एडवोकेट विजय बंसल ने अमित शाह को सौंपे दस्तावेजी साक्ष्य
चंडीगढ़/पंचकूला, 15 जनवरी 2026: चंडीगढ़ यूटी प्रशासन में हरियाणा कैडर के आईएएस और एचसीएस अधिकारियों को उनकी योग्यता, वरिष्ठता और कैडर नियमों के अनुरूप बराबर की नियुक्तियां न दिए जाने का मुद्दा अब गंभीर रूप ले चुका है। शिवालिक विकास मंच के प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय बंसल एडवोकेट ने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को विस्तृत ज्ञापन के साथ दस्तावेजी साक्ष्य भेजे हैं।
विजय बंसल ने बताया कि उन्होंने पहले भी गृह मंत्रालय के समक्ष यह मामला उठाया था, जिस पर मंत्रालय की ओर से उनसे शिकायत से जुड़े दस्तावेजी प्रमाण मांगे गए थे। गृह मंत्रालय की मांग के अनुरूप उन्होंने आज 15 जनवरी 2026 को चंडीगढ़ यूटी प्रशासन में आईएएस और एचसीएस अधिकारियों की पोस्टिंग, डेपुटेशन नीति और कथित भेदभाव से जुड़े सभी दस्तावेज केंद्रीय गृह मंत्री को भेज दिए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब हरियाणा कैडर के अधिकारियों को न्याय मिलेगा और उनकी शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई होगी।
“चंडीगढ़ पर हरियाणा-पंजाब दोनों का समान अधिकार”
विजय बंसल एडवोकेट ने कहा कि चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश होने के साथ-साथ हरियाणा की राजधानी भी है। ऐसे में यूटी प्रशासन पर हरियाणा और पंजाब दोनों राज्यों के अधिकारियों का समान अधिकार है। इसके बावजूद हरियाणा कैडर के अधिकारियों के साथ लगातार भेदभाव किया जा रहा है, जो न केवल नियमों के खिलाफ है बल्कि प्रशासनिक संतुलन को भी बिगाड़ रहा है।

मानसिक प्रताड़ना के चलते लौट रहे अधिकारी
विजय बंसल ने आरोप लगाया कि चंडीगढ़ यूटी प्रशासन में प्रतिनियुक्ति पर आए कई हरियाणा कैडर के एचसीएस अधिकारी मानसिक प्रताड़ना और अपमानजनक व्यवहार के कारण समय से पहले ही अपने मूल कैडर हरियाणा लौटने को मजबूर हुए हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा कैडर के अधिकारियों को अक्सर उनकी रैंक के समकक्ष पद न देकर उनसे कनिष्ठ या अन्य राज्य कैडर के अधिकारियों के अधीन तैनात किया जाता है, जिससे वे स्वयं को अपमानित महसूस करते हैं।
कई उदाहरणों का किया उल्लेख
ज्ञापन में विजय बंसल ने स्पष्ट किया कि हरियाणा कैडर के एचसीएस अधिकारी सुमित सिहाग को लगातार भेदभावपूर्ण व्यवहार और उपयुक्त पोस्टिंग न मिलने के कारण समय से पहले हरियाणा लौटना पड़ा। इससे पहले शंभू राठी, ऋचा राठी और शशि वसुंदरा भी पोस्टिंग में भेदभाव के चलते चंडीगढ़ से वापिस जा चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि ऋचा राठी जैसी सीनियर हरियाणा कैडर अधिकारी को एक पीसीएस अधिकारी के अधीन चार्ज देकर लगाया गया, जिससे आहत होकर वे मात्र चार महीने में ही चंडीगढ़ छोड़ने को मजबूर हो गईं। इससे पहले भी दो एचसीएस अधिकारी एक वर्ष के भीतर ही वापस लौट चुके हैं।
सुमित सिहाग के लौटने के बाद हरियाणा कैडर की एक स्वीकृत एचसीएस पोस्ट पिछले करीब चार महीनों से खाली पड़ी है, जबकि संबंधित पैनल उपलब्ध होने के बावजूद यूटी प्रशासन द्वारा नई नियुक्ति नहीं की जा रही है।
60:40 डेपुटेशन नीति का उल्लंघन
विजय बंसल ने आरोप लगाया कि गृह मंत्रालय द्वारा निर्धारित हरियाणा-पंजाब 60:40 डेपुटेशन नीति का पिछले लगभग दो वर्षों से पालन नहीं किया जा रहा है। इसके कारण प्रशासनिक असंतुलन पैदा हो रहा है और एक विशेष कैडर के साथ भेदभाव की स्थिति बन गई है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में दानिक्स कैडर के चार अधिकारी चंडीगढ़ में तैनात हैं, जिनमें से दो को एसडीएम और एस्टेट ऑफिसर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह स्थिति सीवीसी दिशानिर्देशों और प्रशासनिक संतुलन की भावना के विपरीत है। इसके अलावा कई अधिकारी पांच वर्षों से अधिक समय से एक ही पद पर तैनात हैं, जो रोटेशन नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
राजस्व विभाग की बदहाल स्थिति
विजय बंसल ने कहा कि चंडीगढ़ के राजस्व विभाग में आज तक एक भी तहसीलदार की नियमित पोस्टिंग नहीं की गई है। वर्तमान में एस्टेट ऑफिस में तैनात तीन तहसीलदार ही राजस्व रजिस्ट्री का कार्य संभाल रहे हैं, जबकि विभाग में एक भी स्थायी रजिस्ट्री क्लर्क नहीं है। इससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों तक जिला उपायुक्त से आबकारी एवं कराधान आयुक्त का प्रभार हटाकर यूटी कैडर के एक कनिष्ठ आईएएस अधिकारी को सौंप दिया गया, जिससे विभाग को भारी राजस्व नुकसान हुआ और शराब तस्करी में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। बाद में जब राजस्व हानि स्पष्ट हुई, तब लगभग दो वर्ष बाद यह प्रभार पुनः जिला उपायुक्त को सौंपा गया।
चंडीगढ़ यूटी में जीएसटी–सेल्स टैक्स के लिए अलग स्टाफ न होना भी राजस्व नुकसान का बड़ा कारण
चंडीगढ़ यूटी प्रशासन में जीएसटी और सेल्स टैक्स के लिए अलग से समर्पित स्टाफ न होना भी लगातार हो रहे राजस्व नुकसान की एक बड़ी वजह बनता जा रहा है। प्रशासनिक जानकारों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि केंद्र शासित प्रदेश होने के बावजूद चंडीगढ़ में कर वसूली व्यवस्था अपेक्षित रूप से मजबूत नहीं है, जिसका सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, चंडीगढ़ में जीएसटी और सेल्स टैक्स की जिम्मेदारी सीमित अधिकारियों और संयुक्त स्टाफ पर निर्भर है, जबकि अधिकांश राज्यों में जीएसटी और सेल्स टैक्स के लिए अलग-अलग प्रशिक्षित और समर्पित स्टाफ तैनात किया गया है। अलग स्टाफ न होने के कारण न तो नियमित जांच प्रभावी ढंग से हो पा रही है और न ही कर चोरी पर समय रहते रोक लग पा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी और सेल्स टैक्स जैसे महत्वपूर्ण राजस्व स्रोतों के लिए अलग कैडर और पर्याप्त स्टाफ होना जरूरी है। अन्य राज्यों में जहां अलग विभागीय ढांचा मौजूद है, वहां कर संग्रहण बेहतर होने के साथ-साथ निगरानी भी प्रभावी रहती है। इसके विपरीत चंडीगढ़ में सीमित मानव संसाधन के चलते फाइलें लंबित रहती हैं और कर निर्धारण व वसूली की प्रक्रिया प्रभावित होती है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं शिवालिक विकास मंच के प्रदेश अध्यक्ष विजय बंसल एडवोकेट ने भी इस मुद्दे को केंद्रीय गृह मंत्रालय के समक्ष उठाया है। उन्होंने कहा कि जीएसटी और सेल्स टैक्स के लिए अलग से स्टाफ न होना स्पष्ट रूप से प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है और इससे यूटी प्रशासन को हर वर्ष करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका रहती है। उन्होंने मांग की कि चंडीगढ़ यूटी में अन्य राज्यों की तर्ज पर जीएसटी और सेल्स टैक्स के लिए अलग व स्थायी स्टाफ की नियुक्ति की जाए।
गृह मंत्रालय से प्रमुख मांगें
विजय बंसल एडवोकेट ने केंद्रीय गृह मंत्री से मांग की है कि
हरियाणा-पंजाब 60:40 डेपुटेशन नीति का सख्ती से पालन कराया जाए,
हरियाणा कैडर के अधिकारियों के साथ हो रहे भेदभाव की निष्पक्ष जांच कराई जाए,
रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां की जाएं,
और सीवीसी नियमों के उल्लंघन के मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
जीएसटी और सेल्स टैक्स के लिए अलग से स्टाफ,
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की सकारात्मक और निष्पक्ष कार्रवाई से चंडीगढ़ यूटी प्रशासन में संतुलित, पारदर्शी और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित हो सकेगी, जिससे न केवल अधिकारियों का मनोबल बढ़ेगा बल्कि आम जनता और राजस्व व्यवस्था को भी लाभ मिलेगा।











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