किसानों की जमीन वापसी को लेकर जिला प्रशासन सक्रिय, नोटिस की तैयारी
नौरंगाबाद के ग्रामीणों ने किसान संगठनों से भी साधा संपर्क
भिवानी। गांव नौरंगाबाद के 38 किसानों से कथित तौर पर करोड़ों रुपये की जमीन लेकर चेक बाउंस करने के मामले में दीप ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर एलएलपी एवं उससे जुड़ी सिस्टर कंसर्न कंपनियों पर जिला प्रशासन ने कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी है।
जिला उपायुक्त साहिल गुप्ता ने एसडीएम कार्यालय से लेकर तहसीलदार स्तर तक पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। प्रशासन की ओर से संबंधित फर्म और उससे जुड़ी कंपनियों को नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है। साथ ही, उनके पूर्व लेन-देन, रजिस्ट्रियों और बैंकिंग दस्तावेजों की भी जांच शुरू कर दी गई है।
सूत्रों के अनुसार प्रशासन दोनों पक्षों की सहमति, राजस्व नियमों और संभावित कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रहा है, ताकि किसानों के हितों की रक्षा की जा सके।
22 एकड़ जमीन, 79 चेक और सभी बाउंस
किसानों के मुताबिक दिसंबर 2025 में 22 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री उक्त फर्म के नाम करवाई गई थी। सौदा 1.5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तय हुआ था। भुगतान के लिए फर्म ने 79 चेक जारी किए, जो फरवरी 2026 में एक-एक कर बाउंस हो गए।
रजिस्ट्री 11 दिसंबर से 29 दिसंबर के बीच छह चरणों में करवाई गई। किसानों का आरोप है कि फर्म ने खाते में पर्याप्त राशि उपलब्ध न होने के बावजूद भारी रकम के चेक जारी कर दिए।
नौकरी और बड़े प्रोजेक्ट का प्रलोभन
पीड़ित किसानों का कहना है कि फर्म से जुड़े प्रतिनिधियों ने गांव में बड़ी औद्योगिक यूनिट स्थापित करने का वादा किया था। दावा किया गया कि चीन के सहयोग से स्टील यूनिट लगाई जाएगी और प्रत्येक प्रभावित परिवार को रोजगार दिया जाएगा।
इन्हीं आश्वासनों के आधार पर ग्रामीणों ने जमीन बेचने का निर्णय लिया।
राजस्व को भी नुकसान का आरोप
शिकायत के अनुसार रजिस्ट्रियों में अलग-अलग कलेक्टर रेट दर्शाकर सरकार को भी करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया।
आरोप है कि आधी जमीन की रजिस्ट्री 42 लाख रुपये प्रति एकड़ तथा शेष की 17–18 लाख रुपये प्रति एकड़ दर्शाई गई, जबकि वास्तविक सौदा 1.5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ का था।
किसान संगठनों से भी साधा संपर्क
बाउंस चेक के कारण अपनी जमीन गंवाने वाले किसानों ने शुक्रवार और शनिवार को जिला व प्रदेश स्तर के विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारियों से मुलाकात कर सहयोग मांगा।
किसान नेताओं ने आश्वासन दिया कि यदि प्रशासनिक स्तर पर समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। जरूरत पड़ने पर धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन अभियान और संबंधित फर्म के कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना भी दिया जा सकता है।
संगठनों ने इसे किसानों के सम्मान और हक की लड़ाई बताते हुए एकजुटता का भरोसा दिलाया।
फर्म के सात हिस्सेदारों का उल्लेख
किसानों की शिकायत के अनुसार फर्म में गौरव पुत्र सुरजीत कुमार (पार्टनर), चंचल पुत्र सुरजीत कुमार, सुरजीत कुमार पुत्र मांगे राम निवासी ज्वाला पुरी (वेस्ट दिल्ली), दीपक सैनी पुत्र अनिल सैनी, आयुष लाठर पुत्र प्रदीप लाठर, प्रदीप लाठर पुत्र सुमुन्द्र लाठर तथा गोहाना निवासी सतीश (गौरव के ससुर) शामिल हैं।
“जमीन हड़पने के लिए ही बनाई गई थी नई फर्म”
ग्रामीणों का आरोप है कि फर्म संचालकों का विभिन्न क्षेत्रों में पहले से कारोबार है, लेकिन जमीन खरीद-फरोख्त के लिए अलग से नई फर्म बनाई गई।
किसानों के अनुसार करीब 81 करोड़ रुपये की जमीन के सौदे किए गए, जबकि फर्म के बैंक खाते में इतनी राशि उपलब्ध नहीं थी। किसानों का आरोप है कि यह पूरी योजना जमीन हड़पने की नीयत से रची गई।
बेटी की शादी के लिए भी नहीं मिला भुगतान
जमीन बेचने वाले एक किसान परिवार ने बताया कि जब वे अपनी बेटी की शादी के लिए भुगतान लेने फर्म के प्रतिनिधियों के पास गए तो उन्हें लगातार टाल दिया गया।
परिवार की बेटी की शादी 19 फरवरी को हो चुकी है, लेकिन अब तक उन्हें एक भी रुपया नहीं मिला है।
जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई और संभावित कानूनी कदमों पर अब सभी की नजरें टिकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।











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