August 28, 2026 5:17 pm

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10 साल में देश पर कर्ज़ का पहाड़, ‘आत्मनिर्भर’ नहीं ‘कर्ज़निर्भर’ हुई अर्थव्यवस्था: सुरजेवाला

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने केंद्र की भाजपा सरकार पर देश को भारी कर्ज़ के बोझ तले दबाने का आरोप लगाया है। उन्होंने संसद में उठाए गए सवालों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए विस्तृत पोस्ट के जरिए सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोला। सुरजेवाला ने कहा कि बीते 10 वर्षों में केंद्र सरकार का कर्ज़ तीन गुना से अधिक बढ़ गया है, जो सरकार के “विकास” और “आत्मनिर्भर भारत” के दावों की पोल खोलता है।

एक दशक में तीन गुना हुआ कर्ज़
रणदीप सिंह सुरजेवाला के अनुसार, 31 मार्च 2014 को केंद्र सरकार पर कुल कर्ज़ ₹58.6 लाख करोड़ था।
वहीं 2024–25 (ताज़ा आंकड़ों) में यह बढ़कर ₹185.95 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
इस तरह केवल 10 साल के भीतर सरकार ने ₹127 लाख करोड़ से अधिक नया कर्ज़ लिया है।
उन्होंने कहा कि यह सामान्य वृद्धि नहीं है, बल्कि “कर्ज़ का विस्फोट” है। सुरजेवाला के मुताबिक, सरकार विकास के नाम पर देश को कर्ज़ में डुबो रही है और आने वाली पीढ़ियों पर भारी वित्तीय बोझ डाल रही है।
संसद में सवाल, सरकार की आर्थिक नीति पर निशाना
कांग्रेस नेता ने कहा कि संसद में उनके द्वारा पूछे गए सवालों से “डबल इंजन सरकार” की असलियत सामने आ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्यों में भाजपा सरकारें विकास मॉडल की बात तो करती हैं, लेकिन वास्तविकता में शासन कर्ज़ के सहारे चलाया जा रहा है।
सुरजेवाला ने कहा, “पिछले 10 सालों में अगर देश पर ₹127 लाख करोड़ का कर्ज़ बढ़ा है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यह पैसा कहां गया और इससे आम जनता को क्या मिला?

आत्मनिर्भर भारत’ बनाम ‘कर्ज़निर्भर भारत’
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सरकार के प्रमुख नारे ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज देश आत्मनिर्भर नहीं, बल्कि ‘कर्ज़निर्भर भारत’ बनता जा रहा है।
उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, “अगर हर साल इतना कर्ज़ लेना ही आर्थिक मजबूती की निशानी है, तो फिर आत्मनिर्भरता का अर्थ क्या है?”
कर्ज़-GDP अनुपात पर सरकार के तर्क को बताया भ्रमित करने वाला
सरकार द्वारा बार-बार दिए जाने वाले कर्ज़-से-GDP अनुपात के तर्क पर सुरजेवाला ने कहा कि यह जनता को गुमराह करने की कोशिश है।
उनका कहना था कि कोविड-19 महामारी के दौरान GDP में गिरावट आई थी और बाद में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने से GDP में उछाल आया। ऐसे में अनुपात में बदलाव होना स्वाभाविक है, लेकिन इससे कर्ज़ का वास्तविक बोझ कम नहीं हो जाता।
उन्होंने कहा,
“यह गणित है, आर्थिक महारत नहीं। आंकड़ों के खेल से सच्चाई नहीं बदली जा सकती।”

‘दिवालिया कंपनियों’ से तुलना
कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर ₹127 लाख करोड़ का कर्ज़ जोड़ना “अच्छी अर्थव्यवस्था” माना जाएगा, तो हर दिवालिया कंपनी को भी सफल मॉडल कहना पड़ेगा।
उन्होंने दो टूक कहा कि विकास के नाम पर बढ़ता कर्ज़ देश की आर्थिक सेहत के लिए खतरे की घंटी है।

“नारे मिट जाते हैं, आंकड़े नहीं”
अपने बयान के अंत में सुरजेवाला ने कहा,
“झूठे नारे समय के साथ मिट जाते हैं, लेकिन आंकड़े हमेशा सच्चाई बताते हैं। भाजपा की सरकार में देश पर उधार बढ़ा है।”
सुरजेवाला के इन आरोपों पर केंद्र सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस बयान के बाद आर्थिक नीतियों को लेकर बहस तेज हो गई

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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