सेक्टर-39 नई मंडी का विकास तेज, 92 एससीओ की चरणबद्ध ई-ऑक्शन; जून में 11 साइट्स की बोली
चंडीगढ़। प्रशासन ने सेक्टर-26 की मौजूदा मंडी को सेक्टर-39 स्थित नई मंडी में शिफ्ट करने की दिशा में ठोस कदम बढ़ा दिए हैं। शिफ्टिंग से पहले सेक्टर-39 में बुनियादी ढांचे को विकसित करने का फैसला लिया गया है, ताकि कारोबारियों और आढ़तियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसी क्रम में 12 एससीओ साइट्स की ई-ऑक्शन पूरी हो चुकी है और उनकी अलॉटमेंट प्रक्रिया जारी है, जबकि शेष 11 एससीओ की ई-नीलामी जून में कराई जाएगी।
92 एससीओ की नीलामी से विकसित होगी नई मंडी
प्रशासन के अनुसार सेक्टर-39 नई मंडी में कुल 92 एससीओ साइट्स की नीलामी प्रस्तावित है। मार्च 2025 में इन एससीओ का रिजर्व प्राइस 3 करोड़ 70 लाख 26 हजार 681 रुपये प्रति साइट तय किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि यदि कलेक्टर रेट में संशोधन होता है तो यह कीमत बढ़कर 5 से 6 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
बीते वर्ष मार्च में 23 एससीओ साइट्स ई-ऑक्शन के लिए रखी गई थीं, जिनमें से 12 की नीलामी पूरी हो चुकी है। शेष 11 साइट्स की ई-ऑक्शन जून में कराई जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि चरणबद्ध तरीके से सभी साइट्स की बिक्री कर नई मंडी के निर्माण और आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाए जाएं।
सेल्फ-फाइनेंसिंग मॉडल पर होगा विकास
मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद ने स्पष्ट किया है कि नई मंडी को सेल्फ-फाइनेंसिंग मॉडल पर विकसित किया जाएगा। यानी एससीओ की ई-ऑक्शन से प्राप्त होने वाली राशि को चरणबद्ध तरीके से सड़क, सीवरेज, बिजली, पार्किंग, ड्रेनेज, शेड और अन्य आवश्यक सुविधाओं के विकास पर खर्च किया जाएगा।
प्रशासन का मानना है कि इस मॉडल से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना मंडी को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा सकेगा। सेक्टर-39 में विकसित होने वाली यह मंडी भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाई जा रही है, ताकि बढ़ते व्यापारिक दबाव को संभाला जा सके।
2026-27 के लिए 23.86 करोड़ का प्रस्तावित व्यय
इस बीच मार्केट कमेटी चंडीगढ़ ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपना बजट प्रस्ताव प्रशासन को भेज दिया है। प्रस्ताव के मुताबिक कुल आय 21 करोड़ 74 लाख 8 हजार 700 रुपये और कुल व्यय 23 करोड़ 86 लाख 6 हजार 708 रुपये अनुमानित है। इस तरह करीब 16 लाख 1 हजार 802 रुपये के घाटे का अनुमान जताया गया है।
हालांकि 31 जनवरी 2026 तक मार्केट कमेटी फंड में 1 करोड़ 95 लाख 96 हजार 206 रुपये की क्लोजिंग बैलेंस उपलब्ध है। इसे जोड़ने पर कुल उपलब्ध राशि 23 करोड़ 70 लाख 4 हजार 906 रुपये हो जाती है, जिससे प्रस्तावित खर्च का बड़ा हिस्सा पूरा किया जा सकेगा।
आय के प्रमुख स्रोत
मार्केट कमेटी की आय का सबसे बड़ा स्रोत मार्केट फीस है, जिससे 13 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। इसके अलावा लाइसेंस फीस, कम्पोजिशन फीस/जुर्माना, सब्जी शेड का किराया, सुरक्षा शुल्क और पार्किंग फीस से भी राजस्व प्राप्त होगा।
अप्रैल से मंडी फीस के रूप में 30 लाख रुपये तथा स्क्रैप/पुराने वाहनों की नीलामी से 1 लाख रुपये आय का अनुमान है। कूड़ा संग्रहण शुल्क से 2 करोड़ रुपये प्राप्त होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार से सफाई कार्य के लिए 1 करोड़ रुपये तथा राज्य कृषि विपणन बोर्ड, यूटी चंडीगढ़ से 3 लाख रुपये की वित्तीय सहायता का प्रावधान रखा गया है।
इन निधियों का उपयोग सेक्टर-39 नई मंडी के विकास कार्यों और सेक्टर-26 मंडी के दैनिक संचालन एवं रखरखाव पर किया जाएगा।
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद सफाई पर फोकस
सफाई व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन सतर्क है। हाईकोर्ट के निर्देशों के मद्देनजर सेक्टर-26 मंडी में सफाई व्यवस्था मजबूत करने के लिए एक नए सैनिटरी इंस्पेक्टर का पद सृजित करने का प्रस्ताव भेजा गया है।
मार्केट कमेटी का कहना है कि फिलहाल सफाई कार्य आउटसोर्सिंग के माध्यम से कराया जा रहा है, लेकिन निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्थायी अधिकारी की आवश्यकता है। नए पद के सृजन से सफाई व्यवस्था पर बेहतर नियंत्रण और नियमित मॉनिटरिंग संभव हो सकेगी।
कुल मिलाकर प्रशासन सेक्टर-39 नई मंडी को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर व्यवस्थित तरीके से सेक्टर-26 मंडी को वहां शिफ्ट करने की तैयारी में है। एससीओ की चरणबद्ध ई-ऑक्शन, सेल्फ-फाइनेंसिंग मॉडल और बजट प्रबंधन के जरिए नई मंडी को आत्मनिर्भर और सुव्यवस्थित बनाने की योजना पर तेजी से काम आगे बढ़ रहा है।











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