चंडीगढ़ साइबर क्राइम पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 38 लाख रुपये की ठगी का खुलासा
चंडीगढ़, 15 जनवरी 2026 चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने “डिजिटल गिरफ्तारी” के नाम पर की जा रही एक बड़ी साइबर ठगी का पर्दाफाश करते हुए छह मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपियों को एफआईआर संख्या 03 दिनांक 09.01.2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं में गिरफ्तार किया गया है।
यह पूरी कार्रवाई एसपी साइबर क्राइम सुश्री गीतांजलि खंडेलवाल, आईपीएस के नेतृत्व में, डीएसपी श्री ए. वेंकटेश के मार्गदर्शन और सेक्टर-17 स्थित साइबर क्राइम थाना प्रभारी सुश्री एराम रिज़वी की निगरानी में की गई।
डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर 38 लाख की ठगी
पुलिस के अनुसार, यह मामला चंडीगढ़ निवासी एक व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज किया गया। पीड़ित को 7 जनवरी 2026 की शाम अज्ञात नंबरों से कॉल आए, जिनमें कॉल करने वालों ने खुद को मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन का अधिकारी बताया। आरोप लगाया गया कि उसका बैंक कार्ड मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हुआ है।
इसके बाद व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर पुलिस वर्दी पहने व्यक्ति ने फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाकर डराया। “सीबीआई निदेशक” के नाम से भी कॉल कर आधार कार्ड के दुरुपयोग की बात कही गई। लगातार धमकियों और मानसिक दबाव में आकर पीड़ित को आरटीजीएस के जरिए 38 लाख रुपये ट्रांसफर करने पर मजबूर कर दिया गया। पीड़ित दंपति को करीब 24 घंटे तक फोन पर ही “डिजिटल बंधक” बनाकर रखा गया।
ऐसे हुआ खुलासा
जांच में साइबर क्राइम पुलिस ने बैंक खातों की केवाईसी और लेन-देन का विश्लेषण किया। पता चला कि 8 जनवरी को 4.50 लाख रुपये चेक के जरिए निकाले गए, जो फिरोजपुर निवासी वीना रानी के खाते से जुड़े थे। तकनीकी निगरानी के आधार पर उसे चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया गया।
उसके खुलासे पर पुलिस ने सेक्टर-45/बुरैल इलाके से धर्मिंदर उर्फ लड्डी, सुखदीप उर्फ सुख और सतनाम सिंह को दबोचा। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को मुकेश उर्फ प्रिंस की मदद से क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में बदला जा रहा था। इसके बाद मुकेश को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
चेन्नई तक फैला नेटवर्क
आगे की जांच में खुलासा हुआ कि पूरे नेटवर्क को चेन्नई से फजल रॉकी संचालित कर रहा था। पुलिस टीम ने तमिलनाडु के चेन्नई में छापा मारकर उसे गिरफ्तार किया। उसके पास से मोबाइल फोन, लैपटॉप, पासबुक और चेकबुक बरामद की गईं। पूछताछ में पता चला कि वह टेलीग्राम के जरिए कुछ विदेशी (चीनी) नागरिकों के संपर्क में था और उनके निर्देशों पर रकम निकालकर USDT में बदलता था।
बरामदगी
पुलिस ने आरोपियों से नकदी, मोबाइल फोन, लैपटॉप, कई बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। सभी मोबाइल और बैंक खातों को साइबर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
पुलिस की जनता से अपील
कोई भी पुलिस/सीबीआई/ईडी अधिकारी फोन या व्हाट्सएप पर पैसे नहीं मांगता।
फर्जी गिरफ्तारी वारंट या वीडियो कॉल पर भरोसा न करें।
डराकर पैसे ट्रांसफर करने को कहे तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस से संपर्क करें।
अपने बैंक खाते या सिम कार्ड किसी को किराए पर न दें।
आधार बायोमेट्रिक लॉक रखें और संदिग्ध कॉल को तुरंत ब्लॉक करें।
चंडीगढ़ साइबर क्राइम पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की डिजिटल गिरफ्तारी पूरी तरह फर्जी होती है और आम जनता को सतर्क रहने की आवश्यकता है।











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