कहा— शहरवासियों के साथ एक बार फिर हुआ धोखा
चंडीगढ़, 10 जनवरी 2026।
चंडीगढ़ और आसपास के इलाकों में मेट्रो परियोजना को लेकर प्रशासक गुलाब चंद कटारिया द्वारा दिए गए हालिया बयान पर चंडीगढ़ कांग्रेस ने गहरी निराशा व्यक्त की है। कांग्रेस का आरोप है कि बिना कोई ठोस और तार्किक कारण बताए मेट्रो नेटवर्क के निर्माण प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया, जिससे शहर के लोगों की वर्षों पुरानी उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है।
चंडीगढ़ कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता राजीव शर्मा ने कहा कि मेट्रो के मुद्दे पर शहरवासियों के साथ फिर से धोखा किया गया है। उन्होंने बताया कि रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस (राईटस) की विशेषज्ञ समिति कई बार स्पष्ट कर चुकी है कि चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला समेत आसपास के क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही ट्रैफिक समस्या से निपटने का एकमात्र प्रभावी समाधान मेट्रो नेटवर्क है।
राजीव शर्मा ने बताया कि वर्ष 2009 में राईटस ने 52 से 64 किलोमीटर लंबी मेट्रो लाइन की सिफारिश की थी, जिसे वर्ष 2014-15 में तत्कालीन सांसद किरण खेर द्वारा मनमाने ढंग से रद्द कर दिया गया था, क्योंकि वह मोनो रेल को प्राथमिकता दे रही थीं। इसके बाद नवंबर 2022 में राईटस ने अपनी ताजा फिजिबिलिटी स्टडी में ट्राईसिटी और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए 64.5 किलोमीटर लंबे मेट्रो नेटवर्क की दोबारा सिफारिश की। अप्रैल 2024 में आई एक अन्य रिपोर्ट में शहर के लिए दो-कोच मेट्रो सिस्टम को सबसे उपयुक्त विकल्प बताया गया था।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि जहां चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी केंद्र सरकार से इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जल्द शुरू करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं और हाल ही में इसके लिए 25,000 करोड़ रुपये तत्काल जारी करने की औपचारिक मांग भी कर चुके हैं, वहीं प्रशासक द्वारा इस प्रोजेक्ट को फिर से पटरी से उतारना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह वही गलती दोहराने जैसा है, जो 2014-15 में की गई थी।
राजीव शर्मा ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते ट्रैफिक जाम पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि जाम में फंसने से वाहन चालकों का बहुमूल्य समय बर्बाद हो रहा है, ईंधन की खपत बढ़ रही है और प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंचता जा रहा है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो चंडीगढ़ जैसा स्वच्छ शहर भविष्य में दिल्ली की तरह “गैस चैंबर” में तब्दील हो सकता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े बुनियादी ढांचे के निर्माण के दौरान कुछ समय के लिए सड़कों पर असुविधा होना स्वाभाविक है, लेकिन मेट्रो परियोजना को पूरी तरह खारिज करते समय प्रशासक को मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम के अन्य विकल्पों पर गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए थी और यह बताना चाहिए था कि वे विकल्प मेट्रो की तुलना में कैसे अधिक लाभकारी हैं।











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