September 23, 2026 12:25 am

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चंडीगढ़ की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की कोशिश, 6,545.52 करोड़ का बजट जारी, नगर निगम की ‘बल्ले-बल्ले’

शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस और शहरी विकास पर खास फोकस;

चंडीगढ़। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए चंडीगढ़ को 6,545.52 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। इस बजट के जरिए ट्राइसिटी की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का खाका तैयार किया गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, परिवहन और शहरी विकास को मजबूत करने के साथ-साथ प्रशासनिक खर्च पर नियंत्रण रखने की रणनीति इसमें साफ नजर आती है। पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी के जरिए इंफ्रास्ट्रक्चर को गति देने का रोडमैप भी पेश किया गया है।
हालांकि, पिछले वित्तीय वर्ष में बजट का पूरा और प्रभावी उपयोग न हो पाने के कारण केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ के बजट में 437.66 करोड़ रुपये की कटौती भी की है। इसके बावजूद प्रशासन का दावा है कि यदि बिजली निजीकरण से जुड़े प्रावधानों को हटा दिया जाए, तो कुल बजट में 4.63 प्रतिशत यानी 282.78 करोड़ रुपये की वास्तविक बढ़ोतरी हुई है।

रेवेन्यू पर ज्यादा, विकास कार्यों पर सीमित बजट
केंद्र सरकार द्वारा जारी कुल बजट में से 5,939.52 करोड़ रुपये रेवेन्यू हेड के तहत दिए गए हैं, जबकि केवल 606 करोड़ रुपये कैपिटल हेड यानी विकास कार्यों के लिए रखे गए हैं। विकास मद में सीमित बजट मिलने से नई योजनाओं को जमीन पर उतारना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2025-26 में चंडीगढ़ को 6,983.18 करोड़ रुपये का बजट मिला था, लेकिन संशोधित अनुमानों के अनुसार लगभग 631 करोड़ रुपये खर्च नहीं हो पाए। इसी वजह से केंद्र सरकार ने इस बार बजट में कटौती की है।

शिक्षा पर सबसे बड़ा निवेश
इस बजट में शिक्षा क्षेत्र को सबसे अधिक प्राथमिकता दी गई है। शिक्षा के लिए 1,295.38 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों के बुनियादी ढांचे के साथ-साथ शैक्षणिक गतिविधियों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था को मिलेगा बल
शहर को सुरक्षित और हाईटेक बनाने के उद्देश्य से पुलिस विभाग के बजट में बढ़ोतरी की गई है। पुलिस के लिए 970.53 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो कुल बजट का लगभग 14.83 प्रतिशत है। बढ़ते साइबर अपराध और शहरी सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए आधुनिक उपकरण, विशेषज्ञ टीमों के गठन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किया जाएगा।

स्वास्थ्य सेवाओं और पीजीआई पर जोर
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 955.41 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। वहीं, पीजीआई (PGI) को भी बड़ी राहत मिली है। पीजीआई का बजट पिछले वर्ष की तुलना में 141.79 करोड़ रुपये बढ़ाया गया है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं और शैक्षणिक गतिविधियों के विस्तार का रास्ता खुलेगा।

आवास, शहरी विकास और परिवहन
आवास एवं शहरी विकास के लिए 1,127.95 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इससे सड़कों की मरम्मत, जलापूर्ति, सफाई व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है।
परिवहन क्षेत्र पर कुल बजट का लगभग 7.02 प्रतिशत खर्च किया जाएगा। इसके लिए 459.51 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जिससे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने और ट्रैफिक प्रबंधन में सुधार किया जाएगा।

नगर निगम की ‘बल्ले-बल्ले’
नगर निगम के बजट में इस बार सबसे अधिक, करीब 36 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे सड़कें, सीवरेज, जलापूर्ति, पार्कों का रखरखाव और स्वच्छता अभियानों को गति मिलेगी।

पूंजीगत परिसंपत्तियों के सृजन पर ध्यान
पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए लगभग 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा अनुदान और सामान्य सहायता के तहत भी हजारों करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जिससे प्रशासनिक कार्यों और कर्मचारियों से जुड़ी जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा।
कुल मिलाकर
कुल मिलाकर, चंडीगढ़ के लिए पेश किया गया यह बजट सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकास की जमीन तैयार करने की कोशिश करता नजर आता है। हालांकि, विकास कार्यों के लिए सीमित पूंजीगत बजट और पिछली वित्तीय लापरवाहियों के कारण आने वाले समय में प्रशासन के सामने चुनौतियां भी कम नहीं होंगी।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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