मुंबई: मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन ही बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली और शुरुआती कारोबार में ही प्रमुख सूचकांक लगभग 3 प्रतिशत तक लुढ़क गए। इससे निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया और कुछ ही मिनटों में लाखों-करोड़ों रुपये की संपत्ति साफ हो गई।
शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट
सुबह करीब 9:22 बजे तक BSE Sensex 2,333 अंक यानी करीब 2.96 प्रतिशत गिरकर 76,585 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं Nifty 50 भी 686 अंक यानी 2.81 प्रतिशत टूटकर 23,764 के स्तर पर आ गया।
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में यह गिरावट केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों पर भी इसका गहरा असर पड़ा।
मिडकैप इंडेक्स करीब 3.28% टूटा
स्मॉलकैप इंडेक्स में लगभग 3.37% की गिरावट दर्ज की गई
इस तेज गिरावट को बाजार विशेषज्ञ “ब्लडबाथ” की स्थिति बता रहे हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बना बड़ी वजह
बाजार में आई इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़कर करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
बताया जा रहा है कि Strait of Hormuz क्षेत्र में तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। यह मार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
इस बीच अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने तेल कीमतों में उछाल को “ईरान के परमाणु खतरे से निपटने की अस्थायी कीमत” बताया है।
सभी सेक्टर लाल निशान में
सोमवार को बाजार में लगभग सभी सेक्टरों में गिरावट देखने को मिली। सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग और ऑटो सेक्टर पर रहा।
मुख्य सेक्टरों का प्रदर्शन:
पीएसयू बैंक इंडेक्स: लगभग 5.32% गिरावट
ऑटो सेक्टर: 3% से ज्यादा गिरावट
मेटल सेक्टर: 3% से अधिक गिरावट
प्राइवेट बैंक इंडेक्स: करीब 3% नीचे
विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ता है जिनकी लागत ईंधन या आयात पर निर्भर करती है।
वैश्विक बाजारों में भी भारी गिरावट
भारतीय बाजारों की तरह ही एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई।
जापान का Nikkei 225 करीब 6.98% गिर गया।
दक्षिण कोरिया का KOSPI लगभग 7.36% टूट गया।
इसके अलावा अमेरिकी बाजार भी पिछले कारोबारी सत्र में लाल निशान पर बंद हुए थे, जिसका असर सोमवार को एशियाई बाजारों पर साफ नजर आया।
निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा हालात में बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। उनका कहना है कि Nifty 50 के लिए 24,600 से 24,700 का स्तर बड़ी बाधा बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। ऐसे में निवेशकों को फिलहाल सतर्कता के साथ निवेश करने की सलाह दी जा रही है।











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