रमेश गोयत
चंडीगढ़। सिटी ब्यूटीफुल कहे जाने वाले चंडीगढ़ में इन दिनों पार्किंग की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। व्यवस्थित सेक्टर प्लानिंग के लिए विश्वभर में सराहा जाने वाला यह शहर अब बढ़ती वाहनों की संख्या, सीमित पार्किंग स्पेस और अवैध कब्जों के कारण जाम और अव्यवस्था से जूझ रहा है।
सेक्टर-17 बना उदाहरण
शहर के प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र सेक्टर-17 में हाल ही में पार्किंग को लेकर स्थिति तब सुर्खियों में आई, जब चंडीगढ़ नगर निगम ने बैंक स्क्वायर क्षेत्र से छह लावारिस कारों को जब्त किया। ये वाहन लंबे समय से सार्वजनिक पार्किंग में खड़े थे, जिनमें बैंकों से जुड़े वाहन भी शामिल बताए गए।
कार्रवाई के बाद कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन यह घटना शहर की व्यापक पार्किंग समस्या की ओर इशारा करती है।
क्यों बढ़ रही है समस्या?
1. वाहनों की तेज़ी से बढ़ती संख्या
चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों—मोहाली और पंचकूला—में निजी वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हर परिवार में दो से तीन वाहन आम बात हो गई है। नई कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स में पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था न होने से सड़कें ही स्थायी पार्किंग स्थल बनती जा रही हैं।
2. व्यावसायिक क्षेत्रों में सीमित पार्किंग
सेक्टर-17, सेक्टर-22, सेक्टर-35, सेक्टर-15 और एलांते मॉल जैसे क्षेत्रों में दिनभर भारी भीड़ रहती है। यहां उपलब्ध पार्किंग अक्सर दोपहर तक भर जाती है। इसके बाद लोग नो-पार्किंग जोन या सड़क किनारे वाहन खड़े करने को मजबूर हो जाते हैं।
3. सरकारी और कंडम वाहनों का कब्जा
कई सरकारी विभागों और संस्थानों के पुराने, कंडम वाहन वर्षों तक सार्वजनिक पार्किंग में खड़े रहते हैं। इनका न तो समय पर निस्तारण होता है और न ही इन्हें हटाने की नियमित कार्रवाई होती है। इससे आम लोगों के लिए उपलब्ध पार्किंग और कम हो जाती है।
4. रिहायशी इलाकों में अव्यवस्था
रिहायशी सेक्टरों में भी स्थिति कम गंभीर नहीं है। कई घरों में गेराज होने के बावजूद वाहन बाहर सड़क पर खड़े किए जाते हैं। परिणामस्वरूप आपातकालीन सेवाओं—फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस—के लिए रास्ता संकरा हो जाता है।
क्या कहता है प्रशासन?
नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस समय-समय पर विशेष अभियान चलाकर लावारिस और गलत तरीके से खड़े वाहनों को हटाती है। निगम का दावा है कि सार्वजनिक स्थानों को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए सख्ती जारी रहेगी।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल चालान और जब्ती से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
क्या हो सकते हैं समाधान?
✔️ मल्टी-लेवल पार्किंग का विस्तार
शहर के व्यस्त सेक्टरों में और अधिक बहु-स्तरीय (मल्टी-लेवल) पार्किंग परियोजनाओं की आवश्यकता है।
✔️ स्मार्ट पार्किंग सिस्टम
डिजिटल डिस्प्ले और मोबाइल ऐप के जरिए उपलब्ध पार्किंग की जानकारी देने की व्यवस्था लागू की जा सकती है, जिससे वाहन चालक अनावश्यक चक्कर न लगाएं।
✔️ कंडम वाहनों का समयबद्ध निस्तारण
सरकारी और निजी संस्थानों के अनुपयोगी वाहनों को तय समयसीमा में हटाने की नीति बनाई जानी चाहिए।
✔️ सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा
सिटी बस सेवा और ई-बसों के बेहतर संचालन से निजी वाहनों पर निर्भरता कम की जा सकती है।
✔️ सख्त प्रवर्तन
नो-पार्किंग में खड़े वाहनों पर कड़ी कार्रवाई और भारी जुर्माना भी अनुशासन लाने में सहायक हो सकता है।
आम नागरिक क्या कहते हैं?
सेक्टर-17 के व्यापारी और सेक्टर-22 के निवासी मानते हैं कि पार्किंग की समस्या अब रोजमर्रा की परेशानी बन चुकी है। कई बार लोगों को 15-20 मिनट तक खाली स्थान खोजने में लग जाते हैं, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी होती है।
चंडीगढ़ की सुव्यवस्थित छवि को बनाए रखने के लिए पार्किंग समस्या का स्थायी और व्यापक समाधान जरूरी है। प्रशासनिक सख्ती, नई आधारभूत संरचना और नागरिकों की जिम्मेदारी—तीनों के सामूहिक प्रयास से ही शहर को जाम और अव्यवस्था से राहत मिल सकती है।
सवाल यह है कि क्या समय रहते ठोस कदम उठाए जाएंगे, या सिटी ब्यूटीफुल की सड़कों पर अव्यवस्था का दबाव और बढ़ता जाएगा?











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