September 21, 2026 3:24 am

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CHANDIGARH: MC के अंतिम वर्ष में भी वेबसाइट अधूरी, निर्वाचित पार्षदों की पहचान गायब

नगर निगम चंडीगढ़ की डिजिटल पारदर्शिता पर बड़ा सवाल, प्रशासनिक उदासीनता उजागर

चंडीगढ़, 11 फरवरी 2026। नगर निगम चंडीगढ़ का मौजूदा कार्यकाल अब अपने अंतिम वर्ष में प्रवेश कर चुका है। आमतौर पर यह वह समय होता है जब कोई भी निर्वाचित निकाय अपनी उपलब्धियों, योजनाओं और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को सार्वजनिक मंचों पर मजबूती से प्रस्तुत करता है। लेकिन चंडीगढ़ नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट की स्थिति इसके ठीक उलट तस्वीर पेश कर रही है।
हैरान करने वाली बात यह है कि निगम की वेबसाइट आज भी अधूरी पड़ी है और उसमें निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की बुनियादी जानकारी तक अपडेट नहीं की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुल पार्षदों में से केवल करीब 15 पार्षदों की ही तस्वीरें वेबसाइट पर दिखाई दे रही हैं। शेष पार्षदों की पहचान डिजिटल मंच से लगभग गायब है।

संवैधानिक पदों पर बैठे प्रतिनिधि भी वेबसाइट से नदारद
स्थिति को और गंभीर बनाता यह तथ्य है कि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर आसीन निर्वाचित प्रतिनिधियों की तस्वीरें और प्रोफाइल तक नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद नहीं हैं। यह चूक केवल तकनीकी त्रुटि नहीं कही जा सकती, बल्कि इसे प्रशासनिक उदासीनता का स्पष्ट उदाहरण माना जा रहा है।
पारदर्शिता और सूचना के अधिकार पर चोट
विशेषज्ञों और नागरिकों का मानना है कि यह स्थिति कई बुनियादी सवाल खड़े करती है।
क्या यह निर्वाचित प्रतिनिधियों के प्रति प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है?
क्या यह सूचना के अधिकार और पारदर्शी शासन की भावना का उल्लंघन नहीं है?
और क्या नागरिकों को उनके जनप्रतिनिधियों से जोड़ने की जिम्मेदारी से नगर निगम प्रशासन पीछे हट रहा है?
नगर निगम जैसी संस्था की वेबसाइट केवल एक सूचना मंच नहीं होती, बल्कि यह नागरिकों और उनके चुने हुए प्रतिनिधियों के बीच एक सेतु का काम करती है। ऐसे में वेबसाइट पर अधूरी और पुरानी जानकारी होना जनता के भरोसे को कमजोर करता है।

स्मार्ट सिटी के दावों पर सवाल
चंडीगढ़ को स्मार्ट सिटी और डिजिटल गवर्नेंस का मॉडल बताया जाता है। लेकिन जब उसी शहर के नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर बुनियादी जानकारी तक अपडेट न हो, तो स्मार्ट सिटी के दावे खोखले नजर आते हैं। डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस की बातों के बीच यह लापरवाही कई असहज सवालों को जन्म देती है।
क्या यह लापरवाही जानबूझकर की जा रही है?
क्या निर्वाचित निकाय को हाशिये पर रखने की मानसिकता इसके पीछे काम कर रही है?
या फिर नगर निगम प्रशासन के लिए डिजिटल पारदर्शिता कभी प्राथमिकता ही नहीं रही?

अंतिम वर्ष में भी नहीं सुधरी व्यवस्था
नगर निगम के कार्यकाल के अंतिम वर्ष में भी यदि वेबसाइट जैसी बुनियादी डिजिटल व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया जा सका, तो यह पूरे प्रशासनिक ढांचे और कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है। यह दर्शाता है कि या तो जिम्मेदारी तय नहीं है या फिर निगरानी का अभाव है।

प्रेस के माध्यम से उठी मांग
इस मुद्दे को लेकर प्रेस के माध्यम से मांग की गई है कि
सभी पार्षदों की संपूर्ण और अद्यतन जानकारी,
मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर की तस्वीरें व प्रोफाइल
तुरंत नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाएं।
साथ ही, इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ जवाबदेही तय की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी उदासीनता दोबारा न दोहराई जाए।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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