August 29, 2026 3:22 am

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केंद्रीय बजट पर पंजाब कृषि मंत्री की नाराजगी, किसानों के लिए कोई राहत नहीं मिलने पर जताई चिंता

चंडीगढ़, 1 फरवरी: पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, स. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर गहरी निराशा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस बजट में पंजाब और यहां के किसानों की जरूरतों को पूरी तरह अनदेखा किया गया है।
कृषि संकट और बढ़ती लागत पर चिंता
केंद्रीय बजट के प्रस्तावों का विवरण आने तक वास्तविक प्रभाव स्पष्ट नहीं है, लेकिन स. खुड्डियां का कहना है कि केंद्र सरकार ने किसानों के हित में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। उन्होंने कहा,
“देश की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है, लेकिन बजट इस क्षेत्र की चुनौतियों को हल करने में विफल रहा है। डीजल, खाद, कीटनाशक की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन बजट में कोई राहत नहीं दी गई।”
बाढ़ प्रभावित पंजाब के लिए विशेष पैकेज की कमी
पंजाब को पिछले वर्षों में बढ़ी बाढ़ से भारी नुकसान झेलना पड़ा, लेकिन केंद्रीय राहत पैकेज राज्य को अब तक नहीं मिला। मंत्री ने कहा,
“हमारे किसानों को तुरंत प्रति एकड़ 20,000 रुपये का मुआवजा दिया गया, जबकि केंद्र कोई ठोस मदद नहीं कर रहा।”
एमएसपी और फसल बीमा पर कटौती का आरोप
खुड्डियां ने फसल बीमा योजना के लिए बजट में कटौती और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर घोषणाओं की अनुपस्थिति को गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा,
“सहायता बढ़ाने के बजाय, केंद्र सरकार ने इसमें कटौती की है। ऐसे समय में जब किसान मुसीबत में हैं, केंद्र ने पीठ दिखा दी है।”
केंद्र पर भेदभाव और आर्थिक उपेक्षा का आरोप
कृषि मंत्री ने केंद्र पर लगातार भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि पंजाब देश की खाद्य सुरक्षा में बड़ा योगदान देता है, फिर भी राज्य के अधिकार हमेशा नजरअंदाज किए जाते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से निष्पक्ष हिस्सेदारी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर ध्यान देने की मांग की।
पंजाब सरकार का सक्रिय प्रयास
खुड्डियां ने यह भी बताया कि जहां केंद्र सरकार विफल रही, वहां पंजाब सरकार लगातार किसानों के कल्याण के लिए कदम उठा रही है। उनका कहना था कि राज्य सरकार किसानों की मुश्किलों को समझते हुए त्वरित राहत और मुआवजा दे रही है।
स. खुड्डियां ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बजट किसानों की बढ़ती मुश्किलों और जटिलताओं को हल करने में असफल रहा है, और पंजाब सरकार हर संभव प्रयास करेगी कि राज्य को कृषि और ग्रामीण विकास के रास्ते पर वापस लाया जा सके।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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