August 29, 2026 2:24 am

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आज का पंचांग: विजया एकादशी व कुंभ संक्रांति का संयोग, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त

चंडीगढ़ | 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार): आज फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है, जिसे विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस तिथि पर भगवान विष्णु की आराधना, व्रत और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। साथ ही आज कुंभ संक्रांति का पावन संयोग भी बन रहा है। नई ज्वेलरी खरीदने और धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए यह दिन अनुकूल माना गया है—हालांकि पंचांग के अनुसार कुछ समय और नक्षत्र में सावधानी आवश्यक है।

13 फरवरी का पंचांग
विक्रम संवत: 2082
मास: फाल्गुन
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: एकादशी
दिन: शुक्रवार
योग: वज्र
नक्षत्र: मूल
करण: बलव
चंद्र राशि: धनु
सूर्य राशि: कुंभ
सूर्योदय: सुबह 07:02 बजे
सूर्यास्त: शाम 06:09 बजे
चंद्रोदय: तड़के 04:53 बजे (14 फरवरी)
चंद्रास्त: दोपहर 02:10 बजे
राहुकाल: 11:12 से 12:35 बजे
यमगंड: 15:22 से 16:45 बजे

मूल नक्षत्र में शुभ कार्यों से परहेज
आज चंद्रमा धनु राशि में मूल नक्षत्र में स्थित रहेगा। यह नक्षत्र धनु में 0° से 13°20′ तक फैला होता है। इसके देवता नैऋृति और शासक ग्रह केतु माने गए हैं। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार मूल नक्षत्र को शुभ नहीं माना जाता, इसलिए विवाह, गृहप्रवेश, नए व्यापार की शुरुआत जैसे शुभ कार्यों को टालना उचित है।
हालांकि, खंडहर तोड़ना, अलगाव से जुड़े कार्य अथवा तांत्रिक साधनाएं इस नक्षत्र में की जा सकती हैं।

आज का वर्जित समय
राहुकाल: 11:12 से 12:35 बजे
यमगंड: 15:22 से 16:45 बजे
इन अवधियों में शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। इसके अतिरिक्त गुलिक काल, दुमुहूर्त और वर्ज्यम् में भी नए कार्यों की शुरुआत न करने की सलाह दी जाती है।

एकादशी और कुंभ संक्रांति का यह दिन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उपवास, विष्णु पूजन और दान-पुण्य के लिए दिन श्रेष्ठ है, लेकिन मूल नक्षत्र और वर्जित काल को ध्यान में रखते हुए शुभ कार्यों की योजना बनाना ही समझदारी होगी।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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