लाइसेंसिंग इकाइयों का आरक्षित मूल्य ₹454.35 करोड़ तय, निगरानी और पारदर्शिता पर जोर
चंडीगढ़। यूटी प्रशासन ने वर्ष 2026–27 के लिए नई आबकारी नीति को मंजूरी दे दी है। इस नीति का उद्देश्य शराब कारोबार में नियामकीय निगरानी को मजबूत करना, व्यापार सुगमता को बढ़ावा देना, प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित करना और सरकारी राजस्व को सुरक्षित रखना है। नई नीति के तहत कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनसे प्रशासन को राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।
शहर में 97 शराब वेंड, आरक्षित मूल्य ₹454.35 करोड़
नई आबकारी नीति के तहत शहर में कुल 97 खुदरा शराब विक्रय वेंड संचालित किए जाएंगे। इन लाइसेंसिंग इकाइयों का कुल आरक्षित मूल्य ₹454.35 करोड़ निर्धारित किया गया है।
शराब की कीमतों पर सीमित प्रभाव
कंट्री लिकर, IMFL, भारतीय बीयर और भारतीय वाइन के लिए एक्स-डिस्टिलरी प्राइस (EDP) में अधिकतम 2 प्रतिशत तक की वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि यह वृद्धि आयातित वाइन, आयातित बीयर और आयातित विदेशी शराब (IFL) पर लागू नहीं होगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि EDP या EBP में किसी भी अतिरिक्त वृद्धि पर विचार नीति के पहले तिमाही के बाद ही किया जाएगा।
व्यापार को आसान बनाने के उपाय
नई नीति में व्यापार सुगमता को ध्यान में रखते हुए कई प्रावधान किए गए हैं। L-1F और L-1DF लाइसेंस लेने के लिए कस्टम स्वीकृत बॉन्डेड वेयरहाउस का यूटी चंडीगढ़ में होना अब अनिवार्य नहीं रहेगा। ऐसे वेयरहाउस भारत में कहीं भी स्थित हो सकते हैं। साथ ही एक वर्ष के पूर्व अनुभव की शर्त भी समाप्त कर दी गई है।
सभी कस्टम स्वीकृत बॉन्डेड वेयरहाउस को एक्साइज पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा और आयात-निर्यात की खेप का मासिक विवरण हर महीने की 7 तारीख तक पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
रिटेल कोटा यथावत
कंट्री लिकर, IMFL और IFL के रिटेल कोटा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे वर्ष 2025–26 की नीति की तुलना में राजस्व की स्थिति संतुलित रहने की उम्मीद है।
डिपार्टमेंटल स्टोर्स में शराब बिक्री फिर शुरू
नई नीति में L-10B लाइसेंस को दोबारा लागू किया गया है, जिसके तहत संगठित डिपार्टमेंटल स्टोर्स के माध्यम से शराब बिक्री की अनुमति दी जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इससे विशेष रूप से महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और अन्य उपभोक्ताओं को अधिक सुविधा मिलेगी।
सिक्योरिटी राशि और भुगतान नियम सख्त
रिटेल वेंड लाइसेंसधारियों के लिए सिक्योरिटी राशि को बोली राशि के 17 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है। साथ ही लाइसेंस शुल्क और लागू ब्याज का भुगतान अब अगले महीने की 15 तारीख तक एकमुश्त करना होगा, जबकि पहले इसे दो किस्तों में जमा किया जाता था।
यदि निर्धारित समय पर भुगतान नहीं किया गया तो संबंधित L-2 या L-14A लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं और लाइसेंसधारी के अन्य लाइसेंस भी निरस्त किए जा सकते हैं।
निगरानी के लिए सीसीटीवी और GPS अनिवार्य
नई नीति के तहत रिटेल वेंड के अतिरिक्त गोदामों में सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है और विभाग को लाइव फीड उपलब्ध करानी होगी। इसके अलावा शराब के आयात-निर्यात या स्थानीय आपूर्ति में इस्तेमाल होने वाले सभी वाहनों में GPS ट्रैकिंग सिस्टम लगाना भी जरूरी होगा।
बार लाइसेंसधारियों की खरीद व्यवस्था
बार लाइसेंसधारी अपनी शराब निकटतम दो रिटेल वेंड (L-2/L-14A) से खरीदेंगे। यदि दोनों वेंड एक ही संस्था के होंगे तो तीसरे निकटतम वेंड से खरीद की अनुमति होगी।
बॉटलिंग प्लांट में काम के दिन बढ़े
बॉटलिंग प्लांट के कार्य दिवस पांच से बढ़ाकर छह (सोमवार से शनिवार) कर दिए गए हैं। इसके अलावा राजपत्रित अवकाश पर भी ओवरटाइम कार्य की अनुमति दी जाएगी। प्लांट और सीसीटीवी कंट्रोल रूम में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जाएगी, जिनका वेतन विभाग वहन करेगा।
काउ सेस और बीयर की न्यूनतम कीमत
नई नीति में काउ सेस की दरें यथावत रखी गई हैं—
750 मि.ली. कंट्री लिकर की बोतल पर ₹0.50
650 मि.ली. बीयर की बोतल पर ₹0.50
750/700 मि.ली. व्हिस्की की बोतल पर ₹1
इसके अलावा बीयर के न्यूनतम खुदरा मूल्य को EBP के आधार पर श्रेणी-वार तय किया जाएगा।
पारदर्शिता और राजस्व पर जोर
प्रशासन के अनुसार नई आबकारी नीति का मुख्य उद्देश्य नियमन को मजबूत करना, पारदर्शिता बढ़ाना, व्यापार को सुगम बनाना और स्थिर राजस्व सुनिश्चित करना है। साथ ही उपभोक्ताओं की सुविधा और बाजार व्यवस्था को संतुलित रखने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।












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