दो माह से अधिक समय बीतने पर भी सूचना शिक्षा विभाग को नहीं मिली, विवि के 1400 अनुबंधित शिक्षकों ने जताई चिंता
चंडीगढ़/रोहतक, 15 फरवरी, 2026
हरियाणा यूनिवर्सिटीज कॉन्ट्रैक्चुअल टीचर्स एसोसिएशन (हुकटा) के प्रतिनिधिमंडल ने दीपेंद्र सिंह हुड्डा (रोहतक सांसद), सतपाल ब्रह्मचारी (सोनीपत सांसद) एवं इंदुराज नरवाल (बरोदा विधायक) को ज्ञापन सौंपकर बजट सत्र में हरियाणा के समस्त राजकीय विश्वविद्यालयों में कार्यरत लगभग 1400 अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसरों की जॉब सिक्योरिटी (सेवा-सुरक्षा) के समर्थन में मुद्दा सदन में उठाने की मांग की।

रोहतक व सोनीपत के दोनों सांसदों तथा बरोदा विधायक ने आश्वासन दिया कि वे अनुबंधित विश्वविद्यालय शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा की मांग का समर्थन करते हैं और इस महत्वपूर्ण विषय को सदन में उठाते हुए शिक्षा मंत्री से प्रश्न करेंगे। उन्होंने कहा कि जब हरियाणा कौशल रोजगार निगम के लगभग 1.20 लाख अनुबंधित कर्मचारियों, कॉलेजों के एक्सटेंशन लेक्चररों एवं स्कूलों के गेस्ट टीचरों को जॉब सिक्योरिटी हेतु एक्ट बनाकर सेवा-सुरक्षा प्रदान की जा रही है, तो विश्वविद्यालयों के अनुबंधित शिक्षकों को भी समयबद्ध तरीके से समान सुविधा दी जानी चाहिए, ताकि उनका रोजगार सुरक्षित हो सके।
हुकटा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. विजय मलिक ने बताया कि जॉब सिक्योरिटी का यह महत्वपूर्ण विषय लंबे समय से लंबित है। शीतकालीन विधानसभा सत्र-2024 में इस मुद्दे को भूपेंद्र सिंह हुड्डा (नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री) सहित अन्य विधायकों द्वारा प्रमुखता से उठाया गया था, जिसके बाद माननीय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा सकारात्मक आश्वासन भी दिया गया था।
उन्होंने कहा कि उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा आवश्यक प्रक्रिया को अंतिम चरण तक पहुँचाया जा चुका है, किंतु शिक्षा विभाग को छोड़कर अन्य छह विभागों के अधीन छह विश्वविद्यालयों से लगभग दो माह पूर्व पत्र जारी किए जाने के बावजूद अपेक्षित सूचनाएँ अब तक शिक्षा विभाग को प्राप्त नहीं हुई हैं। इसी कारण पूरी प्रक्रिया बाधित हो रही है, जिससे सभी अनुबंधित शिक्षकों में गहरी चिंता व्याप्त है।

हुकटा उपरोक्त के बारे में हरियाणा सरकार के सभी मंत्रियों, विधायकों व उच्च अधिकारियों से निरंतर मांग कर रहा है कि लंबित सूचनाओं को शीघ्र मंगवाकर बजट सत्र में जॉब सिक्योरिटी बिल प्रस्तुत कर उसे एक्ट के रूप में पारित करवाया जाए, ताकि वर्षों से सेवाएं दे रहे विश्वविद्यालय शिक्षकों को स्थायी सेवा-सुरक्षा प्रदान की जा सके।











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