August 5, 2026 7:07 am

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हर आंधी में बेनकाब होती प्रशासनिक तैयारी ‘सिटी ब्यूटीफुल’ की सुंदरता पर भारी अव्यवस्था

चंडीगढ़—देश का पहला नियोजित शहर और “सिटी ब्यूटीफुल”—अपनी सुव्यवस्थित सेक्टर योजना, खुली हरियाली और अनुशासित जीवनशैली के लिए जाना जाता है। लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि हर आंधी और बारिश के बाद यह शहर अव्यवस्था, असुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही की तस्वीर बन जाता है। मौसम की हल्की-सी तीव्रता भी शहर की तैयारियों की पोल खोल देती है।
हालिया आंधी और बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में सड़कों पर टूटी पेड़ों की भारी शाखाएँ बिखरी रहीं। प्रमुख मार्गों से लेकर आंतरिक गलियों तक यातायात बाधित रहा। कई स्थानों पर घंटों तक शाखाएँ नहीं हटाई गईं, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्कूल जाने वाले बच्चे, कार्यालय जाने वाले कर्मचारी और बुजुर्ग विशेष रूप से प्रभावित हुए। सबसे गंभीर चिंता का विषय यह रहा कि एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही भी बाधित हुई।
इससे भी अधिक चिंताजनक तथ्य यह है कि कई स्थानों पर पेड़ों की भारी शाखाएँ चलते वाहनों और पैदल राहगीरों पर गिरने की घटनाएँ सामने आईं। सौभाग्य से इस बार कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई, लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रशासन हर बार नागरिकों की सुरक्षा को किस्मत के भरोसे छोड़ सकता है? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही ठोस कदम उठाए जाएंगे?
यह स्थिति नई नहीं है। चंडीगढ़ के निवासी, सामाजिक संगठन और रेज़िडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWAs) वर्षों से प्रशासन को चेताते आ रहे हैं कि मानसून और तेज़ हवाओं से पहले पेड़ों की वैज्ञानिक ढंग से छंटाई और नियमित रखरखाव किया जाना चाहिए। कमजोर, बीमार और असंतुलित पेड़ों की समय रहते पहचान आवश्यक है। इसके बावजूद हर साल वही लापरवाही दोहराई जाती है और उसकी कीमत आम जनता को चुकानी पड़ती है।
हाल ही में कई RWAs के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव से मुलाकात कर तथ्यों और छायाचित्रों सहित ज्ञापन सौंपा। इन छायाचित्रों में शहर की वास्तविक स्थिति स्पष्ट दिखाई देती है। इसके बावजूद ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस और समयबद्ध कार्रवाई नज़र नहीं आती। प्रशासन की प्रतिक्रिया अब एक औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह गई है—मुलाकात, आश्वासन और फिर लंबी चुप्पी।
सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह है कि ऐसी घटनाओं के बाद भी किसी विभाग या अधिकारी की स्पष्ट जवाबदेही तय नहीं होती। यह साफ़ नहीं किया जाता कि पेड़ों के रखरखाव की जिम्मेदारी किस विभाग की है और उसकी निगरानी किस स्तर पर होती है। न कोई सार्वजनिक कार्ययोजना सामने आती है और न ही भविष्य की रणनीति साझा की जाती है।
चंडीगढ़ की हरियाली उसकी आत्मा है, लेकिन हरियाली का संरक्षण केवल पेड़ लगाने तक सीमित नहीं हो सकता। इसके लिए वैज्ञानिक प्रबंधन, नियमित निरीक्षण और पेशेवर दृष्टिकोण ज़रूरी है। पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुरक्षा को आमने-सामने खड़ा करना गलत है—सही योजना और इच्छाशक्ति से दोनों में संतुलन संभव है।
आज ज़रूरत है कि प्रशासन आंधी-बारिश के बाद की तात्कालिक कार्रवाई से आगे बढ़कर पूर्व-तैयारी आधारित व्यवस्था विकसित करे। मानसून से पहले पेड़ों का ऑडिट, कमजोर पेड़ों की सूची, जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान और प्रभावी आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र तय किया जाना चाहिए। “सिटी ब्यूटीफुल” की असली सुंदरता तभी सामने आएगी, जब उसके नागरिक हर मौसम में स्वयं को सुरक्षित महसूस करेंगे।

लेखक: आर. के. गर्ग
सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन, चंडीगढ़

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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