा कोर्ट
राऊज एवेन्यू कोर्ट
रोहिणी कोर्ट
द्वारका कोर्ट
में किया जा रहा है।
हालांकि, साकेत कोर्ट में 9 जनवरी को एक स्टाफ सदस्य द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना के बाद वहां लोक अदालत का आयोजन नहीं किया गया है।

क्या है लोक अदालत?
जनता की अदालत, जहां सहमति से होता है न्याय
लोक अदालत का अर्थ है “जनता की अदालत”। यह विवादों के समाधान का एक वैकल्पिक मंच है, जहां दोनों पक्षों की सहमति के आधार पर मामलों का निपटारा किया जाता है। लोक अदालत में होने वाले समझौते कानून के दायरे में रहते हुए किए जाते हैं।

किन मामलों का होता है निपटारा
अधिकांश दीवानी और समझौतायोग्य आपराधिक मामले शामिल
लोक अदालत में उन आपराधिक मामलों को छोड़कर, जिनमें कानूनन समझौता संभव नहीं है, लगभग सभी दीवानी और आपराधिक मामलों का निपटारा किया जाता है। इसमें प्रमुख रूप से—
ट्रैफिक चालान
चेक बाउंस के मामले
पारिवारिक व वैवाहिक विवाद
बैंक और बीमा से जुड़े विवाद
बिजली, पानी और अन्य उपभोक्ता बिल विवाद
शामिल होते हैं।

प्री-लिटिगेशन मामलों को भी मिलती है राहत
मुकदमा दर्ज कराए बिना भी संभव समाधान
लोक अदालत की एक बड़ी विशेषता यह है कि यहां प्री-लिटिगेशन स्तर पर ही विवादों का समाधान किया जा सकता है। यानी, जिन मामलों में अभी तक अदालत में मुकदमा दायर नहीं किया गया है, उन्हें भी दोनों पक्षों की सहमति से लोक अदालत में निपटाया जा सकता है।
लोक अदालत का फैसला होता है अंतिम

अपील की नहीं होती गुंजाइश
लोक अदालत में पारित निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होता है, जिस पर किसी भी अदालत में अपील नहीं की जा सकती। इससे न केवल न्याय प्रक्रिया तेज होती है, बल्कि पक्षकारों को लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों से भी राहत मिलती है।

न्याय को आम जनता तक पहुंचाने की पहल
लोक अदालत को न्याय प्रणाली में एक प्रभावी और जनहितैषी व्यवस्था माना जाता है। यह अदालतों पर बढ़ते मामलों के बोझ को कम करने के साथ-साथ आम लोगों को त्वरित और सुलभ न्याय प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

BabuGiri Hindi
Author: BabuGiri Hindi

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