August 29, 2026 2:25 pm

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चंडीगढ़: स्मार्ट सिटी या डिसेबल-ब्लाइंड सिटी?

आर.के. गर्ग

कुछ दिन पहले मैंने चंडीगढ़ के एक सिनेमा हॉल में दिव्यांग-अनुकूल (डिसेबल-फ्रेंडली) सुविधाओं की भारी कमी पर लिखा था। तब मुझे लगा था कि शायद यह कोई एकल मामला होगा—एक अपवाद।

लेकिन आज जब सेक्टर-17 के नामी और फेमस शोरूम्स को करीब से देखा, तो यह भ्रम टूट गया।

यह कोई अपवाद नहीं, बल्कि एक गहरी सिस्टमेटिक बीमारी है।

एक प्रतिष्ठित शोरूम में न रैंप है, न लिफ्ट—मानो दिव्यांग नागरिकों का वहां प्रवेश ही वर्जित हो।

दूसरे बड़े शोरूम में लिफ्ट तो मौजूद है, लेकिन जवाब मिलता है—

“कब से खराब है, किसी को याद नहीं।”

यानी सुविधा सिर्फ दिखावे के लिए है, व्यवहार में शून्य।

सबसे बड़ा सवाल यह नहीं कि लिफ्ट खराब है।

सबसे गंभीर सवाल यह है कि उसे ठीक करने की ज़रूरत किसी ने महसूस ही क्यों नहीं की?

क्या दिव्यांग नागरिक ग्राहक नहीं हैं?

क्या उनकी उपस्थिति, उनकी ज़रूरतें, उनकी आवाज़ मायने नहीं रखती?

क्या कानून सिर्फ फाइलों, नोटिफिकेशन और सेमिनारों तक सीमित है?

चंडीगढ़—जो खुद को देश का सबसे प्लान्ड, सेंसिटिव और प्रोग्रेसिव शहर कहलाता है—

वहीं राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज़ एक्ट का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।

और प्रशासन?

मूकदर्शक बना बैठा है।

राहत की एक झलक

हालांकि इसी सेक्टर-17 में एक उम्मीद जगाने वाली तस्वीर भी दिखी—

बैटरी ऑपरेटेड कार्ट।

ये सिर्फ एक सुविधा नहीं,

बल्कि इंसानियत का चलता-फिरता उदाहरण हैं।

बुज़ुर्गों, दिव्यांगों और अस्वस्थ नागरिकों के लिए ये कार्ट

आत्मनिर्भरता, सम्मान और आज़ादी लौटाती हैं।

जहां सीढ़ियां रास्ता रोक देती हैं,

वहीं ये कार्ट रास्ता खोल देती हैं।

यह साबित करता है कि

अगर नीयत हो, तो समाधान हमेशा संभव है।

सवाल भी, चेतावनी भी

शोरूम मालिकों से सीधा सवाल है—

क्या मुनाफा इंसानियत से बड़ा हो गया है?

और प्रशासन से भी उतना ही सीधा सवाल—

क्या दिव्यांगों के अधिकार सिर्फ पोस्टर, भाषण और कार्यक्रमों तक सीमित हैं?

चंडीगढ़ को सिर्फ स्मार्ट टेक्नोलॉजी नहीं,

रैंप, लिफ्ट और संवेदनशीलता—तीनों की ज़रूरत है।

वरना यह शहर

स्मार्ट नहीं, सिर्फ सिलेक्टिव कहलाएगा।

क्योंकि सुविधा कोई एहसान नहीं—

सुविधा भी अधिकार है।

और अधिकार की अनदेखी,

सीधे-सीधे अपराध।

—आर.के. गर्ग

वरिष्ठ नागरिक, चंडीगढ़

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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