April 5, 2026 2:24 pm

April 5, 2026 2:24 pm

आफ द रिकार्ड–यशवीर कादियान

मेरे दुश्मन भी,मेरे मुरीद हैं शायद,

वक्त बेवक्त मेरा नाम लिया करते हैं,
मेरी गली से गुजरते हैं छुपा के खंजर,
रूबरू होने पर सलाम किया करते हैं

शनिवार शाम को करीब 5 बजे का वक्त होगा। नई दिल्ली रेलवे टेसन के प्लेटफार्म नंबर एक पर हमेशा की तरह इस वक्त होने वाली चहल पहल उम्मीद के मुताबिक पहले से मौजूद थी। मुझे यंू तो संडे शाम को दिल्ली से चंडीगढ वापसी करनी थी,लेकिन अचानक से कार्यक्रम बदला और मैंने शनिवार शाम 5:15 बजे की शताब्दी एक्सप्रैस से वापसी करना तय किया। जैसे ही मैं शताब्दी ट्रेन के ई-2 कोच में सवार में हुआ,अचानक से वहां हरियाणा के पूर्व सीएम और केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खटटर साक्षात अवतरित हो गए। इत्तफाक से मेरी और मनोहर जी की सीट लगभग साथ साथ थी। पास पास ही थी। मनोहरलाल के साथ वाली सीट पर उनके सहायक राहुल बैठे थे। सीट पर बैठते ही मनोहरलाल अखबार की सुर्खियों को खंगालने में खो गए। इसी दौरान हमारी उन से आंखें चार हुई-राम राम हुई तो हमें उनके साथ बैठने का अवसर प्राप्त हो गया। उनके सहायक राहुल साथ लगती खाली सीट पर प्रकट हो गए। मनोहरलाल ने चिरपरिचित मनोहारी मुस्कान के साथ हमारा स्वागत किया और अत्यंत आत्मीयता से कुशल क्षेम पूछा। उसके बाद हम दोनों की गपशप ऐसी शुरू कि जैसे कि इस सफर में कब गुजरा अमृतसर, कब लाहौर आया,कुछ याद नहीं रहा। ऐसा लगा कि कुंभ के मेले में बिछड़ी दो आत्माओं का आज पुनर्मिलन हो रहा है। हम दोनों की कुछ पुरानी यादें ताजी हो गई तो कुछ ताजा तरीन किस्सों पर बात हो गई। मनोहरलाल अत्यंत सादगी पंसद राजनेता हैं और रेल-बस-मैट्रो से सफर करते हुए कभी भी यहां वहां दिख सकते हैं। मिल सकते हैं। अब इसी 13 फरवरी यानी शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेवा तीर्थ और कर्त्तव्य भवन कार्यालय को जनता को समर्पित किया। ये कार्यक्रम मनोहरलाल के मंत्रालय शहरी विकास के अधीन ही था। जैसे ही शाम को मनोहराल इस कार्यक्रम से फारिग हुए वो चुपचाप फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले के लिए निकल लिए। ना किसी स्थानीय भाजपाई को बताया और ना किसी जिले के अफसर कोे बताया। वहां चुपके से सांस्कृतिक संध्या का लुत्फ लिया। क्वालिटी वक्त्त बिताया। पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा ने बाद में मनोहरलाल को फोन कर ये शिकवा किया कि उनको आने की खबर पहले दी होती तो वो उनकी आवभगत करते। खातिरदारी करते। खैर मनोहरलाल तो मनोहरलाल हैं। वो सादगी से जीना और तामझाम से दूर रहना पंसद करते हैं। यंू तो उनको जैड श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है,लेकिन वो अपने साथ किसी भी सुरक्षा कर्मी को लेकर सफर नहीं करते। दिखावे से उनको लगभग नफरत है। जैसे नियम वो खुद के लिए बनाते हैं, वैसे ही दूसरों के लिए लागू कर देते हैं। इस से कभी कभी दूसरों को परेशानी तो हो जाती है,लेकिन मनोहरलाल रत्ती भर इसकी परवाह नहीं करते। मिसाल के तौर पर जब वो सीएम थे तो उन्होंने कह दिया कि मंत्रियों-हाईकोर्ट के जजों को सफर के दौरान हर जिले में पायलट जिप्सी नहीं मिलेगी। वो इसको सरकारी संसाधनों का दुरूपयोग मानते हैं। इस तरह के मामलों में उनका इस्टाइल ऐसा सा है कि एक दफा फैसला करने के बाद वो अपने आप की भी नहीं सुनते। उनके इस अंदाज पर कहा जा सकता है..

हम क्या करें अगर न तेरी आरजू करें
दुनिया में और भी कोई तेरे सिवा है क्या?

दबाव में नहीं झुके
इसी तरह का एक फैसला मनोहरलाल ने किया आनलाइन तबादलों का। उनके इस फैसले से उन्हीं के कुछ मंत्री भी खुश नहीं थे। उन्होंने इसका विरोध भी किया,लेकिन मनोहरलाल टस से मस नहीं हुए। मनोहरलाल कहते हैं पहले की सरकारों में सिस्टम का मजाक बना हुआ था। सीएम के आदेशों को एक अदना सा र्क्लक या असिस्टेंट दबा देता था। उन सरकारी आदेशों पर बैठा चाट पकौड़ी खा लेता था,उनको लागू नहीं होने देता था। पहले तो सीएम आफिस से ही तबादले का आदेश करवाना ऊंट को रेल में बिठाने जैसा था। या तो कोई सिफारिशी ढंूढों या फिर रिश्वत का प्रबंध करो। पहले की सरकारों में तबादला एक उद्योग बना हुआ था। जब सीएम आफिस से आदेश हो जाएं तो फिर मंत्री के कार्यालय में इसे दबा लिया जाता था। मंत्री या उनके स्टाफ के लोग बिना जजिया टैक्स वसूले इस फाइल को नीचे नहीं भेजते थे। फिर प्रशासनिक सचिव-निदेशालय स्तर पर ये तबादला आदेश लागू करवाने के लिए फिर से रिश्वत देनी पड़ती। अगर किसी का वहां कोई जुगाड़ नहीं है तो फिर इन आदेशों को दबा लिया जाता। गुम कर दिया जाता था। ऐसा होने पर पहले की सारी मेहनत पर पानी फिर जाता था। हमने इस सारे सिस्टम को बंद कर दिया। ज्यादातर विभागों में आनलाइन तबादला पोलिसी बना दी। 90 से 95 फीसदी कर्मचारी इस तबादला पोलिसी से खुश हैं। सारा टंटा ही खत्म कर दिया। हमने कोशिश की कि किसी भी आदमी को अपने कामों के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर ना काटने पड़े। वो जहां है, वहीं से उनका काम हो जाए। इसी लिए सीएम विंडों की स्थापना की। लगातार इसकी मोनिटरिंग की। कोताही करने वालों को दंड मिलता था। अफसरों ने काम करना शुरू कर दिया था। उनको पता था कि अगर उनकी सीएम विंडो लग गई है तो इसका निपटान करना ही होगा। चुनाव में कांग्रेस के नेता भूपेंद्र हुडडा कहते थे कि अगर हमारा राज आएगा तो हम इन सारे पोर्टल को खत्म करेंगे। मैंने उनको कह दिया कि आप ये कहते रहना कि पोर्टल बंद करेंगे,हमें इसी से फायदा हो जाएगा। जनता को सब पता है कि क्या उनके हित में क्या हित में नहीं है? ये मेरे या किसी ओर को बताने की जरूरत नहीं है। जल्द ही ये हुडडा साहब को भी समझ में आ गया तो उन्होंने अपने पहले के कहे में सुधार करते हुए ये कहना शुरू कर दिया कि वो इन पोर्टल की समीझा करेंगे और जो गैर जरूरी होगा केवल उनको बंद करेंगे। हमने मुख्यमंत्री रहते हुए सिस्टम को बदल देने के बड़े बड़े दावे नहीं किए,लेकिन खामोशी से काम किया। सलीके और करीने से सिस्टम को बदला। लोगों को खुद पता लग गया। हमें इसकी मार्किटिंग करने की जरूरत नहीं पड़ी। हम तो प्रोडेक्ट बनाने में विश्वास करते हैं। जैसे कि हमने हरियाणा में सरकारी नौकरियां मैरिट पर देने की रिवायत शुरू की। ये हरियाणा में एकदम से नया प्रयोग था। इसका हमारी पार्टी के भी कुछ लोगों ने विरोध किया। लेकिन हमने कहा कि हम इसमें भेदभाव नहीं करेंगे। क्षेत्रवाद नहीं करेंगे। जो भी भर्ती होगी वो मैरिट पर होगी। जब कोई भी गरीब आदमी के बेटे या बेटी को सरकारी नौकरी मिलती है तो दूर दूर तक हमारी मार्किटिंग अपने आप हो जाती है। गांव वालों को बखूबी पता है कि फलां व्यक्ति जो रिक्शा चलाता है उसका बेटा अफसर बन गया। फलां व्यक्ति तो रेहड़ी पर सब्जी बेचता है, उसका बेटा पुलिस में भर्ती हो गया। फलां व्यक्ति तो दर्जी का काम करता है, उसकी बेटी का चयन सरकारी नौकरी में हो गया। अब अगर हम मैरिट पर नौकरी ना दें और दावा ये करते रहें कि हम मैरिट पर नौकरी देते हैँ तो ये लोगों के क्यों गले उतरेगा? उनको सब पता है। क्या उनको ये नहीं पता कि पहले कि सरकारों में मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों,विधायकों और अफसरों के रिश्तेदार और बच्चे ही अफसर लगते थे? क्या एचसीएस की लिस्ट पहले से आउट नहीं हो जाती थी कि जिसमें बताया जाता था कि किन प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदार एचसीएस बनने जा रहे हैं? लोगों को ये फर्क अपने आप दिखता। ये मेरे बताने की जरूरत नहीं है।

सैनी को सफल बनाना भी है दायित्व
हरियाणा की मौजूदा सैनी सरकार में उनका दखल पूछे जाने पर मनोहरलाल मुस्कराते हुए कहते हैं कि ये ठीक है कि शुरू शुरू में उनका सरकार के लोगों को कुछ मार्गदर्शन रहता था,लेकिन अब वो प्रशासनिक मामलों में दखल नहीं देते। चंूकि करीब दस बरस तक हरियाणा के सीएम रहे,इसलिए अब भी प्रदेश भर से लोग उनके पास अपने कामों के लिए आते रहते हैं,लेकिन वो अब इनको प्रौत्साहित नहीं करते। सबको मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के पास जाने के लिए ही कहते हैं। नायब सैनी को सफल करना भी तो हमारा ही दायित्व है। अगर केंद्रीय मंत्री के तौर पर भी वो हरियाणा सीएम का भी दायित्व निभाते रहेंगे तो फिर नायब कैसे सफल होंगे? वो सीएम के काम में दखलअंदाजी नहीं करते। करनी भी नहीं चाहिए।

मोदी ने दिए मनोहरलाल को राज चलाने के चार टिप्स
मनोहरलाल बताते हैं कि जब वर्ष 2014 में वो मुख्यमंत्री बने तो सिस्टम के लिए एकदम नए थे। सिस्टम भी उनके लिए नया था। हरियाणा में अफसरों को नहीं जानते थे। सरकार किस तरह से चलेगी, इसको लेकर उनके मन में संशय था। फिर वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए गए। प्रधानमंत्री ने राज चलाने के लिए उन्होंने चार टिप्स दिए। कहने लगे कि अफसरों पर भरोसा करना सीखो। सिस्टम को समझो। परखो। कुछ भी अगर दुविधा है तो अफसरों से पूछो। जल्दबाजी मत करो। दूसरा मंत्र ये है कि फील्ड में ज्यादा से ज्यादा जाओ। जनता के सम्पर्क में रहो। वहां पता लगेगा कि समस्याएं क्या हैं और उनका समाधान कैसे संभव है। तीसरा गुर ये है कि विपक्ष आप को आए दिन ही बताएगा कि क्या समस्याएं हैं। विधानसभा सत्र के अंदर हो या बाहर इन विपक्ष वालों की सुनो। चौथा गुर ये है कि आपको मीडिया बताएगा कि प्रदेश में क्या चल रहा है। ग्राउंड जीरो पर हालात क्या हैं। मैंने ये चारों सूत्र रट लिए और उनके आधार पर ही प्रदेश को चलाया। अच्छा सुझाव कहीं से मिल गया,किसी का मिल गया, उसे मानने से गुरेज नहीं किया।

अफसरों में नहीं किया भेदभाव
मनोहरलाल कहते हैं कि मोदी से मिले मंत्रों को आत्मसात करते हुए अफसरों में कभी भेदभाव नहीं किया। इसका अफसर या उसका अफसर नहीं किया। मुझे पता है कि अफसर ना इसके होते हैं ना उसके..अफसर तो होते हैं जिसकी सरकार हो..जो मौके का सीएम हो। जैसे कि.. जब वो सीएम बने तो शंकुतला जाखू मुख्य सचिव थी। मुझे कुछ लोगों ने बताया कि जाखू की कांग्रेसी पृष्ठभूमि है। कईयों ने कहा कि इनको मुख्य सचिव पद से हटाओ। मैंने किसी की नहीं सुनी। उनको मुख्य सचिव का कार्यकाल पूरा करने दिया। उसके बाद पीके गुप्ता वरिष्ठतम अधिकारी थे। हालांकि उनकी रिटायरमेंट में कम समय ही था,लेकिन उनको भी मुख्य सचिव बनाया। शुरूआत मैंने क्लीन स्लेट से की। पूर्वाग्रह नहीं पाला। अपना और पराया नहीं किया। पहले पहल सबको मौका दिया। सब पर भरोसा किया।

गड़बड़ की तो सीएम आफिस से भी अफसर हटाए
मनोहरलाल कहते हैं कि अगर किसी अफसर ने गलत काम किया तो फिर तुरंत एक्शन भी लिया। यहां तक की मैंने सीएम आफिस से भी अफसरों को हटाया। एक दफा जब ये साबित हो गया कि फलां अफसर ने गड़बड़ की है तो फिर उसको बख्शा भी नहीं। अफसरों के मिजाज पर मनोहरलाल ने अकबर और बीरबल की एक कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि एक दफा अकबर और बीरबल शाम को सैर कर रहे थे। अकबर ने कहा कि आज उनको बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। बीरबल ने पूछा कि आपने आज भोजन में क्या खाया है? अकबर बोले कि बैंगन खाया है। इतना सुनते ही बीरबल ने बैंगन की शान में कसीदे पढने शुरू कर दिए। कहने लगा कि इसका नाम तो बैंगन की बजाय बहुगुण होना चाहिए। इसके तो सिर पर ताज होता है। ये पाचन में सहायक होता है। देखने में सुंदर और मुलायम होता है। इसी तरह कुछ दिन बाद अकबर ने कहा कि बैंगन खाने से उनके पेट में गड़बड़ हो गई है। पेट दर्द हो गया है। ये सुन कर बीरबल ने बैंगन की खाट खड़ी कर दी। कहने लगे कि बैंगन को खाना ही नहीं चाहिए था। इसका नाम तो बे गुण होना चाहिए। इसमें कोई गुण नहीं होता। ये शक्ल से भी बदसूरत होता है। यंू बीरबल को रंग बदलते देखकर अकबर ने हैरत भरे अंदाज में पूछा कि आप कुछ दिन पहले तो बैंगन की तारीफ कर रहे थे और आज बुराई क्यों कर रहे हो? इस पर बीरबल ने कहा कि जनाब, मैं नौकरी करता हंू आप की, ना की बैंगन की। इसी तरह से ये अफसर नौकरी करते हैं सीएम की। ना ये मेरी करते हैं ना उसकी करते हैं। जो मौके पर सीएम है,जिसकी सरकार है ये उसकी नौकरी करते हैं। ये बात उनको बहुत पहले समझ में आ गई थी इसलिए कभी भी किसी की ट्रांसफर पोस्टिंग में कभी भेदभाव नहीं किया।

समस्या पर नहीं,समाधान पर फोकस
मनोहरलाल कहते हैं कि वो समस्या की बजाय समाधान पर फोकस करते हैं। इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि शनिवार को ही आज दिन में रियल एस्टेट निकाय नारेडको की तरफ से नई दिल्ली में एक कांक्लेव था। तयशुदा कार्यक्रम के मुताबिक मुझे इस समारोह में जाते ही अपना भाषण देना था। 20 मिनट का लिखित भाषण तैयार था। लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया। मैंने पहले इन रियल एस्टेट वालों को कहा कि आप बोलिए। खुल कर कहिए। अपनी प्रमुख समस्याएं बताइए। मैंने इनको गौर से सुना। एक तरह से मेरे लिए ये टयूशन की क्लास हो गई। उनकी समस्याएं सुनी और समाधान पर राय ली। मैंने अपना लिखित भाषण नहीं दिया। मैं करीब 45 मिनट बोला। मन से बोला। जिन जिन समस्याओं का समाधान संभव था, उनके बारे में तुरंत कहा कि इस पर गौर करेंगे। समाधान की दिशा में आगे बढेंगे। जो संभव नहीं था, वो विनम्रता से मना कर दिया। यही तो प्रशासन है। और क्या है? आप हमेशा लोगों के लिए सोचें। लोगों के लिए जीएं। लोगों के लिए करें। और हां..लोगों को ना तो बेवकूफ समझिए और ना बनाने की कोशिश करें। ये पब्लिक है.. ये सब जानती है।

सरकार की हैट्रिक पर नहीं था संशय
मनोहरलाल कहते हैं कि हरियाणा में भाजपा की तीसरी दफा सरकार आने पर उनको कभी संशय नहीं था। हमें शुरू से ही पता था कि कांग्रेस में भारी गुटबाजी है और ये अति आत्मविश्वास में है। चुनाव में इन्होंने कई गलतियां की। जब जनता ने भाजपा और कांग्रेस को एक पलड़े में तौला तो उनको लगा कि भाजपा की ही सरकार बनाना उचित है। लोगों को पता था कि भाजपा आएगी तो सबको सबका हक देगी और अगर कांग्रेस आई तो फिर से लूट खसोट होगी। भाई भतीजावाद होगा। क्षेत्रवाद होगा।

सबकी खबर रखते हैं मोदी जी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में मनोहरलाल कहते हैं कि वो दिन रात देश को आगे बढाने के लिए खुद को खपाते रहते हैं। मोदी जी को सबका पता है कि कौन, क्या है। सबकी खबर रखते हैं। इतने बड़े विशाल देश को संभालना और चलाना आसान नहीं है,लेकिन मोदी जी ये सब आसानी से कर लेते हैं। एक केंद्रीय मंत्री का किस्सा सुनाते हुए मनोहरलाल कहते हैं एक दफा ये मंत्री जी मुंबई की यात्रा पर जा रहे थे। दिल्ली स्थित अपने आवास से जींस और टीशर्ट पहन कर ही ये एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गए। एयरपोर्ट पहुंचने से पहले ही इन मंत्री जी के पास प्रधानमंत्री जी का फोन आ गया कि केंद्रीय मंत्री की गरिमा के मुताबिक ही वो वस्त्र पहने और बाद में मुंबई जाएं। उन मंत्री जी को दोबारा अपने आवास लौटना पड़ा और वो कपड़े बदल कर गए। इतनी पैनी दृष्टि होना और इस तरह से सबकी छोटी छोटी खबर रखना छोटी बात नहीं है। प्रधानमंत्री जी हमेशा से सोचते हैं कि देश के साधारण आदमी को लगना चाहिए कि ये उनकी अपनी सरकार है। इसलिए हमारा आचरण और बर्ताव भी उसी के अनुरूप होना चाहिए। हमें कोई भी ऐसा काम नहीं करना जिस से लोगों को लगे कि हम पर सत्ता हावी हो गई है। मोदी के अंदाज पर कहा जा सकता है..

इस चमन को कभी मरूस्थल नहीं होने दूंगा
मर मिटूंगा,मगर ऐसा नहीं होने दंूगा
जब तलक भी मेरी पलकों पे दिए रौशन हैं
अपनी नगरी में अंधेरा नहीं होने दूंगा
तू अगर मेरा नहीं है तो मुझे भी ये जिद है
मैं तुझे भी कभी तेरा नहीं होने दंूगा
दफन हो जायेगा खुद रात के अंधेरे में
जो ये कहता है सवेरा नहीं होने दंूगा
सफर के लम्हे लम्हे का सदुपयोग किया मनोहरलाल ने

शताब्दी ट्रेन में इस सफर के दौरान हम दोनों की जी भर के गपशप हुई। दिल से दिल की बात हुई। जो उन से पूछा उन्होंने खुलकर बताया। हम दोनों ने ब्लैक काफी भी पी। इसी दौरान उनसे कई अन्य लोग भी उनकी सीट पर आकर मिलते रहे। मेरे बाद पंजाब के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी व रेरा के चेयरमैन राकेश कुमार गोयल से भी मनोहरलाल ने रियल एस्टेट की चुनौतियां और समाधान पर बात की। उन से फारिग होने के बाद फिर मनोहरलाल ने अपनी फाइलों का पिटारा खोल लिया। उनके सहायक राहुल उनको जरूरी दस्तावेज देते रहे और मनोहरलाल इनको निपटाते रहे। इस सबके बीच में वो फोन पर लगातार बात करते रहे और जरूरी दिशा निर्देश देते रहे। सफर के पल पल का उन्होंने सदुपयोग किया।
सफर के आखिरी चरण में हरियाणा उद्योग विभाग के निदेशक यश गर्ग भी उनसे शिष्टाचार भेंट करने आए। रेल के इस डिब्बे में कुछ लोग मनोहरलाल के साथ फोटो भी खिंचवाने के चाहवान थे। इन सबको मनोहरलाल ने एडवांस में बता दिया कि चंडीगढ रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद वो इन सबको अपने मन की मुराद पूरी करने का अवसर देंगे। कई लोगों ने उनके साथ फोटो और सैल्फी ली। एक फिल्म स्टार की तरह उनके साथ फोटो खिंचवाने का लोगों में क्रेज था। मनोहरलाल ने किसी को निराश और नाराज नहीं किया। उनके इस सौम्य और अपनेपन के अंदाज से काफी लोग वहां प्रभावित थे। कुछ लोग ऐसा भी कह रहे थे कि दस बरस तक हरियाणा का सीएम रहने और अब केंद्र में बिजली और शहरी विकास जैसे बड़े मंत्रालयों के मंत्री होने के बाजवूद पावर की पपड़ी उनके दिमाग पर नहीं जमी। जैसा वो पावर पाने से पहले थे वैसे ही पावर पाने के बाद हैं। ईश्वर ये दैवीय गुण किसी किसी में देता है। खटटर के मनोहारी अंदाज पर कहा जा सकता है..

पहली बार नजरों ने चांद बोलते देखा
हम जवाब क्या देते खो गए सवालों में
यंू किसी की आंखों में सुबह तक अभी थे हम
जिस तरह से शबनम फूल के प्यालों में
मेरी आंख के तारे अब न देख पाओगे
रात के मुसाफिर थे खो गए उजालों में

लेखक आज समाज और इंडिया न्यूज के कंसलिटिंग एडिटर है

BabuGiri Hindi
Author: BabuGiri Hindi

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