September 13, 2026 4:46 am

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चिकित्सा लापरवाही के मामलों में अपील का अधिकार सुनिश्चित हो: हरियाणा मानव अधिकार आयोग

जिला मेडिकल नेग्लिजेंस बोर्ड के फैसले के खिलाफ स्पष्ट, स्वतंत्र और प्रभावी अपीलीय व्यवस्था बनाने की आयोग की सिफारिश

बाबूगिरी हिंदी न्यूज़

चंडीगढ़, 06 सितंबर 2026: हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने चिकित्सा लापरवाही से संबंधित मामलों में जिला मेडिकल नेग्लिजेंस बोर्ड के निष्कर्षों से असंतुष्ट व्यक्तियों के लिए स्पष्ट, स्वतंत्र एवं प्रभावी अपीलीय व्यवस्था उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया है। आयोग ने कहा है कि केवल जिला स्तर पर शिकायतों की जांच के लिए व्यवस्था मौजूद होना पर्याप्त नहीं है; यदि किसी व्यक्ति को जिला मेडिकल नेग्लिजेंस बोर्ड के मत अथवा निष्कर्ष पर आपत्ति है, तो उसके पास उसे चुनौती देने के लिए एक प्रभावी अपीलीय उपाय भी उपलब्ध होना चाहिए।

यह निर्देश शिकायत संख्या 514/17/2023 में पारित आदेश में दिए गए हैं। मामले की सुनवाई हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा, सदस्य (न्यायिक) श्री कुलदीप जैन तथा सदस्य श्री दीप भाटिया की पीठ द्वारा की गई।

मेडिकल नेग्लिजेंस मामलों के लिए संहिताबद्ध कानूनी ढांचे की जरूरत
आयोग ने अपने पूर्व आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों को विनियमित करने वाले एक संहिताबद्ध विधिक ढांचे की तत्काल आवश्यकता है। आयोग के अनुसार, वैधानिक नियमों और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में चिकित्सा लापरवाही से संबंधित जिला मेडिकल नेग्लिजेंस बोर्ड के निष्कर्ष से व्यथित व्यक्ति के पास स्पष्ट उपचार अथवा अपीलीय उपाय उपलब्ध नहीं रहता।आयोग ने कहा कि राज्य सरकार को ऐसे उपयुक्त नियम एवं दिशा-निर्देश बनाने चाहिए, जिनके माध्यम से जिला मेडिकल नेग्लिजेंस बोर्ड के निष्कर्षों पर आपत्ति होने की स्थिति में शिकायतकर्ता को एक सुव्यवस्थित एवं प्रभावी निवारण तंत्र उपलब्ध हो सके।

सिर्फ जिला स्तरीय व्यवस्था अपीलीय उपचार का विकल्प नहीं
महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, हरियाणा द्वारा आयोग के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट में राज्य सरकार की वर्ष 2017 की अधिसूचना तथा वर्ष 2018 में किए गए संशोधन का उल्लेख करते हुए बताया गया था कि चिकित्सा लापरवाही से संबंधित शिकायतों की जांच के लिए जिला स्तर पर मेडिकल बोर्ड गठित हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि जिला स्तर पर शिकायतों की जांच के लिए एक तंत्र का अस्तित्व अपने आप में बोर्ड के निर्णय अथवा राय के विरुद्ध प्रभावी उपचार उपलब्ध होने के समान नहीं है। आयोग ने पाया कि प्रस्तुत रिपोर्ट में ऐसा कोई अपीलीय, पुनर्विचार अथवा पुनरीक्षण तंत्र नहीं बताया गया है, जिसके माध्यम से जिला मेडिकल नेग्लिजेंस बोर्ड के निष्कर्षों को किसी उच्चतर अथवा स्वतंत्र प्राधिकारी के समक्ष चुनौती दी जा सके।

व्यथित व्यक्ति को उपचार के अधिकार से वंचित नहीं छोड़ा जा सकता”
न्यायमूर्ति ललित बत्रा की अध्यक्षता वाली पूर्ण पीठ ने अपने आदेश में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल इसलिए कि जिला स्तर पर एक व्यवस्था मौजूद है, किसी व्यथित व्यक्ति को उपचार के अधिकार से वंचित नहीं छोड़ा जा सकता। जब जिला मेडिकल नेग्लिजेंस बोर्ड के मत अथवा निष्कर्ष को ही चुनौती दी जा रही हो, तब एक स्पष्ट रूप से परिभाषित, स्वतंत्र एवं सुव्यवस्थित अपीलीय उपाय उपलब्ध होना आवश्यक है।

आयोग ने स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक द्वारा व्यक्त इस आशंका में भी कोई दम नहीं पाया कि राज्य-स्तरीय अपीलीय प्राधिकरण के गठन से समानांतर कार्यवाही की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। आयोग ने स्पष्ट किया कि जिला चिकित्सा लापरवाही बोर्ड के समक्ष होने वाली मूल कार्यवाही तथा प्रस्तावित राज्य-स्तरीय अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष होने वाली अपीलीय कार्यवाही समानांतर कार्यवाही नहीं होंगी, बल्कि निर्णय-निर्धारण की क्रमिक अवस्थाएँ होंगी। अपीलीय व्यवस्था तभी प्रभावी होगी, जब कोई पीड़ित अथवा असंतुष्ट व्यक्ति जिला चिकित्सा लापरवाही बोर्ड द्वारा दिए गए निष्कर्षों को चुनौती देने का विकल्प चुनता है।

स्वास्थ्य विभाग से ठोस कार्रवाई रिपोर्ट तलब
आयोग ने अपनी इस सिफारिश को पुनः दोहराया है कि इस मामले पर उचित स्तर पर पुनर्विचार किया जाए तथा जिला चिकित्सा लापरवाही बोर्ड के निष्कर्षों/राय से व्यथित व्यक्ति को एक प्रभावी अपीलीय व्यवस्था उपलब्ध कराने के संबंध में स्वास्थ्य विभाग (अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान तथा आयुष विभाग, हरियाणा, चंडीगढ़) द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी प्रदान की जाए।
आयोग ने अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान तथा आयुष विभाग, हरियाणा, और महानिदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं, हरियाणा को निर्देशित किया है कि इस संबंध में उठाए गए कदमों के बारे में विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report) आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें।

असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि हरियाणा मानव अधिकार आयोग की पूर्ण पीठ के आदेश के अनुसार अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान तथा आयुष विभाग, हरियाणा एवं महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, हरियाणा, पंचकूला को अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपने-अपने पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले की प्रगति रिपोर्ट अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पूर्व आयोग के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी 2027 को होगी।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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