सीपीसीसी और रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 की पहल, अधिकृत पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने के लिए चलेगा जागरूकता अभियान
ई-कचरा संग्रह के लिए विशेष वाहन रवाना, नागरिकों से असंगठित कबाड़ विक्रेताओं को इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं देने की अपील
बाबूगिरी हिंदी न्यूज़
चंडीगढ़, 15 अक्टूबर। चंडीगढ़ में इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सुरक्षित निपटान और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति (सीपीसीसी) ने रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 के सहयोग से ‘प्रोजेक्ट पुनर्जन्म—प्रौद्योगिकी का पुनर्जन्म’ की शुरुआत की है। इस परियोजना का उद्देश्य अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को इधर-उधर फेंकने या असंगठित कबाड़ कारोबार के माध्यम से निपटाने के बजाय अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं तक पहुंचाना है, ताकि पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय ई-कचरा दिवस के अवसर पर 14 अक्टूबर को सेक्टर 19-बी स्थित पर्यावरण भवन में इस परियोजना का शुभारंभ किया गया। इसके तहत चंडीगढ़ में ई-कचरा एकत्र करने के लिए विशेष वाहन की व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम के समापन पर मैसर्स शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड के ई-कचरा संग्रह वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इसके साथ ही परियोजना के अंतर्गत ई-कचरा संग्रह करने का काम शुरू हो गया।
घरों से एकत्र किया जाएगा अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक कचरा
प्रोजेक्ट पुनर्जन्म के माध्यम से शहर के निवासियों को अपने घरों और संस्थानों में बेकार पड़े विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उचित निपटान करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके अंतर्गत खराब मोबाइल फोन, पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अनुपयोगी विद्युत सामग्री को निर्धारित व्यवस्था के माध्यम से अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा।
अक्सर लोग पुराने मोबाइल फोन, कंप्यूटर, तार, चार्जर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान को सामान्य कचरे में फेंक देते हैं या फिर कबाड़ खरीदने वालों को बेच देते हैं। ऐसे में इन उपकरणों का निपटान किस तरह किया जाता है, इस पर उपभोक्ताओं का नियंत्रण नहीं रहता। यदि इलेक्ट्रॉनिक कचरे को वैज्ञानिक तरीके से अलग करके उसका प्रसंस्करण नहीं किया जाए, तो उसमें मौजूद हानिकारक पदार्थ पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए सीपीसीसी ने नागरिकों को ई-कचरे के सुरक्षित संग्रह और अधिकृत पुनर्चक्रण के प्रति जागरूक करने की पहल की है। परियोजना के तहत लोगों को बताया जाएगा कि अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सामान्य कचरे से अलग रखना और निर्धारित व्यवस्था के माध्यम से सौंपना क्यों जरूरी है।
असंगठित कबाड़ कारोबार से ई-कचरे का निपटान पर्यावरण के लिए चुनौती
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीपीसीसी के सदस्य सचिव ने ई-कचरे के अनुचित निपटान से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अनौपचारिक और असंगठित कबाड़ कारोबार के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक कचरे का निपटान कई तरह की पर्यावरणीय समस्याएं पैदा कर सकता है।
ई-कचरे के अनुचित प्रबंधन से मिट्टी, पानी और वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ सकता है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को असुरक्षित तरीके से तोड़ने, उनके हिस्सों को जलाने या उनमें से उपयोगी धातुएं निकालने की प्रक्रिया में हानिकारक पदार्थ पर्यावरण में फैल सकते हैं। इससे आसपास रहने वाले लोगों और इन गतिविधियों में लगे कामगारों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।
उन्होंने ई-कचरे के सुरक्षित रखरखाव और उचित निपटान को लेकर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों से अपील की कि वे इलेक्ट्रॉनिक कचरे को केवल अधिकृत एजेंसियों को ही सौंपें, ताकि उसका नियमानुसार संग्रह और पुनर्चक्रण सुनिश्चित किया जा सके।
रोटरी ने नागरिकों से जन-आंदोलन बनाने का किया आह्वान
रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति रोटरी की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने नागरिकों से ई-कचरे के जिम्मेदार पुनर्चक्रण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।
परियोजना में नियामक प्राधिकरणों, नागरिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और पर्यावरण से जुड़े अन्य हितधारकों को एक साझा मंच पर लाने की योजना है। इसका उद्देश्य केवल ई-कचरा एकत्र करना ही नहीं, बल्कि लोगों की आदतों में बदलाव लाना और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जिम्मेदार उपयोग, संग्रह तथा पुनर्चक्रण को प्रोत्साहित करना भी है।
जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को बताया जाएगा कि इलेक्ट्रॉनिक कचरे का उचित प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके लिए नागरिकों, संस्थानों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी को भी आवश्यक माना गया है।
संसाधनों के पुनः उपयोग पर रहेगा जोर
‘प्रोजेक्ट पुनर्जन्म’ का एक प्रमुख उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक कचरे में मौजूद उपयोगी संसाधनों का दोबारा इस्तेमाल सुनिश्चित करना है। अधिकृत माध्यमों से पुनर्चक्रण होने पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मौजूद उपयोगी सामग्री को नियमानुसार अलग करके संसाधनों के रूप में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे नए कच्चे माल पर निर्भरता कम करने और कचरे की मात्रा घटाने में मदद मिल सकती है।
परियोजना का ध्येय ‘हरित कल के लिए आज ही पुनर्चक्रण करें’ रखा गया है। इसके माध्यम से ई-कचरा प्रबंधन का ऐसा टिकाऊ मॉडल विकसित करने का लक्ष्य है, जिसे भविष्य में क्षेत्र के अन्य स्थानों पर भी अपनाया जा सके।
ई-कचरा उठवाने के लिए इन नंबरों पर करें संपर्क
सीपीसीसी की ओर से शहर के निवासियों से अपील की गई है कि वे अपने घरों या संस्थानों में अनुपयोगी पड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को असंगठित कबाड़ विक्रेताओं को देने या बेचने से बचें। इसके बजाय अधिकृत ई-कचरा संग्रह व्यवस्था का उपयोग करें।
ई-कचरा संग्रह वाहन की सुविधा लेने के लिए नागरिक निम्नलिखित नंबरों पर फोन या संदेश भेज सकते हैं:
98829 71255
82880 79366
इस पहल की सफलता के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। यदि लोग अपने पुराने और खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को निर्धारित व्यवस्था के माध्यम से सौंपते हैं, तो ई-कचरे के अनुचित निपटान को कम करने और चंडीगढ़ को स्वच्छ एवं पर्यावरण के अनुकूल शहर बनाने में मदद मिल सकती है।













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