October 12, 2026 3:37 pm

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मौजूदा बजट न ज़मीनी हकीकत से जुड़ा है, न जनहित से – राव नरेंद्र सिंह

चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने केंद्रीय बजट को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि यह बजट न तो ज़मीनी हकीकत से जुड़ा है और न ही जनहित की अपेक्षाओं पर खरा उतरता है। उन्होंने इसे पूरी तरह आधारहीन और आम जनता की जरूरतों से परे बताया।

राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि बजट में आम आदमी, किसान और ग्रामीण भारत की खुलकर अनदेखी की गई है। महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की कर्जमाफी तथा पानी-बिजली संकट जैसे गंभीर मुद्दों पर कोई ठोस राहत पैकेज नहीं दिया गया। विशेष रूप से हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्य की समस्याओं को बजट में नजरअंदाज किया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा जैसी ग्रामीण रोजगार योजनाओं में पहले से ही कटौती जारी है और भुगतान में हो रही देरी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है। यह बजट ग्रामीण रोजगार को बढ़ाने के बजाय उसे और नुकसान पहुंचाने वाला साबित होगा।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि बजट का असली फायदा बड़े उद्योगपतियों और अमीर वर्ग को पहुंचाने की कोशिश की गई है। कैपेक्स बढ़ोतरी से इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लाभ जरूर मिलेगा, लेकिन इसका असर केवल 5 से 10 प्रतिशत आबादी तक सीमित रहेगा। गरीब, एससी-एसटी वर्ग, मध्यम वर्ग और युवाओं के लिए प्रत्यक्ष लाभ लगभग नगण्य है।

राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार विकास और सुधारों की बात तो करती है, लेकिन ये सुधार जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच रहे। उन्होंने कहा कि यह सुधार नहीं बल्कि “विकृति” वाला बजट है, जिसमें सुधार के नाम पर आमजन की समस्याएं और बढ़ रही हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा में किसान आंदोलन, बेरोजगारी और ग्रामीण संकट जैसे मुद्दे लगातार बने हुए हैं, लेकिन बजट में राज्य के लिए किसी भी प्रकार के विशेष पैकेज की घोषणा नहीं की गई। यह बजट स्पष्ट रूप से गरीब-विरोधी है।

राव नरेंद्र सिंह ने सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठाए, जिसमें बजट को फिस्कल डिसिप्लिन और दीर्घकालिक विकास (विकसित भारत 2047) पर केंद्रित बताया गया है। उन्होंने कहा कि कैपेक्स को विकास का इंजन बनाकर निजी निवेश आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन महंगाई नियंत्रण, रोजगार सृजन और गरीबी उन्मूलन जैसे तात्कालिक और जरूरी मुद्दों पर कोई निर्णायक कदम नहीं उठाए गए।

उन्होंने कहा कि यह बजट सिर्फ कागजी विकास को दर्शाता है, जिसका जमीनी हकीकत से कोई मेल नहीं है। बड़े-बड़े आंकड़े ग्रामीण भारत और हरियाणा की वास्तविक परेशानियों को प्रतिबिंबित नहीं करते।

अंत में राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि कुल मिलाकर यह बजट रिफॉर्म-ओरिएंटेड जरूर दिखता है, लेकिन जन-केंद्रित नहीं है। वास्तव में यह बजट सिर्फ पूंजीपतियों को मजबूत करने वाला है और आम जनता के लिए एक छलावा साबित होगा।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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