आर.के. गर्ग, सेकेंड इनिंग्स एसोसिएशन, चंडीगढ़ ने जताई चिंता
चंडीगढ़। बुधवार सुबह लगभग 9:55 बजे शहर के व्यस्त कार्यालय समय के दौरान एक माननीय की गाड़ी ट्रैफिक जाम में फंस गई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उनके सुरक्षा कर्मी को स्वयं वाहन से उतरकर ट्रैफिक नियंत्रित करना पड़ा। इस अफरा-तफरी के कारण माननीय को कार्यालय पहुंचने में देरी हुई और कुछ समय के लिए कार्य प्रभावित रहा।
बताया गया है कि उस दौरान हजारों की संख्या में आम नागरिक, अधिवक्ता और कर्मचारी भी जाम में फंसे रहे, जिन्हें अपने-अपने कार्यस्थलों तक पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
उठे कई अहम सवाल
इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर दिए हैं—
क्या संबंधित क्षेत्र में उस समय ट्रैफिक ड्यूटी पर पुलिसकर्मी मौजूद थे?
यदि मौजूद थे तो ट्रैफिक नियंत्रण में चूक क्यों हुई?
क्या वीआईपी मूवमेंट के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया गया?
क्या इस मामले में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी?
आम जनता की समस्या भी गंभीर
शहर में प्रतिदिन आम नागरिक ट्रैफिक जाम से जूझते हैं। कई बार एम्बुलेंस तक जाम में फंस जाती हैं, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है। यदि विशिष्ट व्यक्तियों के लिए विशेष प्रबंध किए जा सकते हैं, तो आम नागरिकों के लिए सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक ट्रैफिक प्रबंधन क्यों नहीं लागू किया जा सकता — यह सवाल भी उठ रहा है।
चंडीगढ़ जैसे योजनाबद्ध शहर में, जहाँ प्रशासन सीधे केंद्र शासित प्रदेश के रूप में संचालित होता है, वहाँ Chandigarh Police की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
SOP और ठोस नीति की जरूरत
कार्यालय समय (सुबह और शाम) के लिए स्पष्ट स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने की मांग की गई है। निम्न सुझावों पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता बताई गई है—
वीआईपी मूवमेंट के लिए स्पष्ट और पारदर्शी ट्रैफिक प्रोटोकॉल।
कार्यालय समय में प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस बल की तैनाती।
आम जनता के लिए नियमित और स्थायी ट्रैफिक एडवाइजरी जारी करना।
आपातकालीन सेवाओं के लिए विशेष लेन सुनिश्चित करना।
आवश्यकता पड़ने पर विधिक प्रावधानों (जैसे धारा 163 आदि) के प्रभावी उपयोग पर विचार।
आर.के. गर्ग, सेकेंड इनिंग्स एसोसिएशन, चंडीगढ़ ने कहा कि जनप्रतिनिधि प्रशासन और न्याय व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और उनका समय निश्चित रूप से मूल्यवान है। हालांकि, ट्रैफिक व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो आम नागरिकों, एम्बुलेंस सेवाओं, विद्यार्थियों और कर्मचारियों — सभी के लिए समान रूप से सुचारु और सुरक्षित हो।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में ट्रैफिक पुलिस की भूमिका केवल CCTV निगरानी तक सीमित होती जा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर सक्रिय ट्रैफिक प्रबंधन की सख्त जरूरत है।
यह घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी मानी जा रही है कि ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर दीर्घकालिक और प्रभावी नीति बनाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति न हो।











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