चंडीगढ़: चंडीगढ़ नगर निगम में आयोजित विदाई समारोह महज़ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि बीते एक वर्ष के कार्यकाल की चुनौतियों, दबावों और लिए गए फैसलों का भावनात्मक लेखा-जोखा बन गया। कार्यकाल का उल्लेख होते ही माहौल गंभीर और भावुक हो गया। मेयर खुद को भावनाओं से रोक नहीं सकीं और उन्होंने अपने अनुभव साझा किए।
मेयर ने कहा कि यह जिम्मेदारी किसी पद तक सीमित नहीं थी। कई बार परिस्थितियां कठिन रहीं, फाइलें अटकीं और फैसलों पर सवाल भी उठे, लेकिन शहर के हित को हमेशा सर्वोपरि रखा गया। उन्होंने कहा, “आधे मन से काम करना मेरे स्वभाव में नहीं है। जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाया।”
कर्मचारियों की आंखें भी हुईं नम
विदाई समारोह के दौरान निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। कर्मचारियों ने कहा कि कार्यकाल के दौरान संवाद बना रहा और फैसलों में टीम को साथ लेकर चला गया। इसी वजह से सीमित समय के बावजूद कई महत्वपूर्ण कार्य पूरे हो सके। इस मौके पर कई कर्मचारी भावुक हो गए और कहा कि जनसेवा केवल राजनीति तक सीमित नहीं होती, बल्कि शहरवासियों के लिए काम करना ही असली संतोष देता है। मेयर ने निगम अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया।
“यह अंत नहीं, एक पड़ाव है”
कार्यक्रम के दौरान केक काटा गया और सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। तालियों की गूंज के बीच कई पल ऐसे रहे जब आंखें नम हो गईं। विदाई संदेश में मेयर ने कहा, “यह अंत नहीं, बल्कि एक पड़ाव है। चंडीगढ़ के लिए आगे भी सेवा जारी रहेगी।”
आज मिलेगा चंडीगढ़ को नया मेयर
उल्लेखनीय है कि आज चंडीगढ़ को 29वां मेयर मिलेगा। इस बार नगर निगम के इतिहास में पहली बार 31 वर्ष पुरानी चुनाव प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। पार्षद अब बैलेट पेपर की बजाय हाथ उठाकर मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव करेंगे।











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