चंडीगढ़/पंचकूला। पंचकूला निवासी सुप्रसिद्ध कवयित्री कुसुम धीमान ‘कलिका’ के छंदबद्ध काव्य संग्रह “विचारमंजरी” का भव्य लोकार्पण समारोह सेक्टर-17 स्थित चंडीगढ़ स्टेट लाइब्रेरी सभागार में संपन्न हुआ। यह आयोजन अखिल भारतीय साहित्य परिषद पंचकूला इकाई एवं टी.एस. सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री, उपाध्यक्ष, हरियाणा साहित्य एवं संस्कृत अकादमी रहे। कार्यक्रम में हरियाणा प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. मनोज भारत, पंचकूला इकाई अध्यक्ष डॉ. विनोद शर्मा एवं उपाध्यक्ष डॉ. संतोष गर्ग विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त पंजाब प्रांत अध्यक्ष प्रो. सुनील शर्मा, नाडा साहिब मंडल महामंत्री एवं समाजसेविका पुष्पा सिंगरोहा तथा संवाद साहित्य मंच अध्यक्ष प्रेम विज भी कार्यक्रम में विशेष रूप से शामिल हुए।
पूर्व शिक्षिका रहीं कवयित्री कुसुम धीमान ‘कलिका’ साहित्य लेखन में निरंतर सक्रिय हैं। उनके पति धर्मपाल मठारू ने सभी अतिथियों का सम्मान अंगवस्त्र ओढ़ाकर किया। इकाई मार्गदर्शक सुनीता नैन ने कुसुम जी की रचनाओं को सारगर्भित, प्रेरणादायक एवं जीवन मूल्यों से ओतप्रोत बताया।
पुस्तक की समीक्षा अन्नू रानी शर्मा, नीरू मित्तल, गणेश दत्त एवं अदिति अत्रे द्वारा प्रस्तुत की गई। कुसुम जी की छोटी बहन मधु धीमान ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्हें अपनी प्रेरणा और रोल मॉडल बताया।
कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन इकाई महासचिव अनिल ‘चिंतक’ द्वारा किया गया। इस अवसर पर कवयित्री के सुपुत्र, पुत्रवधू सहित परिवार के अनेक सदस्य उपस्थित रहे और उनकी साहित्य साधना को प्रेरणादायक बताया।

मुख्य अतिथि डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने अपने संबोधन में कहा कि छंदबद्ध लेखन गहन अभ्यास, विद्वता और अनुशासन की मांग करता है। उन्होंने “विचारमंजरी” को ज्ञानवर्धक बताते हुए नई पीढ़ी को छंद विधा में लेखन के लिए प्रेरित किया।
पुस्तक समीक्षक अन्नू रानी शर्मा ने कहा कि जिस प्रकार पंचतत्वों से सृष्टि का निर्माण होता है, उसी प्रकार इस काव्य संग्रह में आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी जैसे मूल तत्वों की अनुभूति स्पष्ट झलकती है। रचनाओं में सकारात्मक दृष्टिकोण और जीवन को आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रमुख रूप से दिखाई देती है।
कवयित्री कुसुम धीमान ‘कलिका’ ने बताया कि “विचारमंजरी” में विभिन्न छंद विधाओं पर आधारित 150 से अधिक रचनाएँ शामिल हैं, जिनमें चौपाई, मुक्तक, रोला, कुंडलियाँ, पदावली, घनाक्षरी, सवैया, 40 से अधिक छंद गीत, दोहा सहित अनेक छंद विधाएँ सम्मिलित हैं। उन्होंने सभी अतिथियों, समीक्षकों, पत्रकारों, संस्था एवं लाइब्रेरी प्रशासन का हृदय से आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का समापन उपाध्यक्ष डॉ. संतोष गर्ग द्वारा ज्ञापन के साथ किया गया।
काव्य संग्रह की आदर्श पंक्तियाँ—
“अंतर्मन में उमड़ती विचारमंजरी,
करती है पुष्पित साहित्य उपवन।”
बाल कविताओं से लेकर हास्य-व्यंग्य, वीर रस, भक्ति, प्रेम, शृंगार, देशभक्ति एवं सामाजिक विषयों को समेटे यह कृति हर आयु वर्ग के पाठकों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध होगी।
उल्लेखनीय है कि “विचारमंजरी” पुस्तक Amazon, Flipkart, Google Books एवं Play Store पर उपलब्ध है।











Total Users : 291433
Total views : 493777