July 2, 2026 7:12 am

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चंडीगढ़ के सिनेमाघरों में दिव्यांगों के अधिकारों की अनदेखी, आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम उल्लंघन पर गंभीर शिकायत

सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने उठाए सुलभता पर सवाल, सभी सिनेमा हॉलों के ऑडिट और कार्रवाई की मांग
चंडीगढ़: केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के सिनेमाघरों में दिव्यांग व्यक्तियों, वरिष्ठ नागरिकों और कम गतिशीलता वाले लोगों के लिए बुनियादी सुलभता सुविधाओं की भारी कमी सामने आई है। विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम (आरपीडब्ल्यूडी), 2016 के लगातार उल्लंघन को लेकर सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने सिनेमा प्रबंधन और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ औपचारिक सार्वजनिक शिकायत दर्ज कराई है।
एसोसिएशन के अनुसार, हाल ही में चंडीगढ़ के एक सिनेमा हॉल में की गई यात्रा के दौरान यह पाया गया कि वहां न तो रैंप की व्यवस्था थी, न लिफ्ट, न व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित बैठने की सुविधा और न ही सुलभ शौचालय उपलब्ध थे। सभी सीटों तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ता है, जो वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए न केवल असुविधाजनक बल्कि खतरनाक भी है।

बुजुर्ग महिला की आपबीती ने खोली पोल
शिकायत में एक बुजुर्ग और कमजोर महिला का उदाहरण देते हुए बताया गया कि उन्हें अपनी सीट तक पहुंचने के लिए पूरी सीढ़ी चढ़नी पड़ी। हर कदम पर गिरने और चोट लगने का खतरा बना रहा। फिल्म के दौरान उन्होंने शौचालय जाने से भी परहेज किया, क्योंकि उन्हें डर था कि दोबारा सीढ़ियां चढ़ पाना उनके लिए संभव नहीं होगा। शो के बाद सीढ़ियों से उतरते समय भी वे थकी हुई और परेशान नजर आईं। यह घटना किसी एक व्यक्ति की परेशानी नहीं, बल्कि खतरनाक और दुर्गम बुनियादी ढांचे का परिणाम है।

सिर्फ एक सिनेमा नहीं, पूरी व्यवस्था पर सवाल
सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन का कहना है कि यह समस्या किसी एक सिनेमा हॉल तक सीमित नहीं है, बल्कि चंडीगढ़ में संचालित अधिकांश सिनेमाघरों की यही स्थिति है। आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम, 2016 के तहत सिनेमा हॉलों में बाधा रहित प्रवेश, व्हीलचेयर के लिए सुरक्षित सीटें और सुलभ शौचालय उपलब्ध कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसके बावजूद सिनेमा संचालक खुलेआम कानून का उल्लंघन कर रहे हैं।

लाइसेंसिंग प्रक्रिया पर उठे सवाल
शिकायत में प्रशासनिक निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। एसोसिएशन ने पूछा है कि जब सुलभता और सुरक्षा के मानदंड पूरे ही नहीं किए जा रहे, तो सिनेमा लाइसेंस किस आधार पर जारी या नवीनीकृत किए जा रहे हैं। यदि अनुपालन केवल कागजों तक सीमित है, तो यह प्रशासनिक निष्क्रियता और अवैधता की मौन स्वीकृति के समान है।

भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक स्थिति
सुलभता की कमी से यह संदेश जाता है कि सार्वजनिक मनोरंजन स्थल केवल शारीरिक रूप से सक्षम लोगों के लिए हैं। यह दृष्टिकोण न केवल भेदभावपूर्ण है, बल्कि असंवैधानिक, सामाजिक रूप से प्रतिगामी और सभ्य समाज के मूल्यों के खिलाफ भी है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि आज गरिमा का हनन हो रहा है, और कल यही स्थिति गंभीर दुर्घटना या जान-माल के नुकसान का कारण बन सकती है।

सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन की प्रमुख मांगें:
चंडीगढ़ के सभी सिनेमा हॉलों का तत्काल सुलभता ऑडिट कराया जाए।
नियमों का उल्लंघन करने वाले सिनेमाघरों के खिलाफ सख्त दंड और कानूनी कार्रवाई की जाए।
सिनेमा लाइसेंस जारी करने और नवीनीकरण की प्रक्रिया को आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम, 2016 के अनुपालन से अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए।
एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके गर्ग ने कहा कि यदि कानून केवल कागजों तक सीमित रह जाए और कमजोर नागरिकों को मनोरंजन के लिए अपनी सुरक्षा दांव पर लगानी पड़े, तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक विफलता होगी। उन्होंने इस मामले में तत्काल कार्रवाई और इसके परिणाम सार्वजनिक करने की मांग की है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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