October 29, 2026 9:53 am

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नगर निगम चंडीगढ़ के कमरा नंबर 111 को लेकर चर्चाएं तेज, यहां तैनात रहे अधिकारियों के समय से पहले मूल कैडर लौटने का मामला सुर्खियों में

डॉ. इंद्रजीत रंगा के जाने के बाद खाली था कमरा, अब पीसीएस अधिकारी बलबीर राज सिंह ने संभाला कार्यभार; कमरे में बदलाव और अधिकारियों की तैनाती को लेकर उठ रहे सवाल

रमेश गोयत
चंडीगढ़, 19 अक्तूबर। नगर निगम चंडीगढ़ में कमरा नंबर 111 इन दिनों चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है। निगम के अतिरिक्त एवं संयुक्त आयुक्त स्तर के अधिकारियों के बैठने से जुड़े इस कमरे को लेकर पिछले कुछ वर्षों से तरह-तरह की चर्चाएं होती रही हैं। बताया जा रहा है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान इस कमरे में बैठने वाले हरियाणा कैडर के पांच अधिकारी निर्धारित कार्यकाल पूरा होने से पहले ही अपने मूल कैडर में लौट चुके हैं। इसी वजह से इस कमरे में होने वाली तैनाती और यहां बैठने वाले अधिकारियों के कार्यकाल को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
अब हरियाणा कैडर के एचसीएस अधिकारी डॉ. इंद्रजीत रंगा के नगर निगम से वापस जाने के बाद एक बार फिर यह कमरा चर्चा में आ गया है। डॉ. रंगा के करीब एक वर्ष के कार्यकाल के बाद वापस जाने से कमरा खाली हो गया था। इसके बाद यहां हरियाणा कैडर के एक अन्य अधिकारी की तैनाती की चर्चा थी। हालांकि, सोमवार को पीसीएस अधिकारी बलबीर राज सिंह ने अपने पहले वाले कमरे को छोड़कर कमरा नंबर 111 में अपना कार्यालय बना लिया। उनके इस बदलाव के बाद निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच इस कमरे को लेकर चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं।

पांच वर्षों में पांच अधिकारियों की वापसी चर्चा का विषय

नगर निगम चंडीगढ़ में अधिकारियों की तैनाती और उनके कार्यकाल को लेकर कमरा नंबर 111 का अपना अलग ही चर्चा का विषय बनना कई सवाल खड़े करता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले पांच वर्षों के दौरान इस कमरे में बैठने वाले हरियाणा कैडर के पांच अधिकारी समय से पहले अपने मूल कैडर में लौट चुके हैं।
हालांकि, अधिकारियों की वापसी के पीछे अलग-अलग प्रशासनिक कारण हो सकते हैं। ऐसे में केवल समय से पहले वापसी के आधार पर किसी अधिकारी, कमरे या प्रशासनिक व्यवस्था के संबंध में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। फिर भी, लगातार अधिकारियों के बदलने के कारण इस कमरे को लेकर चर्चाएं बनी गए।

नगर निगम चंडीगढ़ के कमरा नंबर 111 में सीरियल नंबर 13 से 18 तक तैनात रहे अधिकारियों का विवरण
नगर निगम चंडीगढ़ के अतिरिक्त/संयुक्त आयुक्तों के कार्यालय में लगे रिकॉर्ड बोर्ड के अनुसार, सीरियल नंबर 13 से 18 तक अधिकारियों की तैनाती का विवरण इस प्रकार है: जो  समय से पहले मूल काडर हरियाणा वापिस चले गए।

13. राजीव प्रसाद (HCS)
कार्यभार संभाला: 17 नवंबर 2021
कार्यकाल समाप्त: 10 फरवरी 2022
कुल अवधि: लगभग 2 महीने 24 दिन

14. शालिनी चेतल (HCS)
कार्यभार संभाला: 11 फरवरी 2022
कार्यकाल समाप्त: 11 नवंबर 2022
कुल अवधि: 9 महीने

15. पवित्र सिंह (PCS)
कार्यभार संभाला: 12 नवंबर 2022
कार्यकाल समाप्त: 21 अगस्त 2023
कुल अवधि: लगभग 9 महीने 9 दिन

पवित्र सिह आजकल  चंडीगढ़ ईस्ट में एसडीएम है

16. शंभू (HCS)
कार्यभार संभाला: 22 अगस्त 2023
कार्यकाल समाप्त: 17 जुलाई 2024
कुल अवधि: लगभग 10 महीने 25 दिन

17. शशि वसुंधरा (HCS)
कार्यभार संभाला: 17 जुलाई 2024
कार्यकाल समाप्त: 28 जुलाई 2025
कुल अवधि: लगभग 1 वर्ष 11 दिन

18. डॉ. इंद्रजीत (HCS)
• कार्यभार संभाला: 3 अक्टूबर 2025
• मूल कैडर में वापसी: 30 सितंबर 2026
• कुल कार्यकाल: लगभग 11 महीने 27 दिन (करीब एक वर्ष)

19. बलबीर राज सिंह ( PCS)

अक्तूबर 2026 से………

डॉ. इंद्रजीत रंगा की वापसी के बाद खाली हुआ था कमरा

एचसीएस अधिकारी डॉ. इंद्रजीत रंगा की नगर निगम से वापसी के बाद कमरा नंबर 111 खाली हो गया था। इसके बाद चर्चा थी कि अगले सप्ताह हरियाणा कैडर का एक अन्य अधिकारी नगर निगम में कार्यभार संभालकर इस कमरे में बैठेगा। लेकिन सोमवार को पीसीएस अधिकारी बलबीर राज ने अपने साथ लगते कमरे से कार्यालय बदलकर कमरा नंबर 111 में बैठना शुरू कर दिया।
इस बदलाव ने निगम में एक बार फिर चर्चा को हवा दे दी है। सवाल यह है कि जब इस कमरे में दूसरे अधिकारी की तैनाती की चर्चा थी, तो बलबीर राज ने अपना कार्यालय यहां क्यों स्थानांतरित किया? क्या यह केवल सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था के तहत किया गया बदलाव है या इसके पीछे कोई अन्य कारण है? फिलहाल इन सवालों के जवाब सामने आना बाकी है।

रिश्वत मामले में पकड़े गए इंस्पेक्टर को लेकर भी चर्चाएं

पीसीएस अधिकारी बलबीर राज का नाम इन दिनों नगर निगम के एक ऐसे इंस्पेक्टर से जुड़े मामले के संदर्भ में भी चर्चाओं में बताया जा रहा है, जिसे सीबीआई ने कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। इस मामले को लेकर निगम के भीतर तरह-तरह की बातें होने की चर्चा है।
हालांकि, इस प्रकरण में बलबीर राज की किसी भूमिका या संलिप्तता को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ कोई आधिकारिक आरोप या जांच का निष्कर्ष सामने आया है या नहीं। केवल चर्चाओं के आधार पर किसी अधिकारी की छवि या प्रतिष्ठा पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या इस मामले में कुछ लोग अपने बचाव के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के नाम का उल्लेख कर रहे हैं या फिर चर्चाओं के पीछे कोई ठोस तथ्य हैं। इन सभी पहलुओं की वास्तविकता संबंधित रिकॉर्ड, आधिकारिक बयान और जांच के तथ्यों से ही स्पष्ट हो सकती है।

प्रशासनिक बदलाव या महज संयोग?

कमरा नंबर 111 में अधिकारियों के बदलते कार्यकाल और अब बलबीर राज के वहां कार्यालय स्थानांतरित करने के बाद निगम के प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। एक ओर पिछले वर्षों में अधिकारियों की समय से पहले वापसी की बात सामने आ रही है, वहीं दूसरी ओर मौजूदा कार्यालय परिवर्तन ने इस विषय को फिर से चर्चा में ला दिया है।
हालांकि, किसी कमरे में बैठने और वहां से अधिकारियों के स्थानांतरण के बीच सीधे संबंध का कोई प्रमाण सामने आए बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। अधिकारियों की तैनाती, स्थानांतरण और कार्यालय बदलने के पीछे प्रशासनिक जरूरतें भी हो सकती हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि कमरा नंबर 111 में बलबीर राज कितने समय तक बैठते हैं और आने वाले दिनों में नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था में क्या बदलाव होते हैं। फिलहाल, यह कमरा अधिकारियों के कार्यकाल, कार्यालय परिवर्तन और निगम के भीतर चल रही चर्चाओं के कारण सुर्खियों में बना हुआ है।
नोट: इस मामले में संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष और कार्यालय परिवर्तन के कारणों की पुष्टि होने पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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