— चंडीगढ़ में Magnilek 10 ml को लेकर गंभीर सवाल
चंडीगढ़। चंडीगढ़ में बिक रही एक दवा Magnilek 10 ml को लेकर जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे केवल एक दवा की कीमत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे दवा वितरण तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं। यह मामला अब साधारण “रेट का फर्क” नहीं रह गया, बल्कि एक संभावित प्रणालीगत गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।
MRP में ही विरोधाभास
पहले यह जानकारी सामने आई कि इस दवा का MRP 2550 रुपये है। इसके बाद मैन्युफैक्चरर द्वारा भेजी गई एक फोटो सामने आई, जिसमें उसी दवा की MRP 1899.96 रुपये अंकित है।
यानी एक ही दवा, एक ही मात्रा — लेकिन MRP दो अलग-अलग!
यह सवाल स्वाभाविक है कि
क्या अलग-अलग बैच पर अलग-अलग MRP छापी गई है?
क्या पुराने स्टॉक पर अधिक MRP और नए स्टॉक पर कम MRP दर्ज है?
या फिर कहीं बीच की सप्लाई चेन में छेड़छाड़ की गई है?
अगर वास्तविक MRP 1899.96 रुपये है, तो फिर 2550 रुपये का आंकड़ा आया कहां से?
सप्लाई रेट और बाजार कीमत का अंतर
मामले को और गंभीर बनाता है सप्लाई रेट और बाजार भाव का अंतर। उपलब्ध जानकारी के अनुसार:
दवा का सप्लाई रेट लगभग 290 रुपये + 5% GST, यानी करीब 305 रुपये है।
वहीं बाजार में यही दवा 600 रुपये से लेकर 1250 रुपये तक बेची जा रही है।
यह अंतर सामान्य व्यापारिक मार्जिन से कहीं अधिक है। सवाल यह है कि अगर निर्माता दवा 305 रुपये में सप्लाई कर रहा है, तो मरीज से दोगुनी, तिगुनी या उससे भी अधिक कीमत वसूलने का नैतिक और कानूनी औचित्य क्या है?
यह केवल कीमत नहीं, विश्वास का सवाल है
स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता कोई विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है। दवा कोई लग्ज़री प्रोडक्ट नहीं है, जिसे मांग के अनुसार मनचाही कीमत पर बेचा जाए। दवा मरीज की आवश्यकता है, और आवश्यकता पर मुनाफाखोरी करना केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि नैतिक अपराध भी है।
जब मरीज बीमारी से जूझ रहा होता है, तब वह विकल्पों पर मोलभाव करने की स्थिति में नहीं होता। ऐसे में कीमतों में इस तरह का खेल सीधे-सीधे मरीज के भरोसे और मजबूरी का फायदा उठाने जैसा है।
प्रशासन और विभागों की जिम्मेदारी
इस पूरे प्रकरण में अब चुप्पी की कोई गुंजाइश नहीं बचती।
चंडीगढ़ प्रशासन, ड्रग कंट्रोल विभाग और उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण को तत्काल और संयुक्त रूप से जांच करनी चाहिए:
बैच-वाइज MRP का सत्यापन
पूरी सप्लाई चेन की जांच — निर्माता से लेकर वितरक और रिटेलर तक
अस्पतालों और फार्मेसियों की खरीद-बिक्री रसीदों का ऑडिट
यह सुनिश्चित करना कि कहीं भी MRP से अधिक वसूली तो नहीं हो रही
अगर MRP में भी अंतर है और बाजार मूल्य भी मनमाना है, तो यह केवल बाजार की असमानता नहीं है — यह जनता के विश्वास की हत्या है।
अब समय आ गया है कि दवा की कीमतों में वास्तविक पारदर्शिता लागू की जाए। नियम केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर सख्ती से लागू हों।
मरीज को यह भरोसा मिलना चाहिए कि उसे दवा उसकी बीमारी के हिसाब से मिले, न कि किसी के मुनाफे के गणित के हिसाब से।
क्योंकि बीमारी से लड़ता इंसान
मुनाफे की मशीन नहीं होता।
— आरके गर्ग
सीनियर सिटीजन,













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