April 5, 2026 6:46 pm

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कुरुक्षेत्र के मथाना में बनेगा जैविक कृषि व आधुनिक प्रबंधन प्रणाली संस्थान, मुख्यमंत्री ने की घोषणा

संस्थान में होंगे कृषि साइंस के यूजी, पीजी से लेकर पीएचडी तक के कोर्स

कैथल-ढांड-पिपली-रादौर-यमुनानगर तक सड़क होगी फोरलेन

लाडवा में अब हर साल लगेगा कृषि विकास मेला

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने लाडवा उपमंडल सचिवालय के नए भवन तथा 9 नई सडक़ों का किया शिलान्यास

कृषि मेला ज्ञान, नवाचार और प्रेरणा का अनूठा संगम – मुख्यमंत्री

चंडीगढ़, 28 फरवरी- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कृषि विकास मेला लाडवा में घोषणा करते हुए बड़ी सौगातें दी हैं। गांव मथाना में 10 एकड़ भूमि पर जैविक कृषि व आधुनिक प्रबंधन प्रणाली संस्थान खोला जाएगा। इस संस्थान में कृषि साइंस के यूजी, पीजी से लेकर पीएचडी तक के कोर्स उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही कैथल से यमुनानगर वाया ढांड, पिपली, रादौर मार्ग को फोरलेन किए जाने की घोषणा की। यह फोरलेन मार्ग एनएच-152डी, एनएच-44 और शामली एक्सप्रेस-वे को जोड़ेगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने लाडवा उपमंडल सचिवालय के नए भवन, लोकनिर्माण विभाग की 9 सडक़ों का शिलान्यास भी किया।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की तरफ से लाडवा अनाज मंडी में आयोजित राज्य स्तरीय कृषि विकास मेले का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने ट्रैक्टर पर बैठकर विश्वविद्यालय व किसानों द्वारा लगाए गए स्टॉलों और कृषि मेले का अवलोकन किया।

मुख्यमंत्री ने कृषि विकास मेला को हरियाणा की कृषि आत्मा का उत्सव बताया जो अन्नदाताओं के परिश्रम, संकल्प और नवाचार का महोत्सव है।

मुख्यमंत्री ने भव्य आयोजन के लिए विश्वविद्यालय और सभी आयोजकों को बधाई व शुभकामनाएं दी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने होली के पर्व की प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं भी दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री व कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री को चौधऱी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. बीआर काम्बोज ने स्मृति चिन्ह, शॉल व पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगतिशील किसानों ने नवाचारों से कृषि क्षेत्र को गति दी है, जो हमारे अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं। इस मेले का थीम जल संरक्षण प्रति बूंद से अधिक फसल रखा गया है। मौजूदा समय में बदलते जलवायु परिदृश्य, घटते भूजल स्तर और अनियमित वर्षा ने कृषि क्षेत्र के सामने अनेक नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ऐसे समय में जल संरक्षण पर केंद्रित यह मेला वास्तव में दूरदर्शी पहल है। प्रति बूंद अधिक फसल का अर्थ तकनीक के साथ हमारी सोच में परिवर्तन लाना भी है। उन्होंने कहा कि हमें समझना होगा कि पानी अनंत नहीं है। यह मेला किसानों को जल प्रबंधन की उन्नत तकनीकों से जोडक़र एक जन-आंदोलन का रूप लेगा।

वैज्ञानिक शोध को हर खेत व हर किसान तक पहुंचाएं

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक शोध को प्रयोगशाला तक सीमित न रखें, बल्कि हर खेत व हर किसान तक पहुंचाएं। किसान और वैज्ञानिक का सीधा संवाद ही कृषि को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है। यह मेला किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों, उन्नत बीजों, नई तकनीकों और वैज्ञानिक सलाह से जोडऩे का एक सशक्त मंच है। यहां पर 150 से अधिक स्टॉल्स, आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रदर्शन, मिट्टी और पानी की जांच सुविधा, रोगग्रस्त फसलों की जांच व निदान, फसल प्रतियोगिता, लक्की ड्रॉ, ये सब मिलकर इस मेले को ज्ञान, नवाचार और प्रेरणा का संगम बना रहे हैं।

सरकार का दृष्टिकोण किसान को अन्नदाता के साथ-साथ ऊर्जा दाता, रोजगार दाता और अर्थव्यवस्था का निर्माता बनाना है

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा कृषि प्रधान प्रदेश है। हमारी पहचान हमारे खेत-खलिहानों से है, हमारी समृद्धि हमारे किसान के पसीने से है। हरियाणा की धरती ने हमेशा देश को अन्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि हमारी डबल इंजन सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि ऊर्जा दाता, रोजगार दाता और अर्थव्यवस्था के निर्माता बने। इसलिए हमारी नीतियां केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसान की आय बढ़ाने, लागत घटाने और जोखिम को कम करने पर केंद्रित हैं।

धान की जगह वैकल्पिक फसलें बोने पर किसानों को 157 करोड़ रुपये की दी वित्तीय सहायता

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हमारे किसान ऐसी फसलों की पैदावार लें, जिसमें पानी की कम जरूरत होती है। सरकार ने ऐसी फसलों को बढ़ावा देने के लिए मेरा पानी-मेरी विरासत योजना वर्ष 2020 में शुरू की। इस योजना के तहत वैकल्पिक फसलें लेने या खेत खाली छोड़ने वाले किसानों को 8 हजार रुपये प्रति एकड़ वित्तीय सहायता दी जाती है। इस योजना के तहत 2 लाख 20 हजार एकड़ में धान की जगह वैकल्पिक फसलें बोने पर किसानों को 157 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई है। इसके अलावा पानी की बचत के लिए वर्षा जल संचयन, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो इरिगेशन तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। माइक्रो इरीगेशन तकनीकों पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है। किसानों को तालाब बनाने के लिए भी 85 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है।

सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के शोधित पानी को सिंचाई के लिए इस्तेमाल करने की 11 योजनाएं पूरी

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के शोधित पानी को सिंचाई के लिए इस्तेमाल करने की 27 योजनाएं तैयार की हैं। इनमें से 11 पूरी हो चुकी हैं। इनसे सिंचाई के लिए एक स्थायी जल स्रोत मिलेगा, नहरों पर दबाव कम होगा और भूजल का दोहन भी घटेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने फसल अवशेष व पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए किसानों को जागरूक किया है और उन्हें पराली प्रबंधन के लिए 1 लाख से ज्यादा मशीनें दी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसान हित में नकली बीज व कीटनाशकों पर रोक लगाने के लिए कानून बनाया है। मुख्यमंत्री ने उपस्थित बीज व कीटनाशक बनाने वाली कंपनियों के प्रतिनिधियों से अनुरोध करते हुए कहा कि वे नकली बीज व कीटनाशकों की रोकथाम में सहयोग करें।

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Author: BabuGiri Hindi

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