September 13, 2026 4:06 am

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चंडीगढ़ में राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश परिषदों का 16वां राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू

भूपेंद्र यादव बोले—जैव विविधता संरक्षण के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को संशोधित शासन ढांचे के अनुरूप नियम और व्यवस्था मजबूत करनी होगी
रमेश गोयत
चंडीगढ़, 6 सितंबर 2026। राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों का 16वां राष्ट्रीय सम्मेलन रविवार को चंडीगढ़ में शुरू हुआ। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की ओर से आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन 6 और 7 सितंबर को होगा। इसमें देशभर के राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों के अध्यक्ष एवं सदस्य सचिवों के अलावा वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
उद्घाटन कार्यक्रम में पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव तथा हरियाणा के पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव मंत्री राव नरबीर सिंह मौजूद रहे। कार्यक्रम में पर्यावरण मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार, वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव सुशील कुमार अवस्थी, अतिरिक्त सचिव आशुतोष अग्निहोत्री और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के अध्यक्ष वीरेंद्र तिवारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। चंडीगढ़ के गृह सचिव मंदीप सिंह बराड़ तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा सचिव सौरभ कुमार भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक भागीदारी जरूरी
गुलाब चंद कटारिया ने भारत की समृद्ध जैविक विरासत और पारंपरिक पर्यावरणीय मूल्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि पारिस्थितिक सुरक्षा का सीधा संबंध खाद्य एवं जल सुरक्षा, आजीविका और सतत विकास से है। उन्होंने जैव विविधता संरक्षण के आधुनिक उपायों के साथ पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को जोड़ने पर जोर दिया।
उन्होंने पंजाब और चंडीगढ़ की आर्द्रभूमियों, नदी पारिस्थितिकी तंत्रों तथा कृषि जैव विविधता के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने जैव विविधता प्रबंधन समितियों और जन जैव विविधता पंजियों को मजबूत करने तथा जैव विविधता से जुड़े संस्थानों और स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई।
संशोधित व्यवस्था के अनुसार नियम बनाने की जरूरत
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि जैव विविधता संरक्षण की दिशा में भारत वैज्ञानिक क्षमता के साथ स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान को भी आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने मिशन लाइफ, ‘एक पेड़ मां के नाम’, अमृत सरोवर और ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम जैसी पहलों का उल्लेख किया।
उन्होंने जैव विविधता अधिनियम, 2002 के साथ जैव विविधता संशोधन अधिनियम, 2023 और जैव विविधता नियम, 2024 का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे देश में जैव विविधता शासन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और मजबूत किया गया है। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अपने नियमों, संस्थागत व्यवस्था और क्रियान्वयन प्रक्रिया को संशोधित राष्ट्रीय ढांचे के अनुरूप बनाने का आग्रह किया।

2.76 लाख से अधिक समितियों को प्रभावी बनाने पर जोर
भूपेंद्र यादव ने कहा कि देशभर में 2.76 लाख से अधिक जैव विविधता प्रबंधन समितियां गठित हैं। अब आवश्यकता है कि इन समितियों को जमीनी स्तर पर और अधिक सक्रिय तथा प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने जन जैव विविधता पंजियों को केवल अभिलेख के रूप में रखने के बजाय स्थानीय निकायों की योजना बनाने का उपयोगी साधन बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि स्थानीय जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण सतत विकास की योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर गतिशील योजना तैयार करने की आवश्यकता है।

एबीएस के तहत 200 करोड़ से अधिक राशि वितरित
केंद्रीय मंत्री ने पहुंच एवं लाभ-साझाकरण व्यवस्था का उल्लेख करते हुए बताया कि राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की ओर से किसानों, स्थानीय समुदायों, जैव विविधता प्रबंधन समितियों, राज्य जैव विविधता बोर्डों, केंद्र शासित प्रदेश परिषदों और अनुसंधान संस्थानों के बीच 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय समुदायों को जैव विविधता से जुड़े संसाधनों और ज्ञान से मिलने वाले लाभ में उचित भागीदारी देना है। इससे जैव विविधता संरक्षण के साथ स्थानीय स्तर पर स्थायी आजीविका को भी बढ़ावा मिलना चाहिए।
‘30 बाय 30’ लक्ष्य में राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण
भूपेंद्र यादव ने कहा कि जैव विविधता संरक्षण और जलवायु कार्रवाई एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। भारत ने ‘संपूर्ण सरकार’ और ‘संपूर्ण समाज’ के दृष्टिकोण के साथ अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
उन्होंने कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के अनुरूप तैयार भारत की अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति एवं कार्ययोजना 2024-2030 का भी उल्लेख किया। उन्होंने पारिस्थितिकी तंत्र की पुनर्बहाली, प्राकृतिक आवासों और प्रजातियों के संरक्षण, कृषि जैव विविधता तथा जलवायु-अनुकूल भू-दृश्यों के विकास में मापने योग्य परिणाम हासिल करने पर जोर दिया। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से वैश्विक ‘30 बाय 30’ संरक्षण लक्ष्य की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

हरियाणा में समितियों के प्रशिक्षण पर जोर
हरियाणा के मंत्री राव नरबीर सिंह ने जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र की पुनर्बहाली के लिए राज्य में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने स्थानीय स्तर पर जैव विविधता शासन व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने जैव विविधता प्रबंधन समितियों और स्थानीय समुदायों के प्रशिक्षण तथा क्षमता निर्माण को बढ़ाने पर भी जोर दिया।
सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की पिछले एक वर्ष की उपलब्धियों सहित कई ज्ञान संबंधी दस्तावेजों का विमोचन किया गया। सम्मेलन में राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने अनुभव, नवाचार तथा सामने आ रही चुनौतियों को साझा करेंगे।
दो दिवसीय सम्मेलन में जैव विविधता प्रबंधन समितियों को प्रभावी बनाने, जन जैव विविधता पंजियों की गुणवत्ता सुधारने, संस्थागत व्यवस्था मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर जैव विविधता संरक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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